Saturday, September 26

एक गैंगस्टर की मौत को यूपी में ठाकुर औऱ ब्राह्मण की राजनीति बनाई जा रही है

अगर हम ठाकुर और ब्राहण की राजनीती को लेकर सोचते हैं तो गोरखपुर मंदिर और उस पर राजपुत ठाकुरो का आस्था और विश्वास भी मायने रखता है। एक मात्र योगी आदित्यनाथ महाराज ही एक नाथ सन्यासी योगी नहीं है। भलकि नाथ संप्रदाय राजपुतो क्षत्रियों चौहानो राठौरो के त्याग से भरा हुआ है। महाराज दिग्गविजय नाथ जी महाराणा प्रताप को वंशज थे। उनसे पूर्व भी अनेक क्षत्रिय वंशियों ने दीक्षा ली है। योगी ने सरकार संभालते ही जनता को विश्वास दिलाया था कि गुंडे बदमाश या तो सुधर जाए या सुधार दिए जाएगें। उनके अनेक भाषण और इन्टरव्यू इसी तरह की चेतावानी से भरे हुए हैं। जिसे जनता भी ताली बजाकर स्वीकार रही है। ऐसे में कोई किसी गुंडे और बदमाश और हिस्ट्री शीटर की जाति को लेकर यूपी में राजनीति खेलेगा तो उसका कोई खास नुकसान योगी आदित्यनाथ महाराज को नहीं पड़ने वाला है। उन्हें मुख्यमंत्री बनाने से पहले ही जनता ने उन्हें एक कठोर मुख्यमंत्री के रूप में पहचाना है। यहीं उनकी पसंद का कारण भी है। उत्तर प्रदेश तमाम तरह के गैंगस्टर और राजनीतिक संरक्षण में पालने वाले गिरोह बाजो का गण है। उत्तर प्रदेश में गैंगस्टर विकास दुबे का एनकाउंटर हो चुका है, मगर उसकी पटकथा अभी लिखी जा रही है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या 2022 के चुनाव में विकास दुबे की पटकथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भारी पड़ सकती है। दुबे के अंतिम संस्कार के बाद कई तरह के सवालों ने अपनी राह बना ली। जैसे योगी ने एकाएक यूपी में शुक्रवार रात से सोमवार सुबह तक 55 घंटे के लॉकडाउन की घोषणा कर दी, जबकि वहां कोरोना के केस एकदम डबल नहीं हो गए थे।
एक दिन के 1384 नए केसों को मिलाकर शनिवार शाम तक राज्य में कोरोना के 36476 मामले सामने आए हैं। विपक्ष और पुलिस एक्सपर्ट की ओर से एनकाउंटर पर अंगुलियां उठ रही हैं तो उसकी सीबीआई जांच क्यों नहीं कराई। सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं कि क्या योगी सरकार ने खुद को बचाने के लिए एसआईटी गठित की है। तब्लीगी समाज के प्रमुख मौलाना साद का जिक्र हुआ। यूपी में कांग्रेस पार्टी के ब्राह्मण चेहरे जितिन प्रसाद, पूर्व राज्यसभा सांसद हुसैन दलवई और जन अधिकार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पप्पू यादव ने भी ‘एनकाउंटर और जाति’ पर कुछ इशारा किया है।ठाकुर और ब्राह्मण राजनीति पर चर्चा तेज हो गई
विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद सोशल मीडिया पर कमेंट्स की बाढ़ आ गई थी। कुछ लोगों ने लिखा कि योगी सरकार में ब्राह्मणों को निशाना बनाया जा रहा है। ठाकुर और ब्राह्मण राजनीति पर चर्चा तेज हो गई। जानकारों का सवाल था कि दुबे की हत्या ने उत्तर प्रदेश में ठाकुर समुदाय के खिलाफ ब्राह्मणों के नेतृत्व वाले एक युद्ध को प्रज्वलित किया है। कुछ लोगों ने इस केस को जोड़ते हुए गांधी, गोडसे और तब्लीगी समाज के प्रमुख मौलाना साद का नाम तक ले लिया। कहा, आज गोडसे की जरूरत है।

मीडिया और दूसरे नेताओं ने मौलाना साद को लेकर कठोर टिप्पणियां नहीं कीं, जबकि दुबे एनकाउंटर में बिना सोचे समझे बयान दिए जा रहे हैं। इस मामले के जानकार बताते हैं कि यूपी में दुबे एनकाउंटर कई तरह के राजनीतिक व सामाजिक बदलावों का जरिया बन सकता है। लोगों ने सोशल मीडिया में लिखा कि विकास दुबे की हत्या नहीं हुई है, बल्कि ब्राह्मणों के विश्वास को मार दिया गया है। लोग आपस में मिलकर इस केस की चर्चा न करें, उनमें एक सामाजिक दूरी बनी रहे, इसके लिए कोरोना की आड़ लेकर 55 घंटे का लॉकडाउन कर दिया गया।

जब लोगों में यह चर्चा होने लगी कि ये सब दुबे मामले को शांत करने के लिए हो रहा है तो सरकार के कान खुल गए। आनन-फानन में शनिवार को यह घोषणा कर दी गई कि अब हर सप्ताहांत पर सरकारी और निजी कार्यालय बंद रहेंगे। इसके पीछे कोरोना को ही बड़ी वजह बताया गया है। इतने बड़े केस की सीबीआई जांच को लेकर योगी सरकार ने कुछ नहीं कहा। वजह, अगर यह जांच सीबीआई करती तो हो सकता है कि भविष्य में ये मामला योगी के गले की फांस बन जाए। केंद्र में सत्ता बदलने के बाद सीबीआई के पिटारे से कुछ ऐसा निकल जाए, जो राजनीतिक तौर पर योगी को नुकसान पहुंचा दे।

उत्तर प्रदेश में गैंगस्टर विकास दुबे का एनकाउंटर हो चुका है, मगर उसकी पटकथा अभी लिखी जा रही है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या 2022 के चुनाव में विकास दुबे की पटकथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भारी पड़ सकती है। दुबे के अंतिम संस्कार के बाद कई तरह के सवालों ने अपनी राह बना ली। जैसे योगी ने एकाएक यूपी में शुक्रवार रात से सोमवार सुबह तक 55 घंटे के लॉकडाउन की घोषणा कर दी, जबकि वहां कोरोना के केस एकदम डबल नहीं हो गए थे।
एक दिन के 1384 नए केसों को मिलाकर शनिवार शाम तक राज्य में कोरोना के 36476 मामले सामने आए हैं। विपक्ष और पुलिस एक्सपर्ट की ओर से एनकाउंटर पर अंगुलियां उठ रही हैं तो उसकी सीबीआई जांच क्यों नहीं कराई। सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं कि क्या योगी सरकार ने खुद को बचाने के लिए एसआईटी गठित की है। तब्लीगी समाज के प्रमुख मौलाना साद का जिक्र हुआ। यूपी में कांग्रेस पार्टी के ब्राह्मण चेहरे जितिन प्रसाद, पूर्व राज्यसभा सांसद हुसैन दलवई और जन अधिकार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पप्पू यादव ने भी ‘एनकाउंटर और जाति’ पर कुछ इशारा किया है।

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