Tuesday, September 22

न्यायमूर्ति मुरलीधर के तबादले पर विवाद, कांग्रेस ने बताया शर्मनाक, केंद्र ने कहा- नियमित तबादला

नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एस. मुरलीधर के स्थानांतरण के समय को लेकर बृहस्पतिवार को विवाद पैदा हो गया। कांग्रेस ने कहा कि ‘‘मध्य रात्रि’’ में अधिसूचना जारी किया जाना ‘‘शर्मनाक’’ है, वहीं केंद्र सरकार ने विपक्षी दलों पर ‘‘नियमित’’ स्थानांतरण का राजनीतिकरण करने के आरोप लगाए। न्यायमूर्ति एस. मुरलीधर ने कथित नफरत भरे भाषण के लिए भाजपा के तीन नेताओं के खिलाफ मामला दर्ज नहीं करने को लेकर पुलिस की आलोचना की थी। केंद्रीय कानून मंत्रालय ने बुधवार की रात को तीन अलग अधिसूचनाएं जारी कर न्यायमूर्ति मुरलीधर और दो अन्य न्यायाधीश बंबई उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति रणजीत वसंतराव मोरे और कर्नाटक उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति रवि विजय कुमार मलीमथ का तबादला कर दिया था। न्यायमूर्ति मुरलीधर का तबादला पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में किया गया है।
अधिसूचनाओं में कहा गया कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भारत के प्रधान न्यायाधीश से विचार-विमर्श कर तबादलों को मंजूरी दी। दिल्ली उच्च न्यायालय में तीसरे सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश मुरलीधर का तबादला ऐसे दिन हुआ जब उन्होंने भाजपा के नेता प्रवेश वर्मा, कपिल मिश्रा और अनुराग ठाकुर पर कथित नफरत भरे भाषण को लेकर पुलिस द्वारा प्राथमिकी दर्ज करने में विफलता पर ‘‘क्षोभ’’ जाहिर किया था। केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के कॉलेजियम की अनुशंसा पर न्यायमूर्ति मुरलीधर का तबादला किया गया। उन्होंने विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि वे नियमित तबादले का राजनीतिकरण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्थानांतरण में ‘‘स्थापित प्रक्रिया’’ का पालन किया गया है। भाजपा के संवाददाता सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि कॉलेजियम की अनुशंसा के मुताबिक तबादला किया गया है।
अनुशंसा 12 फरवरी को की गई थी। कांग्रेस ने आरोप लगाए कि न्यायमूर्ति मुरलीधर का तबादला दिल्ली हिंसा मामले में भाजपा के कुछ नेताओं को बचाने के लिए किया गया और न्यायपालिका के खिलाफ सरकार की ‘‘धमकी और बदले की राजनीति’’ का पर्दाफाश हो गया।कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह न्याय को ‘‘दबाने’’ का प्रयास कर रही है और ‘‘न्यायपालिका में लोगों का भरोसा तोड़ रही है।’’ उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘मध्य रात्रि में न्यायमूर्ति मुरलीधर का तबादला वर्तमान सरकार के समय में कोई चौंकाने वाली बात नहीं है लेकिन निश्चित तौर पर यह शर्मनाक और दुखद है।’’ मुरलीधर के तबादले पर कांग्रेस के पूर्व प्रमुख राहुल गांधी ने ट्वीट किया, ‘‘बहादुर न्यायाधीश लोया को याद करता हूं जिनका तबादला नहीं किया गया।’’ सीबीआई के विशेष न्यायाधीश बी एच लोया सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ मामले की सुनवाई कर रहे थे और एक दिसम्बर 2014 को कथित रहस्यमय परिस्थितियों में उनकी मौत हो गई। न्यायमूर्ति मुरलीधर के तबादले पर कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार न्यायपालिका के खिलाफ ‘‘बदले की लड़ाई लड़ रही है।’’
सुरजेवाला ने संवाददाताओं से कहा, 26 फरवरी को न्यायमूर्ति मुरलीधर एवं न्यायमूर्ति तलवंत सिंह की दो न्यायाधीशों की पीठ ने दंगा भड़काने में कुछ भाजपा नेताओं की भूमिका को पहचानकर उनके खिलाफ सख्त आदेश पारित किए एवं पुलिस को कानून के अंतर्गत तत्काल कार्रवाई करने का आदेश दिया। इसके कुछ घन्टे बाद ही एक न्यायाधीश का तबादला कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया, मोदी सरकार ने न्यायपालिका की निष्पक्षता पर हमला बोला है। न्यायपालिका के खिलाफ बदले की कार्रवाई कर रही है। सुरजेवाला ने सवाल किया कि क्या भाजपा नेताओं को बचाने के लिए तबादले का यह कदम उठाया गया? क्या भाजपा सरकार को डर था कि भाजपा नेताओं के षड्यंत्र का पर्दाफाश हो जाएगा? कितने और न्यायाधीशों का तबादला करेंगे? कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कानून मंत्री प्रसाद ने कहा, ‘‘नियमित स्थानांतरण का राजनीतिकरण कर कांग्रेस ने फिर से न्यायपालिका के प्रति अपने निरादर को प्रदर्शित किया है।’’प्रसाद ने कई ट्वीट कर कहा, ‘‘आदरणीय न्यायाधीश का तबादला 12 फरवरी को भारत के प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाले उच्चतम न्यायालय के कॉलेजियम की अनुशंसा के मुताबिक किया गया।’’उन्होंने कहा कि किसी न्यायाधीश का तबादला करने से पहले उसकी सहमति ली जाती है। विपक्षी दलों पर हमला जारी रखते हुए प्रसाद ने कहा कि भारत के लोगों ने कांग्रेस को खारिज कर दिया है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के न्यायाधीश लोया के जिक्र वाले ट्वीट पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उनके मामले में उच्चतम न्यायालय फैसला सुना चुका है। उन्होंने कहा, ‘‘जो लोग सवाल उठा रहे हैं वे उच्चतम न्यायालय के फैसले का सम्मान नहीं करते। क्या राहुल गांधी खुद को उच्चतम न्यायालय से ऊपर मानते हैं।’’ प्रसाद ने कहा कि सरकार न्यायपालिका की स्वतंत्रता का सम्मान करती है। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्र से पूछा कि वह न्यायमूर्ति मुरलीधर का तबादला कर क्या संदेश देना चाहती है। माकपा ने कहा कि न्यायमूर्ति एस. मुरलीधर का तबादला उनके अदालती आदेश को लेकर ‘‘चुनिंदा प्रतिक्रिया’’ है। वामपंथी पार्टी ने मांग की कि सरकार स्थानांतरण के आदेश को खारिज करे ताकि न्याय प्रणाली में लोगों का भरोसा प्रबल हो। गैर सरकारी संस्था कैंपेन फॉर ज्यूडिशियल अकाउंटैबिलिटी एंड रिफॉर्म्स (सीजेएआर) ने कहा कि तबादले का ‘‘जन हित’’ से कोई लेना देना नहीं है और यह ईमान एवं साहसी न्यायिक अधिकारी को ‘‘दंडित’’ करने के समान है। इसने बयान जारी कर कहा, ‘‘न्यायमूर्ति मुरलीधर ने केंद्र सरकार के वर्तमान मंत्रियों, विधायकों और अन्य उच्चाधिकारियों के आचरण पर कड़े सवाल किए थे और लगता है इसी कारण यह कदम उठाया गया।’’

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