अब पुरुष ले रहे हैं परिवार नियोजन की ज़िम्मेदारी

  • रायपुर, 13 दिसम्बर 2019। परिवार नियोजन अब महिलाओं की ही जिम्मेतदारी नहीं होकर पुरूषों भी की भागीदारी रहेगी। समय के चक्र के साथ लोगों के सोच में परिवर्तन आने लगा है। महिलाओं के बदले अब पुरुष नसबंदी गांव में भी लोगों की पुरानी सोच बदलने लगी है।
    इसका उदहारण है बीते दिनों हुए पुरुष नसबंदी पखवाड़े के दौरान आरंग ब्लाक में 52 पुरुषों ने नसबंदी अपनाई। केवल 3 दिसम्बर को ही 12 गाँव के 23 पुरुषों ने नसबंदी अपनाई और यह प्रक्रिया शासकीय सामुदायिक स्वास्थ केंद्र में की गयी। जबकि इन दिनों ग्रामीण क्षेत्रों में खेती किसानी के चलते घरों में नहीं मिलते हैं, इसके बावजूद भी यह एक तरह का कीर्तिमान स्थापित किया गया।
    इस मानसिक बदलाव में आरंग की ब्लॉेक विस्ताकर प्रशिक्षण अधिकारी श्रीमती सविता साहू का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा। उनके प्रयासों से समाज में भ्रांतियां टूटने लगी है। सविता और उनकी टीम – जिसमें आरएचओ, एएनएम और मितानीनों शामिल थे — डोर-टू-डोर संवाद और `मोर मितान मोर संगवारी’ कार्यक्रम द्वारा गांव में चौपाल लगाकर नसबंदी के बारे में खुलकर चर्चा की गयी। लोगों को पुरुष और महिला नसबंदी के अंतर और पुरुष नसबंदी के फायदे की जानकारी दी गई। इससे प्रोत्सा हित होकर लक्ष्यप दंपति सामने आकर परिवार नियोजन में अपनी भागीदारी को सुनिश्चित किए।
    सविता बताती है लोगों ने नसबंदी से जुड़े जिज्ञासा भरे सवाल किए जिसका `मोर मितान-मोर संगवारी’ कार्यक्रम के रोल मॉडल के रुप में शामिल होकर अपने अनुभव साझा कर जनधारणाओं को तोड़ने में योगदान दिया।“ पुरुषों की नसबंदी के लिए पत्नी और पति को साथ बैठाकर चर्चा कर उनके बीच में उठने वाले शंकाओं का समाधान किया गया,’’ सविता ने बताया।
    लीलाराम पारधी, ग्राम परसवानी निवासी ने बताया उनकी तीन बच्चियां हैं। “बेटे की चाह में परिवार बढा़ना अब समझदारी भरा कदम नहीं है। ऐसे में मैंने पत्नि की जगह‍ खुद की नसबंदी कराकर समझदार पति होने का फर्ज अदा किया। पहले हजारों में से कोई एक पुरुष ही नसबंदी के लिए सहमत होता था, वह भी चोरी छिपे, रिश्तेकदारों एवं समाज को बताए बिना। लेकिन अब सब बदल चुका है,’’ लीलाराम बताते हैं।
    पुरुष नसबंदी पखवाडा 28 नवम्बर से 4 दिसम्बर-2019 तक आयोजित किया गया था। इस साल का थीम- “ पुरुषों की अब है बारी, परिवार नियोजन में भागीदारी “ रहा। इसके तहत 21 से 27 नवंबर 2019 तक प्रथम फेस में लक्ष्यअ दम्पसति संपर्क सप्तारह और दूसरे फेस में 28 नवंबर से 4 दिसंबर तक सेवा प्रदाय सप्तारह के तहत चयनित हितग्राहियों का नसबंदी कराया गया। वहीं रायपुर जिले में इस वर्ष 2019 में कुल 155 एनएसवी कराया गया। जबकि प्रदेश के सभी 27 जिलों में 1797 पुरुषों ने नसबंदी कराया है। हर हितग्राही को प्रक्रिया के बाद क्षतिपूर्ति के एवज में 2000 रुपए भी दिए गए। नसबंदी उपरांत तीन महीने बाद जांच में शुक्राणु संख्याा शून्या पाये जाने पर हितग्राहियों को प्रमाण पत्र प्रदाय किये जाएंगे।
    हुमेंद्र कोसले (28) ग्राम चोरहाडीह निवासी ने बताया उनके दो बच्चोंम हैं। नसबंदी पखवाड़ा के दौरान गांव में सरपंच, सचिव, लक्ष्या दम्पिति के माता-पिता की मीटिंग करवाई गयी जहाँ स्वा।स्य्वा विभाग की टीम ने बताया कि महिला नसबंदी कराने से महिलाओं को ज्याहदा परेशानी होती है। इससे लगभग 3 से 6 महीने तक महिला घरेलू और खेतों में कामकाज नहीं कर सकती है जबकि पुरुषों को नसबंदी के बाद किसी तरह की कमजोरी की शिकायत नहीं होती है।
    परिवार नियोजन के लिए महिलाओं की नसबंदी से कहीं ज्याकदा सरल व दर्द रहित प्रक्रिया पुरुषों के लिए है। फिर भी इसके लिए महिलाओं को ही ज्याकदा प्रोत्सासहित किया जाता रहा है। लेकिन इस बार केंद्र सरकार ने विशेष पखवाडा केवल पुरुष नसबंदी के लिए आयोजित किया गया था।
    नरेंद्र यादव, ग्राम कोरासी निवासी ने बताया प्रक्रिया को लेकर जिस तरह से हमें बताया गया था ठीक उसी तरह से हुआ । डॉक्टार बात करते रहें और पता ही नहीं चला कैसे 5 मिनट में एनएसवीटी पूरा हो गया। न टांका लगा, न चिरा और नहीं कोई दर्द का एहसास हुआ। नरेंद्र ने बताया पुरुष नसबंदी कराने से उन्हेंा गर्व महसूस हो रहा है क्यों कि उन्हों ने पत्नि को जीवन भर के लिए एक तोहफा दिया है जिससे घर की नारी रहेगी स्व्स्थो तो परिवार होगा मस्त और बीमारी कमजोरी रहेगी दूर। जो पत्नि और अपने बच्चोंर से करते हैं प्या‍र वे जरुर अपनाए नसबंदी।
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