Friday, September 25

सामाजिक समरसता और भाईचारे का पर्व नुआखाई ओडिआ संस्कृति का वाहक पीएम मोदी ने दी बधाई

महासमुंद – पश्चिम ओडिशा के साथ साथ छत्तीसगढ़ के पूर्वी अंचल मे आपसी भाईचारा और समाज को जोडने वाले महापर्व नुआखाई आधुनिकता के इस दौर मे भी बखूबी समाज मे मनाया जा रहा है। महासमुंद रायगढ़ जिले के बडे भाग में मनाया जाने वाला नुआखाई महापर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। नुआखाई का शाब्दिक अर्थ नया खाना है। समूचा ओड़िया समाज के पारंपरिक रीति-रिवाज से नुआखाई पर्व भादों शुक्ल पंचमी तिथि को मनाता हैं।

ओडिशा संस्कृति का महान पर्व है नुआखाई

मुख्यरूप से ओडिआ संस्कृति और रहन सहन मे नुआखाई का प्रसिद्ध त्यौहार मनाया जाता है । यह पश्चिम ओडिशा निवासी लहलहाती फसल को इष्ट देवी मा संबलेश्वरी और अन्नपूर्णा का आशीर्वाद मानकर सबसे पहले धान से निकलने वाले चांवल का भोग मां और अपने पूर्वजों को अर्पित करते हैं। इस दिन परिवार और समाज के लोगों की भीड़ उमड़ती है।

कुरे पत्ता और धान का विशेष महत्व

नुआंखाई पर कुरे पत्ता और नए धान का विशेष महत्व रहता है। पर्व के दिन कुरे पत्ते का दोना बनाकर पूजा-अर्चना की जाती है और नए अन्न का प्रसाद कुरे पत्ते पर ही ग्रहण किया जाता है। पर्व के दिन परिवार के सभी सदस्य नए उपजे अन्न का भोग लगाकर एक साथ ग्रहण करते हैं। इसके बाद घर के सभी छोटे सदस्य बड़ों को “नुआखाई जुहार” अर्थात प्रणाम करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

नई हंडी में बनाया जाता प्रसाद

मा का भोग मिट्टी की नई हाडी में बनाया जाता है। प्रसाद में चूड़ा, गुड़ व नए धान का प्रयोग किया जाता है। पूजा के दौरान मंदिर में ओड़िशा का पारंपरिक वाद्य यंत्र ढोल, लीसान, मुहरी व झाझर बजाया जाता है। नुआंखाई के मौके पर घरों में आरसा, मड़ा और चकेल पीठा विशेष तौर पर बनाया जाता है। नुआखाई के मौके पर समाज के लोग एक माह पहले से ही घरों की साफ-सफाई शुरू कर देते हैं। पर्व के दिन जुहार भेंट कर बड़े बुजुर्गो को आशीर्वाद लिया जाता है। इस दिन लोग आपसी मन मुटाव को भूलकर एक-दूसरे के गले मिलते हैं। हालांकि समय के अनुसार इसमें अब काफी बदलाव आगया है।

खेत-खलिहान मे फसल की करते हैं पूजा

नुआंखाई के मौके पर ओडिआ संस्कृति और समाज के लोग खेत-खलिहान की पूजा करते हैं। पूर्वजों को नया अन्न अर्पित करने के बाद सभी एक साथ बैठकर नया अन्न ग्रहण करते हैं। पर्व के मौके पर सभी घरों में विशेष पकवान बनाए जाते हैं। लोग एक-दूसरे के घर जाकर शुभकामनाएं देते हैं।

युवा भी परंपरा के प्रति जागरूक

पश्चिम ओडिशा में मनाए जाने वाले नुआंखाई पर्व छत्तीसगढ़ में भी हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। समाज के युवा अपनी परंपरा के प्रति काफी जागृत हैं। नुआंखाई के अवसर नया धान, टोकरी, नारियल, उडद और मूंगदाल, गुड़, मिट्टी की हंडी आदि की आवश्यकता होती है।

पीएम मोदी ने ट्वीट कर दी नुआखाई की बधाई

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवाखाई पर्व पर ओड़िया संस्कृति के लोगों और पश्चिम ओडिशा सहित छत्तीसगढ़ के लोगों को ट्वीट कर शुभकामनाएं प्रेषित की है

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