सरकारी बंगलों पर अवैध कब्जे को लेकर हाईकोर्ट ने केंद्र को फटकारा, 11 आवासों पर पूर्व सांसदों का कब्जा

नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने 576 सरकारी आवासों में सेवानिवृत्त अधिकारियों और पूर्व सांसदों के गैरकानूनी रूप से रहने पर बुधवार (5 फरवरी) को आवास मंत्रालय को फटकार लगाई और केंद्र को उन्हें दो सप्ताह के भीतर खाली कराने का निर्देश दिया। दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डी.एन. पटेल और न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर की पीठ ने कई वर्षों से सरकारी आवासों पर अवैध कब्जे को ”साजिश” के समान बताया।
पीठ ने सरकार को अवैध निवासियों पर बकाया लाखों रुपए की वसूली का भी निर्देश दिया। अदालत ने ऐसे अवैध कब्जाधारकों के खिलाफ वसूली शुरू नहीं करने पर मंत्रालय को फटकार लगाई। कई लोग तो एक दशक से भी अधिक समय से इन आवासों में रह रहे हैं और आज की तारीख तक उन पर 95 लाख रुपए से भी अधिक बकाया हैं।
पीठ ने कहा, ”अगर कोई सरकारी आवासों में तय वक्त से अधिक रह रहा है तो आपको उन्हें खाली करवाने के लिए पंचवर्षीय योजना की आवश्यकता नहीं है। बकाया की वसूली के लिए क्या आपने उन्हें नोटिस भेजे हैं? करीब 600 सरकारी आवास खाली नहीं हुए हैं। कुछ तो अवधि पूरी हो जाने के बाद 1998 से वहां रह रहे हैं। उनमें से हर एक पर लाखों रुपए बकाया हैं। आपने आवास खाली क्यों नहीं करवाए? बकाया वसूली के नोटिस जारी क्यों नहीं किए गए?”
पीठ ने कहा, ”लोग कर दे रहे हैं और आप उन्हें (अवैध कब्जा करने वालों को) वर्षों से मुफ्त आवास, बिजली और पानी दे रहे हैं। यह कुछ और नहीं बल्कि आपकी (मंत्रालय) अक्षमता है। आपके अधिकारियों का यह रवैया साजिश के समान है।” पीठ ने चेतावनी दी कि इस मामले में संबद्ध अधिकारियों के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की जा सकती है।
मंत्रालय की ओर से हलफनामा दायर किया गया था जिसमें बताया गया था कि 11 सरकारी आवासों पर पूर्व सांसदों ने अवैध कब्जा कर रखा है और इसका कुल बकाया करीब 35 लाख रुपए आता है। 565 आवासों पर सेवानिवृत्त अधिकारियों और नौकरशाहों का कब्जा है। हलफनामे में भाजपा के पूर्व सांसद एवं कांग्रेस के नेता डॉ. उदित राज, तेदेपा के पूर्व सांसद मुरली मोहन मांगती और पूर्व भाजपा सांसद मनोहर उटवाल का नाम है।
अदालत ने कहा कि अगर सरकारी आवास को खाली कराने के खिलाफ किसी अदालत या न्यायाधिकरण द्वारा रोक लगाई जाती है तो ऐसे आदेश का पालन किया जाए, अन्यथा आवास तुरंत खाली कराए जाएं। अदालत ने आवास मंत्रालय के सचिव पर 10,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया।
अब मामले पर सुनवाई 27 फरवरी को होगी। उच्च न्यायालय ने 17 जनवरी को केंद्र से पूछा था कि ऐसे कितने सरकारी बंगले हैं, जिन पर पूर्व सांसदों, विधायकों या नौकरशाहों का कब्जा है और ये कब्जा कितने समय से है। अदालत ने यह निर्देश एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दिया, जिसमें दावा किया गया था कि पूर्व सांसदों, विधायकों और नौकरशाहों ने कई सरकारी आवासों पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है।

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