नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार मे हो रहा है,यह कैसा घोटाला,जैसे दूध की रखवाली का जिम्मा बिल्ली को ही दे डाला- छात्र पालक संघ,छत्तीसगढ़।।

निजी स्कूलों की मनमानी फीस वसूली को रोकने के लिए आयोग बनाने का दिखावा करने वाली छत्तीसगढ़ सरकार एक तरफ प्रदेश के भोले भाले पालकों को निजी स्कूलों की मनमानी फीस वसूली के बोझ से बचाने का दिखावा कर रही है,वहीं दूसरी तरफ गरीब बच्चों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान करने के लिए बनाए गए शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत प्रवेश प्रक्रिया के लिए समस्त दस्तावेजों की जांच करने की जिम्मेदारी व गरीब बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने की चाबी निजी विद्यालयों को ही दे दी है,जिससे निजी विद्यालयों द्वारा इन गरीब व जरूरतमंद बच्चों के आवेदनों को अपात्र करके उन सीटों पर स्कूल द्वारा निर्धारित लाखों रुपए की मनमानी फीस वसूली की संभावनाएं बढ़ गई है।
शिक्षा विभाग के इस फैसले से ऐसा प्रतीत होता है जैसे बिल्ली को ही दूध की रखवाली की जिम्मेदारी दे दी गई है।
शिक्षा विभाग के इस फैसले से कई सवाल प्रदेश की जनता के मन में सकते हैं,जैसे।
क्या शिक्षा विभाग ने स्कूल संचालको को आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए साठ-गाठ करके निर्देश जारी किया है????
क्या अभिभावको को परेशानी होने की परिस्थिति में अब शिक्षा विभाग में शिकायत करने के बदले निजी विद्यालय फैसला लेगा????
अगर निजी विद्यालय किसी आवेदन को आपात्र कर देते हैं तो शिक्षा विभाग आवेदन या शिकायत किए गए सत्र में ही फैसला कर पाएगा या गरीब बच्चों और पालको को कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ेंगे बच्चो का भविष्य बर्बाद होगा????
छत्तीसगढ़ छात्र पालक संघ ने इस संदर्भ में संचालक,लोक शिक्षण संचालनालय व प्रमुख सचिव,शिक्षा विभाग,छत्तीसगढ़ शासन को पत्र लिखकर जल्द से जल्द इस आदेश को वापस लेने का अनुरोध किया है,और सरकार
के इस फैसले से गरीब छात्र छात्राओं व पालको को होने वाली परेशानियों के खिलाफ आंदोलन करने की चेतावनी दी है।
छत्तीसगढ़ सरकार के द्वारा इस संबंध में जारी किए गए आदेश से साफ जाहिर है,कि राज्य सरकार किस तरह से निजी विद्यालयों को फायदा पहुंचाने के लिए शिक्षा के अधिकार अधिनियम को कड़ाई से लागू करने के बजाय इस कानून को कमजोर करने के लिए शिक्षा माफियाओं (निजी संचालकों)के एजेंट के तौर पर कार्य कर रही है।

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