Monday, September 28

अमित ने दागा भूपेश पर सवाल,जहां मेरे पिता स्वर्गीय अजीत जोगी की अंत्येष्टि और दसगात्र में कोरोना के नाम पर लाखों को प्रशासन ने उनके अंतिम दर्शन से वंचित रखा, वहीं सत्ताधारी दल कांग्रेस के पूर्णतः राजनीतिक ‘चाय पर चौपाल’ कार्यक्रम के लिए भीड़ जुटाने वो गाँव-गाँव अधिकारी नियुक्त कर मुनादी करा रहा है

प्रशासन की निष्पक्षता का उदाहरण है कि
जहां मेरे पिता जी स्वर्गीय अजीत जोगी जी की अंत्येष्टि और दसगात्र में कोरोना के नाम पर लाखों को प्रशासन ने उनके अंतिम दर्शन से वंचित रखा, वहीं सत्ताधारी दल कांग्रेस के पूर्णतः राजनीतिक ‘चाय पर चौपाल’ कार्यक्रम के लिए भीड़ जुटाने वो गाँव-गाँव अधिकारी नियुक्त कर मुनादी करा रहा है और बरसों से पापा से जुड़े भोले-भाले लोगों को लॉलीपॉप देकर बलपूर्वक तोड़ने में लगा है। (प्रशासनिक आदेश सलग्न)
क्या कोरोना के डर की जगह ‘जोगी’ ने ले ली है जो मंत्रालय छोड़ कर छत्तीसगढ़ शासन के माननीय मंत्रीगण मरवाही घूमने लगे हैं?
प्रशासनिक दुरुपयोग और जोड़तोड़ अस्वस्थ राजनीति का दुःखद हिस्सा बन चुके हैं किंतु जोगी परिवार का मरवाही से रिश्ता दल तक सीमित नहीं है बल्कि दिल की गहराइयों का है।यही हमारी असली ताक़त है।
दुनिया इधर से उधर हो जाए, मुझे पूरा विश्वास है कि पापा का आशीर्वाद-उन्होंने अपनी अंतिम कविता में मुझे लिखा था कि ‘शंखनाद हो चुका है, युद्ध प्रारम्भ है, मैं सारथी बनकर, तुम्हारा रथ चला रहा हूँ’-अंतिम साँस तक मेरे साथ है। जिसके रथ का सारथी स्वयं ‘अजीत’ है वो भले कैसे हार सकता है?
मैं पुनः मरवाही पधारे शासन के समस्त मंत्रियों, विधायकों, अधिकारियों और प्रतिनिधियों को अपनी शुभकामनाएँ देता हूँ। ईश्वर आपको लंबी उम्र दें।

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