हथियार से ज्यादा कारगर कैमरे ,तीसरी आँख की पहरेदारी जरुरी सुरक्षा के पैमाने तय करने मे सीसीटीवी की अनदेखी पड़ रही भारी एसपी संतोष


रायगढ़ —– कहने को तो शहर प्रशासनिक और पुलिस के रिकार्ड मे संवेदनशील जिलों की श्रेणी मे शामिल है किंतु यह संवेदनशीलता व्यवस्था और प्रशासनिक तंत्र मे कहीं कहीं ही नजर आती है। खासकर शहर समेत जिले भर मे दिनदहाड़े घटने वाली आपराधिक वारदातों के रोकथाम और नियंत्रण की दिशा मे कई जरुरी संसाधनों की कमी आज भी बनी हुई है,जिसकी वजह से पुलिस प्रशासन के तमाम दावे भी लोगों मे सुरक्षा का एहसास पुख्ता नहीं कर पा रहे। दरअसल विकास की ओर अग्रसर रायगढ़ जिले मे बढती आबादी के फलस्वरूप  आपराधिक गतिविधियों मे वृद्घि पर कारगर नियंत्रण के लिए नगर को तीसरी आँख की निगरानी मे रखना आवश्यक हो गया है।लेकिन शासन – प्रशासन इस दिशा मे आज तक गंभीर नहीं  हुआ है। यही वजह है कि जिला मुख्यालय समेत जिले भर के संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी की निगरानी नहीं होने से लोगों मे खौफ और पुलिस की परेशानी दोनो बढ रही हैं।
गौरतलब है कि जिले मे बढ़ती वारदातों को लेकर आम लोगों ने अपनी सुरक्षा की ओर ध्यान देना शुरु कर दिया है।घरों से लेकर आफिस व संस्थाओं मेअब सीसीटीवी कैमरे की मांग बढ़ गई है।स्थानीय कारोबारियों की मानें तो हर रोज करीब डेढ़ दर्जन सीसीटीवी कैमरे की खरीदारी की जा रही है वहीं हाईटेक सुरक्षा के बारे मे जानकारी लेने वालों की संख्या भी रोजाना दहाई तक पंहुच रही है। इस बढ़ती डिमांड का मुख्य कारण सुरक्षा की भावना है। लोगों का कहना है कि सीसीटीवी कैमरे से अपराधियों मे मे खौफ तो रहता ही है,साथ ही यदि चोरी,लूट या अन्य कोई भी वारदात घटित भी होती है तो अपराधी की शिनाख्त और पहचान करना भी आसान हो जाता है।गृहस्थी और कारोबारी सुरक्षा के लिए लगाये गये इन तकनीकी उपकरणों से आये दिन पुलिस को भी बड़ी मदद मिलती है,बावजूद इसके शहर मे सीसीटीवी लगाने की प्रशासनिक तैयारी आज तक फाईलों से बाहर नहीं निकली।यद्यपि पुलिस का भी मानना है कि सीसीटीवी कैमरे लगने से शहर के प्रमुख व संवेदनशील स्थल पर आपराधिक
वारदातों मे कमी जरुर आयेगी , क्योकिं कैमरे मे अपराधी की पूरी कारगुजारी उसकी तस्वीर के साथ कैद हो जायेगी ,जिससे उसकी धर पकड़ मे मदद मिलेगी।इसके अलावा सड़क दुर्घटना ,  अनियंत्रित स्पीड,और नियम – कायदे तोड़ती तमाम गतिविधियों की निगरानी आसान हो जायेगी।
पूर्व मे जनभागीदारी से शहर के कुछ इलाकों मे लगाये गये सीसीटीवी कैमरों का लाभ आपराधिक घटना के दौरान पुलिस को मिलता रहा है।

सुरक्षा पर अर्थव्यवस्था भारी —-
पुलिस कप्तान संतोष कुमार सिंह के मुताबिक शहर मे 40 ऐसे संवेदनशील स्थल हैं जहां सीसीटीवी कैमरे की निगरानी बेहद आवश्यक है।एसपी ने इस आवश्यकता से राज्य शासन व गृह विभाग को भी अवगत कराया है किंतु आईपीएस की मानें तो सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए शासन की ओर से फण्ड का प्रावधान न होने से पुलिस की इच्छाशक्ति के बावजूद सुरक्षा की अहम कड़ी व्यवस्था का हिस्सा नहीं बन पा रही। हाल की कुछ घटनाओं का जिक्र करते हुये एसपी संतोष कुमार बताते हैं कि एटीएम कैशवैन रॉबरी मे अपराधियों का सुराग लगाने मे सीसीटीवी कैमरे से पुलिस को बड़ी मदद मिली थी। वहीं  कोरोना संक्रमण से निपटने की कवायद मे भी सीसीटीवी की निगरानी की मदद कारगर साबित हो रही है।

हथियार से ज्यादा कारगर कैमरे — एसपी
जिला पुलिस  अधीक्षक संतोष कुमार सिंह का मानना है कि मौजूदा तकनीकी परिवेश मे हथियारों से ज्यादा तकनीकी यंत्र प्रभावशाली हैं। सीमित बल और पाबंद पुलिस पेट्रोलिंग के बूते जनसुरक्षा का एहसास तो कराया जा सकता है किंतु अपराधियों मे भय बढ़ाने के साथ पुलिस की मदद तो सीसीटीवी ज्यादा बेहतर कर सकती है।आईपीएस सिंह ने बताया कि सीसीटीवी की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि महानगरों मे केवल तीसरी आँख का पहरा बिठाने 3 से 5 सौ करोड तक का बजट प्रस्तावित किया गया है। वहीं प्रदेश की राजधानी रायपुर मे एल एन टी कंपनी से करार कर पौने दो सौ करोड़ रुपये सीसीटीवी कैमरे लगाने मे खर्च हुये हैं।क्लोज सर्किट कैमरे से अपराध नियंत्रण के साथ अन्य घटना – दुर्घटना की निगरानी तो बेहतर तरीके से होगी ही,साथ ही रैली , जूलूस,शोभायात्रा, व सामूहिक प्रदर्शन जैसे संवेदनशील गतिविधियों की भी प्रमाणित निगरानी की जा सकेगी। पुलिस की सूची मे नगर के रेलवे स्टेशन , बस – स्टैंड , मुख्य बाजार, चौक चौराहों ,स्कूल,अस्पताल,
देवालय व अन्य महत्वपूर्ण तथा संवेदनशील स्थलों की सुरक्षा को बेहतर करने सीसीटीवी लगाया जाना बहुत जरुरी है। एसपी संतोष कुमार सिंह ने जानकारी दी है कि उनके द्वारा केबिनेट मंत्री उमेश पटेल तथा प्रभारी मंत्री रविंद्र चौबे को भी इस संदर्भ मे संज्ञान दिया गया है,जिसके प्रत्युत्तर मे सकारात्मक आश्वासन भी मिला है,इसके साथ ही आईपीएस संतोष कुमार सिंह नगर के व्यापारिक संगठनों,एनजीओ आदि से भी बैठक कर जनभागीदारी से शहर को तीसरी आँख की जद मे लाने के प्रयास मे लगे हुये हैं।यदि यह प्रयास कारगर हो जाता है तो निसंदेह इसका लाभ समाज के साथ व्यापारी वर्ग को मिलेगा और शहर मे आपराधिक वारदातों मे कमी आने के साथ साथ लें
लॉ एन आर्डर भी अधिक मुस्तैद और प्रभावी नजर आयेगा। इसके साथ ही व्यवसायिक सहयोग से लगाये जा चुके सीसीटीवी कैमरों को भी दुरुस्त करा उपयोग मे लाने की तैयारी की गयी है।

*सीसीटीवी की मदद से सुलझे
बड़े मामले—-
खरसिया मे एक दुकानदार से मारपीट कर जान से मारने वाले दस लोगों की पहचान सीसीटीवी कैमरे की मदद से संभव हो सकी।  सभी आरोपी न केवल गिरफ्तार हुये बल्कि न्यायालय से उन्हे कठोर दण्ड भी सुनाया गया।
तंत्रजाल मे फंसकर अपने ही बेटे की बलि देने वाले आरोपी की शिनाख्त भी व्यापारिक प्रतिष्ठान मे लगे सीसीटीवी से हुई थी। जिसके बाद उसे यूपी से गिरफ्तार कर कानूनी कार्रवाई की गई ।
शहर के पाश कालोनी और कोतरा रोड थाना क्षेत्र मे घटित सशस्त्र  गैंगवार तथा लूट के आरोपी भी एक चिकित्सक के घर पर लगे सीसीटीवी फुटेज से पहचाने और पकड़े गये।
किरोडीमल नगर मे एटीएम कैशवैन रॉबरी मे शामिल अपराधियों की पहचान और लोकेशन ट्रेस करने मे बाजार के सीसीटीवी की मदद ली गई ।
उद्योग मे लगे सीसीटीवी की मदद से ब्लाइंड मर्डर की मिस्ट्री सुलझाते हुये रायगढ़ पुलिस ने ओडिशा के पूर्व विधायक को घटना के चार साल बाद पकड़ने मे कामयाबी हासिल की।
यातायात व्यवस्था मे सुधार के दृष्टिकोण से चौक चौराहों पर लगाये सीसीटीवी कैमरे से हर माह ट्रैफिक नियम तोडने वालों के घर पंहुच रहा चालान नोटिस।
जिले मे काम के बदले रिश्वत लेने के मामले मे भी सीसीटीवी की मदद से ही आधा दर्जन अधिकारियों पर कार्रवाई की गयी है।

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