Monday, September 21

छत्तीसगढ़ के कई गांवों में आज भी हुए प्रदर्शन, किसानों ने कहा : देशभक्ति की लड़ाई में जान देंगे, लेकिन कॉरपोरेटों को जमीन नहीं, ये देश बिकाऊ नहीं है

“कॉर्पोरेट भगाओ – किसानी बचाओ – भारत बचाओ” के नारे लगाते हुए प्रदेश के कई गांवों में आज भी किसानों ने प्रदर्शन किया और केंद्र सरकार की कॉर्पोरेटपरस्त नीतियों के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर किया। आंदोलनकारी किसानों और आदिवासियों का संदेश स्पष्ट है कि कॉरपोरेटों के खिलाफ लड़ाई एक देशभक्तिपूर्ण संघर्ष है और इस संघर्ष में वे अपनी जान दे देंगे, लेकिन जंगल और जमीन नहीं : ये देश और यहां की जनता बिकाऊ नहीं है।

उल्लेखनीय है कि अ. भा. किसान संघर्ष समन्वय समिति और भूमि अधिकार आंदोलन के आह्वान पर कल ‘किसान मुक्ति दिवस’ के रूप में देशव्यापी आंदोलन का आह्वान किया गया था। इस आह्वान पर प्रदेश में किसानों और आदिवासियों के 25 संगठनों में एकता कायम हुई है। प्रदेश में कई स्थानों पर भारी बरसात और कमरछठ पर्व के चलते यह आंदोलन बाधित हुआ। दुर्ग, चांपा-जांजगीर, बलौदाबाजार, रायपुर, कांकेर, रायगढ़, धमतरी जिलों के प्रभावित कई गांवों में आज विरोध प्रदर्शन आयोजित किये गए।

मीडिया के लिए इन विरोध प्रदर्शनों की तस्वीरें और वीडियो जारी करते हुए समन्वय समिति से जुड़े विजय भाई और छग किसान सभा राज्य अध्यक्ष संजय पराते ने इस देशव्यापी आह्वान को छत्तीसगढ़ में सफल बनाने के लिए किसानों, आदिवासियों और ग्रामीण जनता को बधाई दी है। उन्होंने बताया कि खेती-किसानी और आदिवासियों की समस्याओं और उनकी मांगों पर पूरे देश से पहुंचे ज्ञापनों को आज प्रधानमंत्री को सौंपा गया और उनसे मांग की गई कि आवश्यक वस्तु अधिनियम, कृषि व्यापार और ठेका खेती के संबंध में केंद्र सरकार ने जो अध्यादेश और प्रशासकीय आदेश जारी किए हैं, उन्हें तुरंत वापस लिया जाएं, क्योंकि इससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली तहस-नहस हो जाएगी और महंगाई बढ़ेगी, कृषि व्यापार देशी-विदेशी कॉर्पोरेट कंपनियों के हाथों में चले जाएगा और किसान समर्थन मूल्य से वंचित हो जाएगा तथा देश की खाद्यान्न आत्मनिर्भरता और बीज सुरक्षा नष्ट हो जाएगी। इस ज्ञापन के जरिये इस देशव्यापी आंदोलन में शामिल सभी संगठनों ने कोरोना महामारी के कारण गरीब जनता की रोजी-रोटी पर जो संकट आ खड़ा हुआ है, उससे निपटने के लिए सबको मुफ्त पोषण आहार व नगद सहायता देने और सबका मुफ्त कोरोना टेस्ट कराने की भी मांग की है। देश के किसान खेती-किसानी के लिए आधी कीमत पर डीजल देने, वन नेशन – वन एमएसपी और सार्वजनिक उद्योगों का निजीकरण रोकने की भी मांग कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में आज इस आंदोलन में शामिल होने वाले संगठनों में छत्तीसगढ़ किसान सभा, आदिवासी एकता महासभा, छग प्रगतिशील किसान संगठन, दलित-आदिवासी मंच, जनजाति अधिकार मंच, आंचलिक किसान सभा, सरिया, परलकोट किसान संघ, वनाधिकार संघर्ष समिति, धमतरी आदि संगठन प्रमुख हैं।

आंदोलन से जुड़े किसान नेताओं ने छत्तीसगढ़ सरकार की आलोचना की है कि सरकार के तमाम दावों के बावजूद प्रवासी मजदूरों और ग्रामीणों को मुफ्त राशन तक नहीं मिल रहा है। उन्होंने बोधघाट परियोजना को आगे बढ़ाने और वनाधिकार कानून, पेसा और 5वीं अनुसूची के प्रावधानों को क्रियान्वित न करने के लिए भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि कोल ब्लॉको को व्यावसायिक खनन के लिए कार्पोरेटों को देने के केंद्र के प्रस्ताव को सहमति देकर राज्य सरकार ने लाखों आदिवासी परिवारों के विस्थापन का रास्ता खोल दिया है।

इन किसान-आदिवासी संगठनों ने राज्य स्तर पर बनी एकता को मजबूत करने के लिए शीघ्र ही एक बैठक करने और कृषि संबंधी मुद्दों पर आंदोलन का विस्तार करने का फैसला किया है।https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=3731479020198840&id=100000103354224

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *