Monday, September 21

राज्यपाल पर दबाव बनाकर प्रदेश सरकार ने अलोकतांत्रिक, असंसदीय और असंवैधानिक आचरण किया : भाजपा

मुख्यमंत्री की वन मैन शो की प्रवृत्ति और राज्यपाल का अधिकार छीनना लोकतंत्र व संविधान में अनास्था का प्रतीक : डॉ रमन*

*0 तानाशाही प्रवृत्ति के बल पर मुख्यमंत्री बघेल ‘शट-अप’ विपक्ष और अधिकारविहीन चांसलर चाहते हैं*

*रायपुर।* पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक पर हस्ताक्षर करने के लिए प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती अनुसुईया उईके पर दबाव बनाने की प्रदेश सरकार की कोशिशों को घोर अलोकतांत्रिक, असंसदीय और असंवैधानिक बताते हुए इसकी निंदा की है। श्री सिंह ने कहा कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार में न तो राजनीतिक समझ-बूझ है, न ही प्रशासनिक क्षमता दिख रही है और अब वह राज्यपाल पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव बनाकर एक बार फिर संघीय ढाँचे व संवैधानिक प्रक्रिया का खुला अपमान करने पर उतारू हो गई है।
पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का अब तक का कार्यकाल देश के संघीय ढाँचे की अवहेलना और प्राय: हर नाजुक मौकों पर संवैधानिक प्रक्रिया को चुनौती देने में ही जाया हुआ है। अपनी सरकार की सारी शक्तियाँ ख़ुद में केंद्रित करके मुख्यमंत्री जिस तरह का वन मैन शो चला और चलाना चाह रहे हैं, वह उनकी लोकतंत्र में गहरी अनास्था का परिचायक तो है ही, अब राज्यपाल के अधिकार छीनने की यह कोशिश उनके घोर असंवैधानिक आचरण का प्रदर्शन है। डॉ रमन सिंह ने कहा कि देश के इस संवैधानिक ढाँचे की एक निश्चित प्रक्रिया है और प्रदेश सरकार राज्यपाल को संविधान प्रदत्त अधिकार छीनने पर आमादा होकर उस संवैधानिक ढाँचे व प्रक्रिया को अवरुद्ध करने का अलोकतांत्रिक व असंसदीय कार्य कर रही है। यह इस प्रदेश सरकार की गलत परम्परा की मिसाल होगा ।
डॉ रमन ने सवाल किया कि आख़िर प्रदेश सरकार उन अधिकारों को क्यों हड़पना चाहती है, जो प्रदेश सरकार के नहीं हैं और संवैधानिक प्रमुख होने के नाते दूसरों को भी कुछ अधिकार संविधान ने दे रखे हैं? दरअसल प्रदेश के मुख्यमंत्री बघेल हैं तो कांग्रेसी राजनीतिक चरित्र की पहचान ही, जिनकी न तो संविधान में आस्था नज़र आती, न लोकतंत्र और सत्ता का विकेंद्रीकरण उन्हें रास आता, संघीय ढाँचे का सम्मान करना उनके स्वभाव में नहीं दिखता और प्रतिशोध की राजनीति जिनका प्रिय शगल है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि बदला, तबादला और नाम बदलाव इस प्रदेश सरकार का राजनीतिक चरित्र है और क़दम-क़दम पर सरकार ने इसका प्रदर्शन किया है। पं. दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि के दिन उनके नाम पर चल रहीं पूर्ववर्ती भाजपा प्रदेश सरकार की सारी योजनाओं के नाम गांधी परिवार के नाम करके मुख्यमंत्री बघेल ने चाटुकारिता की सारी हदें लांघकर अपनी उस तानाशाही प्रवृत्ति का संकेत भी दिया था जिसका विस्तार आज ‘शट-अप’ विपक्ष और अधिकारविहीन चांसलर के रूप में प्रदेश देख रहा है।

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