सरकार छाती पिटते रही,जोगी के सिपाही जांच के लिए पहुंच गए,  सरकारी दबाव में गोबर के चक्कर में हुई गौहत्या- जेसीसीजे की जांच रिपोर्ट मे खुलासा

 

☆ बिना व्यवस्था के गायों का रोका छेका करना 55 गायों की मृत्यु की प्रमुख वजह।

मुख्यमन्त्री और कृषि मंत्री है जिम्मेदार, सरकारी योजना को सफल बनाने सरपंचों पर डाला जा रहा दबाव।

बिलासपुर , छत्तीसगढ़ के इतिहास में अब तक की सबसे भयावह गौ हत्या के रुप में सामने आने वाली तखतपुर विधानसभा के ग्राम मेड़पार में 55 गायों की मृत्यु से प्रदेश में आक्रोश एवं कई सवाल खडे़ हुए है जिस पर जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जे के अध्यक्ष श्री अमित जोगी के आदेशानुसार गठित जांच दल द्वारा मौका मुआयना कर जांच रिपोर्ट पेश की गई, जिसमें गायो की मृत्यु को गौ हत्या माना गया एवं सरकारी दबाव में आंकड़े पूरा करने हेतु गंभीर लापरवाही रिपोर्ट में पाई गई।

            जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जे द्वारा जिला अध्यक्ष ज्वाला प्रसाद चतुर्वेदी के निर्देशानुसार ग्रामीण कार्यकारी अध्यक्ष विक्रांत तिवारी, फुलचंद लहरे, सुब्रत जाना, विनोद घृतलहरे एवं सुनील वर्मा को जांच दल के रुप में तत्काल घटना स्थल भेजा गया। जहां ग्रामीणों से चर्चा एवं घटना स्थल निरीक्षण उपरांत यह पाया गया की सरकार की महत्वाकांक्षी योजना गौठान, रोकाछेका एवं गौधन (गोबर खरीदी) के आंकड़ो को बढ़ाने और उक्त योजना को सफल बनाने के दबाव में 55 गायों की मौंत हुई है, चूंकि उक्त गांवों में गौठान की व्यवस्था नहीं होने के बाद भी पुराने जर्जर भवन में क्षमता से पांच गुना अधिक गायो का रोकाछेका कर भरा गया। साथ ही बारिश में गोबर ज्यादा इकट्ठा करने की कोशिश में गायों को बगल के खुले स्थान पर न रखकर बंद कमरे में भर दिया गया जिससे सभी गायें घुटन से मरणासन्न अवस्था में चली गई जिनमें से 55 गायों की मृत्यु हो गई। घटना स्थल के दोनो कमरो में गोबर की मोटी परत पाई गई। साथ ही सभी गाये गोबर में सनी हुई मृत अवस्था मंे मिली जो साफ दर्शाता है कि इतनी भारी मात्रा में गायों को एक कमरे में एकत्रित करने का उद्देश्य केवल गोबर खरीदी के आंकड़ो में वृद्धि दिखाना मात्र है। जांच दल ने यह भी पाया कि मृत गायों में लगभग 10 से अधिक गायें गर्भवती थी। साथ ही रोकाछेका कर कमरे में बंद किए गायों में से कोई अवारा पशु की श्रेणी में नहीं है, समस्त गायें निजी/पालतू गायें थी जिन्हे बिना जानकारी, बिना ब्यवस्था के सरकार के दबाव में बंद किया गया था।

            जांच दल ने इस घटना के पूर्व धमतरी जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को गोबर खरीदी में कमी आने पर मिले सरकारी नोटिस को इंगित करते हुए इस घटना से जुड़ा बताया। सरकार के दबाव में गोबर खरीदी के लिए किस हद तक अधिकारियो से लेकर ग्राम पंचायत के सरपंचों तक ब्याप्त था यह उक्त नोटिस भलीभांति दर्शाता है। इसी तारतम्य में जांच दल ने यह पाया कि सरकार द्वारा गोबर खरीदी के आंकड़ो में वृद्धि के लिए दबाव पूर्वक ग्रामों में सरकार की रोकाछेका योजना को लागू कराया जा रहा है, जैसा की ग्राम मेड़पार में भी होना प्रतीत होता है। किन्तु सरकार की साख बचाने एक आदिवासी समाज की महिला सरपंच को मोहरा बनाकर अधिकारियों द्वारा पूरी घटना पर लीपापोती की जा रही है। जांच दल ने मृत गायो के दफन की प्रक्रिया पर भी सवाल

खड़े करते हुए इसे गौ अपमान माना है चूंकि 55 गायों को बर्बरता पूर्व एक छोटे गढ्ढे में एक के उपर एक डालकर मिट्टी से पाटना एवं पोस्टमार्टम उपरांत मृत गायों के अवशेष को खुले में फेंक देना जिन्हे कुत्ते नोंचकर खा रहे हो यह पूर्ण रुप से गौ अपमान की श्रेणी में आता है।

जांच दल ने 9 बिन्दुओं जानकारी एवं 8 बिन्दुओं की निष्कर्ष रिपोर्ट पार्टी प्रदेश अध्यक्ष को सौंपी। जिसमें 55 गायों की मृत्यु को गौ हत्या और गौ अपमान की श्रेणी में रखा गया। साथ ही सरकार की बिना व्यवस्था, बिना तैयारी के दबाव पूर्वक लागू कराई जा रही उक्त योजनाओं से भविष्य में भी इससे भी भयावह स्थिति उत्पन्न होने की चिंता जाहीर की गई। साथ ही जांच दल ने उक्त घटना का जिम्मेदार राज्य सरकार, कृषि मंत्री एवं योजना लाने वाले मुख्यमंत्री को माना है और यह स्पष्ट किया है कि जिम्मेदार ब्यक्तियों को बचाने के लिए शासन ग्राम पंचायत स्तर के लोगो को बलि का बकरा बना रहा है।

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