अमित पहुंचे सोनकुंड आश्रम,अजीत जोगी जाते थे हर गुरू पूर्णिमा को

मेरे पापा स्वर्गीय श्री अजीत जोगी जी सालों साल से गुरु पूर्णिमा के पावन दिन, सोनकुंड के आश्रम आते थे और मैं भी उनके साथ आता रहा हूँ। ये हमारी प्रथा रही है और इसी प्रथा को आज मैं पापा के आशीर्वाद आगे बढ़ा रहा हूँ।

सोनकुंड आश्रम के पूज्य गुरुओं का दिव्य आशीर्वाद हमेशा हमारे पूरे पेंड्रा, गौरेला और मरवाही क्षेत्र के लोगों पर रहा है। पापा सोनकुंड आश्रम से लौटकर अक्सर कहते थे, “अगर मृत्यु मुझे लेने आये और मुझसे मेरी अंतिम इच्छा पूछे तो मैं कहूँगा, मुझे सोनकुंड की घाटियों में दुबारा अपना बचपन जी लेने दो, मुझे मेरे पूर्वजों और गुरुओं के चरण स्पर्श करने दो ताकि मेरी आत्मा सदा यहाँ समाहित जो जाए।”

आज पापा का स्मरण करते हुए, मैंने पापा के साथ-साथ अपने सभी पूर्वजों और गुरुओं की चरण वंदना की और मरवाही, गौरेला और पेंड्रा के मेरे भाइयों, बहनों, बच्चों, माताओं, बड़े बूढ़ों के सुख और समृद्धि का आशीर्वाद मांगा।

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