Saturday, September 26

सैकड़ों लोगों ने दी कामरेड अजीत लाल को अंतिम विदाई, कहा : शोषणविहीन समाज के निर्माण के उनके सपनों को करेंगे पूरा

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के छत्तीसगढ़ राज्य सचिव मंडल के सदस्य तथा सीटू के पूर्व राज्य महासचिव अजीत लाल का 6 जुलाई को रायपुर एमएमआई में निधन हो गया। विगत 2 वर्षों से वह अस्वस्थ थे तथा साइब्रोसिस नामक बीमारी से गंभीर रूप से पीड़ित थे। 26 जून को उन्हें गंभीर अवस्था में एमएमआई में भर्ती कराया गया था। अपनी बीमारी के बावजूद बीमारी को ठेंगा दिखाने वाली सक्रियता से वे अपने अंतिम समय तक वामपंथी आंदोलन में सक्रिय थे।

कल 7 जुलाई को उनका अंतिम संस्कार धमतरी में हुआ। फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए सैकड़ों लोग उनके अंतिम संस्कार में शामिल हुए तथा उनके शव को पूरे पार्टी सम्मान के साथ ताबूत में बंद कर दफनाया गया। पार्टी के झुके झंडे के साथ निकाली गई उनकी शव यात्रा में शामिल होने वालों में माकपा राज्य सचिव संजय पराते, सचिव मंडल सदस्य धर्मराज महापात्र, एम के नंदी, राज्य समिति सदस्य समीर कुरैशी, गजेंद्र झा, शांत कुमार, डीवीएस रेड्डी, प्रदीप गभने, एससी भट्टाचार्य, स्थानीय माकपा नेता महेश शांडिल्य, मनीराम देवांगन, पुरुषोत्तम साहू, सरला साहू, रेमन यादव सहित धमतरी के असंगठित क्षेत्र के मजदूर और ट्रेड यूनियन नेता, एलआईसी कर्मचारी और शहर के गणमान्य नागरिक शामिल थे।

माकपा राज्य समिति द्वारा जारी एक बयान में उनके असामयिक निधन को छत्तीसगढ़ राज्य और खास तौर से धमतरी में पार्टी तथा वामपंथी आंदोलन के लिए अपूरणीय क्षति बताया गया है। शोषित-पीड़ित तबकों तथा मजदूर वर्ग आंदोलन के प्रति उनके अतुलनीय समर्पण को पार्टी ने रेखांकित करते हुए कहा है कि मजदूर वर्ग ने एक ऐसा साहसी योद्धा खो दिया है, जिसने उन्हें उसकी ताकत व अधिकारों का अहसास कराया था। एक शोषण मुक्त तथा जातिविहीन समाज की स्थापना के संघर्ष में वे अगली कतारों में थे।

वामपंथी आंदोलन में उनके चार दशक के सक्रिय योगदान को रेखांकित करते हुए माकपा ने 1995-2005 के दशक में धमतरी में सीटू द्वारा मंडी हमालों, राइस मिल मजदूरों, बीड़ी मजदूरों और सिनेमा कर्मचारियों के संघर्ष में उनके अभूतपूर्व नेतृत्वकारी भूमिका को याद किया है। बीड़ी कारखानों में उस समय जारी जोड़ी प्रथा के जरिये मजदूरों के होने वाले अदृश्य शोषण का उन्होंने ही पर्दाफाश किया था और इसके बाद सरकार को इसे अवैध घोषित करने के लिए बाध्य होना पड़ा था।

माकपा राज्य सचिव संजय पराते ने कहा है कि एलआईसी जैसे सार्वजनिक क्षेत्र का कर्मचारी और उसके नेतृत्वकारी कतारों में रहते हुए भी उन्होंने अपनी सीमाओं को तोड़कर असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को संगठित करना अपने जीवन का ध्येय बना लिया था। इस संघर्ष को आगे बढ़ाने में उन्हें प्रशासन की धमकियों और कारखाना मालिकों के गुंडों के हमलों का भी सामना करना पड़ा। लेकिन वे झुके नहीं, बहादुरी से उनका उसका मुकाबला करते रहे। एलआईसी से सेवानिवृत्त होने के बाद तो असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को लामबंद करने और उन्हें यूनियनों में संगठित कर मजदूर आंदोलन का निर्माण करने के काम मे जोर-शोर से जुट गए थे। इस काम मे वे अपनी बीमारी के बावजूद बीमारी को ठेंगा दिखाने वाली सक्रियता से अपने अंतिम समय तक जुटे रहे। राज्य सरकार कर्मचारियों को भी एक संयुक्त ट्रेड यूनियन आंदोलन की छतरी के नीचे लाने में उनका उल्लेखनीय योगदान था। अपने संघर्षशीलता के कारण वास्तव में वे धमतरी के मजदूर आंदोलन की जीवन शक्ति थे।

माकपा राज्य समिति ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है तथा उनके शोक संतप्त परिवारजनों और मजदूर साथियों के साथ हार्दिक संवेदना व्यक्त की है।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *