वक्फ घोटालों की जांच क्यों नहीं चाहते विभागीय सचिवः रिजवी

रायपुर। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के मीडिया प्रमुख एवं मध्यप्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम के पूर्व अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता इकबाल अहमद रिजवी ने शासन-प्रशासन से पूछा है कि वक्फ सम्पत्ति की हेराफेरी एवं घोटालों की जांच सप्रमाण तत्कालीन सी.ई.ओ. डा. एस. जहीरूद्दीन द्वारा विभागीय सचिव को लगभग एक वर्ष पूर्व दिनांक 20/06/2019 को अजा/अजजा कल्याण विभाग में प्रस्तुत की थी जिसमें जांच का गंभीर मुद्दा नौ करोड़ रूपये के फर्जी वाऊचर का है, साथ ही वक्फ सम्पत्ति की अफरा-तफरी के अंतर्गत बिलासपुर के हृदय स्थल स्थित बेशकीमती वक्फ अलल औलाद के अंतर्गत वक्फ की गई छत्तीसगढ़ हायर सेकेण्डरी स्कूल की छः एकड़ जमीन भी है जिसमें से तीन एकड़ को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की संस्था छत्तीसगढ़ शिक्षा समिति को चुपके-चुपके वक्फकर्ता की संतानों को अंधकार में रखकर नियम विरूद्ध अवैधानिक तरीके से एक करोड़ तेईस हजार पांच सौ रूपये में प्रायोजित बोली लगाकर बिलासपुर के स्थान पर वक्फ बोर्ड के रायपुर स्थित कार्यालय में दिनांक 31/05/2007 को नीलामी कर दी गई तथा बची तीन एकड़ भूमि को मात्र एक हजार रूपये महीने के दर से 30 वर्षों के लिए लीज पर दे दी गई। नीलामी की तारीख व सूचना समाचार पत्रों में प्रकाशित भी नहीं करवाई गई। इस तरह मुस्लिम समाज को एवं वक्फकर्ता के वंशजो को भी अंधकार में रखा गया। नीलामी में अरनेस्ट मनी 31 लाख एवं नीलामी की सम्पूर्ण राशि कहां, कब, किस बैंक में जमा की गई, का कोई इन्द्राज वक्फ बोर्ड के दस्तावेजों में नहीं है जो वक्फ सम्पत्ति की अमानत में खयानत के अंतर्गत दण्डनीय अपराध की श्रेणी में आता है।
रिजवी ने भाजपा शासन के 15 वर्षों में बोर्ड के घोटालों की ओर कांग्रेस के द्वारा नियुक्त बोर्ड के अध्यक्ष का ध्यान आकर्षित कराने पर पत्र लिखकर पूर्व अध्यक्ष एवं सी.ई.ओ. के विरूद्ध नियमानुसार पुलिस में रिपोर्ट लिखाने कहा था परन्तु कांग्रेसी अध्यक्ष ने कोई कदम नहीं उठाया जो कई शंकाओं को जन्म देता है। इस प्रकार वक्फ सम्पत्ति की जांच में देरी के लिए शासन-प्रशासन दोनों जिम्मेदार हैं।

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