Sunday, September 20

रमन के वर्चस्व को कवर्धा में लगातार कमजोर करते मो अकबर की रणनीति से कांग्रेस का वर्चस्व बढ़ा

प्रदेश में लगातार पन्द्रह वर्षो तक मुख्यमंत्री रहे डॉ. रमन सिंह अपने गृह जिले कबीरधाम में भाजपा की पकड़ कायम नहीं रख पाए। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की सरकार बनने के पश्चात् नगरीय निकाय व फिर हुए पंचायत चुनाव में पूरा परिदृश्य बदल गया तथा जिले में कांग्रेस का दबदबा बन गया है। प्रदेश के वन, परिवहन, आवास एवं पर्यावरण, विधि विधाई कार्य मंत्री मोहम्मद अकबर की सधी रणनीति के चलते कांग्रेस ने कबीरधाम जिले में अपनी पकड़ बना ली है।

  1. रमन सिंह के मुख्यमंत्री रहते कबीरधाम जिले में भाजपा की तूती बोलती थी। राजनीति में बाजी पलटी तथा विधान सभा चुनाव में कबीरधाम जिले की दोनों सीट कवर्धा व पंडरिया में कांग्रेस ने बाजी मारी। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद नगरीय निकाय चुनाव में भी कांग्रेस का करिश्मा जारी रहा। जिले के 6 में से 5 निकायों कवर्धा नगर पालिका, पिपरिया नगर पंचायत, सहसपुर लोहारा नगर पंचायत व बोडला नगर पंचायत, पांडातराई नगर पंचायत में कांग्रेस का अध्यक्ष बना। सिर्फ पंडरिया नगर पंचायत में भाजपा को अपना अध्यक्ष बनाने में सफलता मिल पाई। कवर्धा पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह का गृह नगर भी है। भाजपा के मजबूत गढ़ रहे कवर्धा नगर पालिका के 27 में से 21 वार्डो में कांग्रेस के पार्षद जीतकर आए। यहां तक कि पूर्व मुख्यमंत्री के गृह वार्ड में भी भाजपा का पार्षद प्रत्याशी जीत नहीं पाया।

नगरीय निकाय चुनाव के परिणाम की पुनर्रावृत्ति पंचायत चुनाव में भी हुई। जिले की चारों जनपद पंचायतों में भाजपा का कब्जा था लेकिन पंचायत चुनाव में सहसपुर लोहारा जनपद पंचायत व बोड़ला जनपद पंचायत उसके हाथ से निकल गए। वह कवर्धा जनपद पंचायत व पंडरिया जनपद पंचायत में ही फिर से वापस आ पाई। जिला पंचायत के 14 वार्डो में ही भाजपा आधे यानि सात वार्डों में अपने सदस्य निर्वाचित करा पाई। जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में भाजपा को भाग्य का सहारा मिल गया। यह पद अनुसूचित जाति (महिला) वर्ग के लिए आरक्षित था तथा जिला पंचायत के चौदह वार्डों में से अजा (महिला) के लिए आरक्षित एक मात्र वार्ड से भाजपा प्रत्याशी सुशीला राजकुमार भट्ट जीत गई। इस तरह भाजपा को बैठे बिठाए अध्यक्ष का पद मिल गया। लेकिन जब उपाध्यक्ष चुनाव की बारी आई तो कांग्रेस ने यहां पर भी भाजपा को पटखनी दे दी। भाजपा ने जिला पंचायत सदस्य के लिए निर्वाचित हुए कांग्रेस के रामकृष्ण साहू को तोड़कर तगड़ी घेराबंदी कर ली थी। रामकृष्ण साहू चुनाव के दो दिन पहले गायब हो गए तथा मतदान करने नहीं पहुंचे। भाजपा के सात सदस्यों के मुकाबले कांग्रेस के छह सदस्यों ने मतदान किया। लेकिन जब उपाध्यक्ष का नतीजा आया तो कांग्रेस की पुष्पा होरी साहू ने भाजपा की भावना बोहरा को सात के मुकाबले छह वोट से हरा दिया। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की रिश्ते में भांजी भावना बोहरा के विजय जुलूस के लिए भाजपा ने भारी तैयारी कर रखी थी जो धरी की धरी रह गई थी।

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