Saturday, September 26

सरकार अपना पीठ स्वंय ठोक रही है,दूसरी तरफ पत्नि की मौत, 3 दिन भूखे प्यासे भटकता रहा पति, प्रगतिशील सतनामी समाज के प्रयास से मिली अंतिम संस्कार के लिए शव

 

 

रायपुर, 26 जुलाई 2020। कोरोना संक्रमण को लेकर सरकारी बदइंतजामी थमने का नाम नहीं ले रहा है। कहीं इलाज में लापरवाही तो कहीं क्वारेंटाइन सेंटर में अव्यवस्था और अब मौत के बाद शव की सुपुर्दगी को लेकर जटिल प्रक्रिया लॉकडाउन के जंजाल के बीच पहाड बनकर मुसीबतें पैदा कर रही है। राजधानी के डॉ. अंबेडकर अस्पताल के प्रबंधन की लापरवाही और शासन की गैरजिम्मेदाराना रवैया के बीच परिजनों को हताश व परेशान करने वाली है।
प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज की अथक प्रयास से बिलाईगढ़ ग्राम परसाठीह निवासी श्रीमती शशिकला दिवाकर की अतिम बिदाई कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। ज्ञात हो कि शशिकला दिवाकर की मृत्यु 24 जुलाई 2020 को प्रातः 6 बजे Corona positive होने के कारण मृत्यु हो गई थी। जिनकी बॉडी 3 दिनों से अव्यवस्था के कारण मेकाहरा रायपुर में रखी थी। जिसकी जानकारी प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज की स्पेशल टीम को जानकारी देते हुए पीड़ित ब्यक्ती ने मदद मांगी। इसके बाद अश्वनी बबलू त्रिवेंद्र के नेतृत्व में उक्त कार्यक्रम को परिणित करने एडीएम बलौदाबाजार एवम् बिलाईगढ़ तहसीलदार अमित, बीएमओ श्री खूंंटे व अन्य कर्मचारीगण मिलकर सतलोकी की पार्थिव शरीर को उनके गृह ग्राम परसाडीह पहुंचाया गया। महिला की उम्र 28 वर्ष बताया जा रहा है उसकी शादी दो साल पूर्व कमलेश दिवाकर से हुई थी। पति जांजगीर चांपा कटौद निवासी कमलेश दिवाकर ने बताया कि 11 जुलाई को अचानक शशिकला की तबियत बिगड़ने लगी। हाथ पैर में दर्द और यूरिन में इनफेक्शन होने लगा। भटगांव स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टरों ने यहां 12 जुलाई को लेकर गएं। डॉक्टरों ने जांच कराने को किडनी में प्राब्लम्स हो सकता है जांच करा लेना। 13 जुलाई को इलाज जांच के अनुसार इलाज कराया। परिजन समझते रहें कि सालभर पहले शशि के बच्चे दानी का ऑपरेशन कराया गया था शायद इसकी वजह से परेशानी होगी। तबीयत में सुधार नहीं आया तो परसाडीह से 14 जुलाई की सुबह राजधानी के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया तो डॉक्टर ने मरीज की सांस तेज चलने की वजह से मेकाहारा रेफर कर दिया।

मेकाहारा में डॉक्टरों ने इलाज कर यूरिन पास के लिए पाइप भी लगाया। तभी डॉक्टरों की सलाह पर कोरोना जांच भी कराया तो 16 जुलाई को रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर डॉक्टरों ने वेंटीलेटर में रखकर आइशोलेशन वार्ड में भर्ती कर दिया। कमलेश ने बताया कि डॉक्टरों ने उनका भी टेस्ट कराया तो कोरोना जांच रिपोर्ट 19 जुलाई को उनका निगेटिव आया। तो 21 जुलाई को उनको डिस्चार्ज कर दिया गया। पत्नी को मेकाहारा के कोरोना वार्ड में भर्ती करने के बाद पति कमलेश गांव आ गया। 23 की सुबह मेकाहारा के डॉक्टरों ने उनकी पत्नी का विडियो भेजा जिसमें बातचीत करते हुए और डॉक्टरों के कहने पर हाथ उपर नीचे करते दिखाया गया। डॉक्टरों ने कहा कि शशिकला की तबीयत में सुधार हो रहा है। और 24 जुलाई की सुबह 5.30 बजे मेकाहारा के डॉक्टरों का फोन आया की आपकी पत्नी का डेथ हो गया है। उन्हें वेंटीलेटर्स पर रखा गया है। इतना सुनते ही कमलेश की पैरों तले जमीन खिसक गई । सुबह किसी तरह लॉकडाउन होने से बसों की आवाजाही बंद होने से गाड़ी किराया करके मेकाहारा पहुंचा। मेकाहारा के चौकी में पूछताछ करने पर सीएमओ से मिलने को कहा गया। मेकाहारा के सीएमओ ने कहा कि शव लेजाने के लिए कलेक्टर, एसडीएम से लेटर लेकर आना होगा। कई दिनों तक भूखे प्यासे सरकारी दफ़तारों के चक्कर लगाते रहें।

तभी चंद्रपुर विधायक और समाजिक कार्यकर्ता अश्वनी बबलू त्रिवेंद्र का मोबाइल नंबर 25 जुलाई की शाम 6 बजे मिला। बबलू ने पीड़ित परिवार की सहायता के लिए बलौदाबाजार एडीएम जोगेंंद्र नायक से बात किया तब जाकर 26 जुलाई की दोपहर 3 बजे अमला पहुंचा। शव वाहन एक मात्र होने की वजह से शाम 6 बजे वाहन आने के बाद एम्बुलेंस कोरोना से मौत होने वाले शव के साथ परिजन रवाना हुए। कमलेश ने बताया कि लॉकडाउन और राजधानी में पहचान नहीं होने की वजह से सरकारी दफ़तरों के नियमों की वजह से चक्कर लगाते रहा। दो दिन से कुछ खाने को भी नहीं मिला। तभी अश्वनी बबलू त्रिवेंद्र के कहने पर एक सामाजिक कार्यकर्ता ने 500 रुपए और खाने को दिलाया। अश्वनी बबलू त्रिवेंद्र ने कहा कोरोना के केश लगातार बढ रहे हैं लेकिन सरकार व स्वास्थ्य विभाग के पास पर्याप्त इंतजाम एम्बुलेंस की नहीं हैं।


एक दिन पहले अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान इलाज के बाद भी तबीयत में सुधार आने के बाद अचानक 24 जुलाई की सुबह मौत खबर आने पर परिजनों ने कहा कि उनकी पत्नी को कोरोना के लक्षण भी नहीं थे और साथ में रहने के बाद भी उनका रिपोर्ट निगेटिव आया ये कैसे संभव हो सकता है। उन्होंने कहा कि कोरोना की वजह से उनकी दुनिया उजड़ गई। वे शादी के बाद अपने ससुराल में ही रह रहे थे। कमलेश ने बताया कि वे किसी दूसरे नहीं गए थे। गांव में किसी भी को कोरोना नहीं है। और भटगांव अस्पताल के बेड में भी कोई कोरोना पॉजिटिव केस नहीं आया था।

गांव में शशिकला 15 दिन पहले खेत से लगे स्कूल के क्वारेंटाइन सेंटर के पास गई थी। लेकिन कोरोना पॉजिटिव से संपर्क होने का कोई वजह भी नहीं होने के बाद कोरोना पाॅजिटिव रिपोर्ट आने को लेकर परिजनों ने सवाल खड़ा किया है। डॉक्टर उनकी पत्नी की मौत को कोरोना पॉजिटव बता रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह सब डॉक्टरों की लापरवाही का नतीजा है पूरे मामले में जांच कराई जानी चाहिए। कमलेश ने बताया कि 26 जुलाई की शाम को बजे पीपीकीट पहन कर पत्नी के शव को लेकर एम्बुलेंस से गांव रवाना हुए हैैंं।

गांव में सरपंच व परिजनों को सूचना दे दिया गया है जहां अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। सहयोग प्रदान करने वालों में प्रमुख रुप से प्रगतिशील छत्तीसगढ सतनामी समाज के रायपुर अध्यक्ष अश्वनी बबलू त्रिवेंद्र,प्रदेश महासचिव विजय कुर्रे, रायपुर सचिव भूपेंद्र डहरिया, सहसचिव जितेंद्र आजाद, डॉ हेमंत भारद्वाज व मीडिया प्रभारी प्रेम बंजारे भी शामिल रहें।

 

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