निर्भया केस के दोषी देश के धैर्य की परीक्षा ले रहे हैं: दिल्ली हाईकोर्ट से केंद्र ने कहा

नई दिल्ली। निर्भया गैंगरेप मामला भारत के इतिहास में दर्ज होगा जिसमें जघन्य अपराध के दोषी देश के धैर्य की परीक्षा ले रहे हैं। केंद्र सरकार ने शनिवार (1 फरवरी) को दिल्ली उच्च न्यायालय से यह बात कही। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने निर्भया मामले में फांसी पर स्थगन को चुनौती देने वाली केंद्र की याचिका पर चारों दोषियों को नोटिस जारी किया। याचिका पर रविवार (2 फरवरी) को भी सुनवाई जारी रहेगी।
तिहाड़ जेल के अधिकारियों ने शनिवार को दिल्ली हाईकोर्ट का रुख करते हुए 2012 के निर्भया सामूहिक दुष्कर्म और हत्या मामले में चार दोषियों को फांसी देने पर रोक लगाने वाले निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी है। याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल के समक्ष पेश किया गया था। जेल अधिकारियों ने निचली अदालत के शुक्रवार (31 जनवरी) के आदेश को चुनौती दी है जिसमें अगले आदेश तक दोषियों की फांसी की सजा पर तामील को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया था। दोषियों को शनिवार (1 फरवरी) को फांसी दी जानी थी।
दूसरी बार टली थी फांसी की सजा
दिल्ली की एक अदालत द्वारा शुक्रवार (31 जनवरी) को निर्भया सामूहिक बलात्कार एवं हत्याकांड के चार दोषियों की मृत्यु के वारंट की तामील अगले आदेश तक स्थगित किए जाने के बाद उन्हें शनिवार सुबह दी जाने वाली फांसी एक बार फिर टाल दी गई थी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धमेंद्र राणा ने चारों दोषियों की अर्जी पर यह आदेश जारी किया किया था। चारों दोषियों ने एक फरवरी को उन्हें फांसी देने पर रोक लगाने की मांग की थी। पवन कुमार गुप्ता (25), विनय कुमार मिश्रा (26), अक्षय कुमार (31) और मुकेश कुमार सिंह (32) को एक फरवरी को सुबह छह बजे फांसी दी जानी थी।
दूसरी बार मृत्यु वारंट की तामील टाली गई है। पहली बार सात जनवरी को चारों दोषियों को 22 जनवरी को फांसी देने का मृत्यु वारंट जारी किया गया था। इस पर 17 जनवरी को स्थगन दिया गया था। उसी दिन फिर उन्हें एक फरवरी को फांसी देने के लिए दूसरा वारंट किया गया जिस पर शुक्रवार (31 जनवरी) को रोक लगा दी गई।
पवन, विनय और अक्षय के वकील ए. पी. सिंह ने अदालत से फांसी पर अमल को अनिश्चित काल के लिए स्थगित करने की अपील की और कहा कि उनके कानूनी उपचार के मार्ग अभी बंद नहीं हुए हैं। तिहाड़ जेल प्रशासन ने उनके आवेदन को यह कहते हुए चुनौती दी थी कि यह विचारयोग्य नहीं है तथा उन्हें अलग-अलग फांसी दी जा सकती है, लेकिन तिहाड़ जेल की यह दलील अदालत में स्वीकार नहीं हुई।
यह था मामला
दिल्ली के बसंत विहार इलाके में 16 दिसंबर, 2012 की रात को 23 साल की पैरामेडिकल छात्रा के साथ चलती बस में बहुत ही बर्बर तरीके से सामूहिक दुष्कर्म किया गया। इस जघन्य घटना के बाद पीड़िता को इलाज के लिए सरकार सिंगापुर ले गई जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने बस चालक सहित छह लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें एक नाबालिग भी शामिल था। इस मामले में नाबालिग को तीन साल तक सुधार गृह में रखने के बाद रिहा कर दिया गया, जबकि एक आरोपी राम सिंह ने जेल में खुदकुशी कर ली। फास्ट ट्रैक कोर्ट अदालत ने इस मामले में चार आरोपियों पवन, अक्षय, विनय और मुकेश को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। फास्ट ट्रैक कोर्ट के इस फैसले को उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय ने भी बहाल रखा था।

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