Wednesday, August 5

NMDC सीएसआर के प्रयास भारत में सबसे अग्रणी पंक्ति में गिने जाते है.

 सुमित देब, निदेशक (कार्मिक) एनएमडीसी लिमिटेड के लिए सार्थक संदेश

एनएमडीसी लिमिटेड द्वारा किए जा रहे सीएसआर के प्रयास भारत में सबसे अग्रणी पंक्ति में गिने जाते हैं और केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के बीच एनएमडीसी सीएसआर अंतर्गत सर्वाधिक व्यय करने वालों में से एक है। एक जिम्मेदार कार्पोरेट  होने के नाते, एनएमडीसी समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का पालन करने में अग्रणी रहा है। एनएमडीसी का मानना है कि बड़े पैमाने पर समाज की भलाई संगठन के व्यवसाय और समृद्धि की प्रगति के लिए एक पूर्व-आवश्यकता है।

भारत और विदेशों में चल रही अपनी गतिविधियों में विस्तार की अपनी व्यावसायिक द्वष्टि का अनुसरण करते  हुए, खनिज अन्वेषण के नए क्षेत्रों में विविधता लाने के साथ, एनएमडीसी अपने सीएसआर प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाना चाहता है ताकि अपनी परियोजनाओं के आस-पास के क्षेत्र में निरक्षरता एवं गरीबी उन्मूलन के साथ बुनियादी ढाँचे के विकास को बढ़ावा दिया जा सके। इसके अधिकांश लाभार्थी एनएमडीसी की खानों के आस-पास स्थित आदिवासी समुदाय से हैं, जो दूरदराज के क्षेत्रों में निवास करते हैं और शिक्षा या उच्च चिकित्सा  सेवाओं का खर्च नहीं उठा सकते हैं।  एनएमडीसी ऐसे लोगों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के लिए वचनबद्ध  है ताकि उनके जीवन को और बेहतर बनाया जा सके।

  1. क्या आप हमें एनएमडीसी के सीएसआर के बारे में जानकारी दे सकते हैं?

एनएमडीसी देश के सुदूरवर्ती इलाकों में जैसे कि छत्तीसगढ़ के बस्तर में खदानों का संचालन करता है। एनएमडीसी में हम सीएसआर को लोगों के जीवन की बेहतरी के लिए एक प्रभावी उपकरण के रूप में मानते हैं। हम अपनी सीएसआर परियोजनाओं के माध्यम से ऐसे समुदायों को सहयोग करते हैं जो समाज में हाशिए पर हैं।

हम इस बात का विशेष ध्यान में रखते हैं कि सीएसआर की धन राशि सबसे प्रभावशाली और विचारशील तरीके से खर्च की जाए, जिससे न केवल समुदाय की सेवा होगी बल्कि एक टीम के रूप में हमें गर्व का भी अहसास भी होगा। एनएमडीसी की एक अनूठी, व्यापक पारदर्शी एवं सहभागी परामर्श प्रणाली है, जो गाँव/समुदाय स्तर से जिला पंचायत स्तर से लेकर राज्य सरकार के स्तर के लग-भग सभी हितधारकों के सभी वर्गों/स्तर की साझेदारी में इसको बनाया गया है एवं इसे सभी के साथ साझा भी किया गया है।

  1. एनएमडीसी के सीएसआर का मुख्य फोकस किन क्षेत्रों पर है?

एनएमडीसी ने सीएसआर गतिविधियों की पहचान करने तथा क्रियान्वयन और निगरानी के लिए अपने उद्वेश्यों, फोकस क्षेत्रों, संगठनात्मक तंत्र, दिशानिर्देशों को निर्धारित करने के लिए एक व्यापक सीएसआर नीति बनाई है। कंपनी मुख्य रूप से अपनी परियोजनाओं के आस-पास के क्षेत्रों में शैक्षणिक संस्थानों, स्वच्छता, स्वास्थ्य, पेयजल, बुनियादी ढांचे के विकास, रोजगार योग्य कौशल विकास, एकीकृत ग्राम विकास आदि जैसे सामाजिक बुनियादी ढांचे को विकसित करने में निवेश कर रही है।

एनएमडीसी सीएसआर के मुख्य फोकस वाले क्षेत्र एवं उनका वर्गीकरण निम्नानुसार हैः

  • शिक्षा                     :         प्रयास           –        शिक्षा को बढावा
  • स्वास्थ्य                             :         निरामय         –        स्वस्थ जीवन की ओर
  • बुनियादी सुविधाएं     :         प्रकल्प           –        बुनियादी सुविधाओं का सृजन
  • पीने का पानी            :         पेयजल                   –        सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना
  • कौशल विकास           :         कौशल           –        लोगों को कौशलयुक्त बनाना

 

  1. प्रयास क्या है?  इसमें किस तरह के कार्यक्रम किए जा रहे हैं?

प्रयास – शिक्षा का उद्वेश्य साक्षरता और शिक्षा आधारित एक पहल है जो लग-भग दो दशक पुरानी है। हमें यह बताते हुए प्रसन्नता हो रही है कि एक मामूली शुरूआत के बाद अब इस पहल ने स्थानीय समुदायों के लिए गेम चेंजर का रूप ले लिया है। यह पहल उस स्थिति के कारण शुरू की गई थी जब एनएमडीसी परियोजनओं के आस-पास के समुदायों में रहने वाले बच्चों का एक बड़े हिस्से की पहुंच इस क्षेत्र में गुणवत्ता वाले शैक्षणिक बुनियादी ढांचे की कमी के कारण प्राथमिक स्तर की शिक्षा तक नहीं थी। हमने स्कूल जाने वाले बच्चों की संख्या में भारी गिरावट, आर्थिक तथा विभिन्न अन्य सामाजिक कारकों के कारण, साथ ही साथ तकनीकी/व्यावसायिक शिक्षा तक पहुंच की कमी पर भी ध्यान दिया है और संस्थान स्थापित किए हैं एवं शिक्षा में आने वाली समस्यओं का निवारण किया है।

शिक्षा के क्षेत्र में कन्या शिक्षा के क्षेत्र में अधिक कठिनाइयॉं  व चुनौतियॉं रही हैं क्योकि उनके पास उच्च शिक्षा को प्राप्त करने के लिए बहुत कम सुविधाएं थीं। बालक एवं बालिकाओं को उनके सपनों को साकार करने में मदद करने के लिए, प्रयास कार्यक्रम प्रारम्भ किए गये हैं। एनएमडीसी के द्वारा शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए निम्नलिखित पहल की हैं-

  • एनएमडीसी शिक्षा सहयोग योजना।
  • एनएमडीसी बालिका शिक्षा योजना (गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाली 40 आदिवासी बालिकाओं को प्रतिवर्ष हैदराबाद से बीएससी/जीएनएम के कोर्स कराये जाते हैं।)
  • दंतेवाड़ा में पलिटेक्निक कॉलेज का संचालन।
  • दतेवाड़ा और नगरनार में आईटीआई का संचालन।
  • आस्था गुरूकुल का संचालन – एससी, एसटी और अनाथ बच्चों आदि के लिए आवासीय विद्यालय।
  • 300 एकल शिक्षक स्कूलों का संचालन।
  • सक्षम का संचालन – दंतेवाड़ा में विशेष रूप से सक्षम बच्चों के लिए एक स्कूल।
  • छू लो आसमान योजना – आईटीआई/पीईटी/पीएमटी आदि जैसे व्यावसायिक प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लेने के इच्छुक आदिवासी छात्रों के लिए 9वीं कक्षा से 12वीं कक्षा तक नियमित स्कूली शिक्षा के साथ-साथ पूर्णतः आवासीय ट्यूटोरियल सहायता का प्रावधान।
  • उज्जर – उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए 100 मेधावी छात्रों की मदद करने के लिए एक कार्यक्रम है। एनएमडीसी प्रति वर्ष प्रति छात्र 4 वर्ष के लिए रू 75,000/- रूपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
  • लक्ष्य – बेरोजगार युवाओं को नौकरी उन्मुख प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने के लिए कोचिंग प्रदान करना।
  • बलिका शिक्षा परिसर का निर्माण – इसमें बालिकाओं हेतु तीन संस्थान संचालित है।
  1. सीएसआर में हेल्थकेयर के लिए आप कौन से कार्यक्रम संचालित आयोजित कर रहे हैं?

एनएमडीसी परियोजनाओं के आस-पास के गावों में स्थानीय समुदायों के लिए, जिसमें बहुसंख्यक आदिवासी शामिल हैं बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं सहित स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे की अनुपस्थिति थी। परियोजना स्थलों के दूरदराज के क्षेत्रों में स्थित होने के साथ-साथ वामपंथी उग्रवादी गतिविधियों ने स्थिति को और भी जटिल बना दिया है, जिसके परिणामस्वरूप स्थानीय लोगों के लिए हर प्रकार की चिकित्सा सुविधा का अभाव था। मौजूदा स्थिति के मद्देनजर, एनएमडीसी अपने सीएसआर कार्यक्रम के तहत, निरमाया- स्वस्थ जीवन की ओर के तत्वावधान में स्थानीय समुदायों को चिकित्सा सुविधा प्रदान करने के लिए अनेक पहल की हैं। यह पहल अब एक वृहद रूप ले चुकी हैं, जिसका उद्वेश्य मेडिकेयर और स्वस्थ्य सुविधाएं प्रदान करना है। एनएमडीसी के निरमाया कार्यक्रम की उत्पत्ति इस तथ्य में निहित है कि यह एक अनूठा कार्यक्रम है जो रोक-थाम के साथ-साथ उपचारात्मक स्वास्थ्य सेवाओं का मिश्रण प्रदान करता है और इसमें स्थानीय समुदायों के बीच व्यक्तिगत स्वच्छता, खान-पान की स्वच्छता पारिवारिक स्वच्छता एवं सामुदायिक स्वच्छता और संबंधित मुद्दों पर जागरूकता पैदा करना शामिल है। छत्तीसगढ़, कर्नाटक, मध्यप्रदेश  में एनएमडीसी परियोजनाओं अस्पतालों में स्थानीय जनजातियों पूर्णतः को निःशुल्क उपचार प्रदान किया जाता है। हमारे परियोजना अस्पतालों में प्रतिवर्ष लग-भग 1,00,000  बाह्य रोगियों और 10,000 अंतः रोगियों का निःशुल्क उपचार होता है। निरमाया की कुछ प्रमुख परियोजनाएं निम्न प्रकार हैः-

  • परियोजना अस्पतालों में निःशुल्क चिकित्सा।
  • चल अस्पताल (हॉस्पिटल ऑन व्हील्स) – मोबाइल मेडिकल वैन के माध्यम से दूरदराज के गांवों में चिकित्सा सुविधा प्रदान करना।
  • स्थानीय जनजातीय आबादी के लिए नियमित चिकित्सा शिविरों का आयोजन।
  • महिलाओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए एनएमडीसी द्वारा सेनेटरी नेपकिन निर्माण हेतु 8 केन्द्रों की स्थापना।
  • गरीब मरीजों को उच्च चिकित्सा सुविधा के लिए भेजने के लिए मॉं दंतेश्‍वरी संजीवनी कोष में आर्थिक योगदान।

 

  1. क्या आप हमें बुनियादी ढांचा विकास के लिए सीएसआर कार्यक्रम – प्रकल्प के बारे में जानकारी दे सकते हैं?

एनएमडीसी सभी के विकास में विश्‍वास करता है और प्रारम्भ से ही परियोजना स्थलों में और उनके आस-पास बुनियादी ढांचे के निर्माण पर बल देता रहा है। एनएमडीसी की परियोजनाएं अत्यंत दूर दराज के क्षेत्रों में स्थित होने के कारण यह आवश्‍यक भी था। एनएमडीसी पिछले अनेक वर्षों से मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने और स्थानीय समुदायों और पूरे क्षेत्र को मुख्य धारा से जोड़ने की सुविधा प्रदान कर रहा है। एनएमडीसी मुख्य रूप से जिला प्रशासन की साझेदारी में बुनियादी ढांचे के विकास की गतिविधियां कर रहा है। सड़क बनाने से लेकर विद्यालयों के भवन एवं स्वास्थ्य केन्द्रों से लेकर सामुदायिक केन्द्रों तक के निर्माण के कार्य इनमें शामिल हैं।

एनएमडीसी अपनी पहल प्रकल्प-बुनियादी सुविधाओं का सृजन के माध्यम से स्थानीय आबदी के लिए पीने के पानी की सुविधा, पानी के टैंकर, स्ट्रीट लाइटिंग, सीमेंट (सीसी) की सड़कों, नालियों हाट बाजारों के निर्माण जैसी बुनियादी सुविधाएं प्रदान करता है। इसके अतिरक्ति एनएमडीसी कृषि, दुग्ध डेयरी और मुर्गी। पालन के विकास के लिए प्रकल्प का भी उपयोग करता है। इससे स्थानीय लोगों और आस-पास के समुदायों के बीच कृषि और पशुपालन को बढ़ावा देने में मदद मिलती है। एनएमडीसी प्रकल्प योजना के अधीन सड़क, उच्च स्तर के पुल, बाईपास सड़के, आश्रम, छात्रावास, स्वास्थ्य ढांचा और सामुदायिक भवनों के निर्माण में भी सहायता करता है। सभी राज्यों में इसी तरह की पहल की गई है। प्रकल्प के अंतर्गत कुछ महत्वपूर्ण पहल शामिल हैंः

  • जगदलपुर में 100 सीट वाले आश्रम का निर्माण।
  • छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले वाले आश्रम का निर्माण।
  • छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में 14 छात्रावासों का निर्माण।
  • सुकमा जिले में बालक और बालिकाओं के छात्रावास का निर्माण।
  • छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा शहर एवं दंतेवाड़ा जिले के बचेली और किरंदुल में 4 लेन वाली सड़क – गौरव पथ का निर्माण।
  • छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के कुआकोंडा, कटेकल्याण, गीदम और दंतेवाड़ा ब्लॉक की ग्राम पंचायतों में किए गए विभिन्न विकास कार्य जैसे कि पुल, पुलिया, नाले, तथा भवनों/इमारतों की मरम्मत और रख-रखाव आदि।
  • जिला बेल्लारी, कर्नाटक नवलपेट्टी में सीसी रोड का निर्माण।
  • कोंडागांव जिले में 100 हेक्टेयर भूमि पर बाड़ लगाने का कार्य।
  • कर्नाटक के बेल्लारी जिले में सभागार का निर्माण।
  • दंतेवाड़ा एवं बीजापुर में हाई मास्ट लाइट्स की स्थापना।
  • सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना – दंतेवाड़ा और गीदम ब्लॉकों में विभिन्न ग्राम पंचायतों में सौर पंपों, सौर विद्युतीकरण कार्यों की स्थापना तथा सौर ऊर्जा उपकरणों का वितरण।
  • दंतेवाड़ा एवं बीजापुर में सौर ऊर्जा चलित हाई मास्ट लाइट्स की स्थापना।

 

  1. कौशल कार्यक्रम क्या है?इसमें कौन सी कौशल विकास गतिविधयाँ शामिल हैं  ?

एनएमडीसी कार्यक्रम कौशल – लोगों को कौशलयुक्त बनाने के उद्वेश्‍य  से एनएमडीसी परियोजना स्थलों  के आस-पास रहने वाले पिछड़े समुदायों को कुशल बनाकर रोजगार हेतु सक्षम बनाना है। यह पहल स्थानीय आदिवासी युवाओं और महिलाओं के लिए अवसर प्रदान करने के लिए की गई है ताकि वे सार्थक रोजगार प्राप्त कर सकें और कौशल विकास के जरिए आजीविका प्राप्त कर सकें। कौशल के तहत कुछ परियोजनाओं के उदाहरण नीचे सूचीबद्व हैंः

  • आदिवासी महिलाओं के लिए कौशल विकास प्रशिक्षण आयोजित किए जाते हैं, ताकि वे अनुभव प्राप्त कर सकें और सब्जी की खेती, टेलरिंग, जालीदार फेंसिंग बनाने हेतु प्रशिक्षण जैसे व्यवसायों में मदद मिल सके।
  • दंतेवाडा, बेल्लारी, बस्तर में खनन और इस्पात क्षेत्र से संबंधित कौशल पर युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान करना
  • परियोजनाओं के आस-पास स्थित क्षेत्रों में छात्रों के लिए तकनीकी प्रशिक्षण को बढ़ाना।
  • सामान्य और तकनीकी कौशल प्रदान करके प्रतिस्पर्धी और रोजगार योग्य क्षमताओं में सुधार।

 

  1. एनएमडीसी सामाजिक विकास के अन्य किन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करता है?

देश के दूरदराज के क्षेत्र जहाँ पर एनएमडीसी की परियोजनाएँ स्थापित हैं वहाँ पर पीने के साफ पानी की अत्याधिक कमी है। इसलिए हमारी परियोजनाअें के आस-पास के क्षेत्र में रहने वाले लोगों को पीने का साफ पानी उपलब्ध कराने के लिए कई कार्य किए हैं। नल जल योजना के तहत एनएमडीसी नगरनार में अपने आगामी स्टील प्लांट के आस-पास के सभी गावों को  सफलतापूर्वक कवर करने में सफल रहा है। एनएमडीसी ने स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकारों के साथ समूह जल आपूर्ति योजना के लिए साझेदारी की है, इसका उद्वेष्य पाइपलाइनों के माध्यम से सुरक्षित पेयजल उपलब्ध करना है। एनएमडीसी द्वारा शुरू की गई कुछ परियोजनाएं निम्न प्रकार हैंः

 

  • एनएमडीसी ने छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में लग-भग 350 हैंड पंप/बोरवेल स्थापित किए हैं और लग-भग 40 कुएं खोदे हैं।
  • कर्नाटक के बैल्लारी जिले की दोणिमलै परियोजना के आस-पास के गावों में अनेकों हैंड पंप लगाए गए हैं।
  • आस-पास के समुदायों को पानी उपलब्ध कराने के लिए भंडारण टैंकों की स्थापना और पाइप लाइन बिछाकर स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए पहल की गई है।
  • कर्नाटक के बेल्लरी जिले में 39 जल शोधन संयंत्रों की स्थापना।
  • मध्य प्रदेश  के पन्ना जिले में हीरा खनन परियोजना के आस-पास के गांवों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना।
  • एनएमडीसी द्वारा प्रत्येक वर्ष लग-भग 200 हैंडपंपों की मरम्मत का कार्य भी किया जाता है।
  1. कृपया सरकार की योजनाओं को एनएमडीसी द्वारा दिए गए समर्थन के मुख्य अंश हमारे साथ        साझा करें?

हमारा मानना है कि देश  की तेजी से प्रगति के लिए मानव विकास के हर क्षेत्र में सरकारी प्रयासों का समर्थन करने की बहुत आवश्‍यकता है। एनएमडीसी स्वच्छ भारत पहल के लिए प्रतिबद्ध है और उसने परियोजनाओं क्षेत्रों में ओर उसके आस-पास विभिन्न गतिविधियों को बखूबी अंजाम दिया है। स्वच्छ विद्यालय पहल के तहत, छत्तीसगढ़ में बस्तर संभाग के छः जिलों और मध्य प्रदेश  के पन्ना जिले में 2089 शौचालयों को निर्माण किया गया है। इसके अतिरिक्त छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में 70 अतिरिक्त शौचालय परिसरों का निर्माण किया गया। राष्ट्र निर्माण की पहल को तेज करने के लिए हर संभव तरीके से सरकार का समर्थन करना हमारे संगठन का संकल्प है। ग्रामीण आबादी के बीच स्वच्छता की प्रथाओं को बढ़ावा देने की पहल के साथ, एनएमडीसी ने छत्तीसगढ़ में बस्तर क्षेत्र के ग्रामीण परिवारों को शौचालय उपलब्ध कारने के लिए निर्मल ग्राम योजना के तहत छत्तीसगढ़ राज्य सरकार के साथ भागीदारी की। परिणामस्वरूप, वर्ष 2007-08 के दौरान बस्तर क्षेत्र के 107 गांवों में परियोजना के तहत 20,000 से अधिक शौचालयों  इकाइयों का निर्माण किया गया है।

  1. क्या एनएमडीसी भागीदारों के साथ काम करता है?

एनएमडीसी सीएसआर कार्यों में बहु-आयामी कार्यान्‍वयन  नीति का पालन करता है। हम हमेशा  ऐसे भागीदारों की तलाश  करते हैं जो समाजिक विकास की परियोजनाओं के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन में हमारी मदद कर सकें और इसके लिए गैर सरकारी संगठन अपनी भूमिका निभाते हैं। सीएसआर पहल का एक बड़ा हिस्सा एनजीओ के माध्यम से और सरकार के विभिन्न विभागों के माध्यम से भी लागू किया जा रहा है। कुछ प्रमुख सीएसआर कार्य एनएमडीसी द्वारा सीधे क्रियान्वित किए जा रहे हैं जैसे शिक्षा सहायता योजना, आईटीआई, पॉलिटेक्निक, स्कूल एवं अस्पतालों का संचालन यह सभी बहुत ही महत्तवपूर्ण एवं अनूठी योजनाएं हैं। जबकि अधिकांश पहले सेवा प्रदाताओं, राज्य शासन/और कुछ मामलों में सीएसआर परियोजनाएं तीनों संगठनों की साझेदारों में क्रियान्वित की जाती हैं।

  1. आप हितधारकों की संतुष्टि एवं सीएसआर अंतर्गत किये गये कार्यों का मूल्यांकन किस प्रकार करते हैं?

एनएमडीसी द्वारा इस लम्बे समय से अपनी परियोजनओं के आस-पास के क्षत्रों के समग्र विकास के लिए की गई पहलों में सर्वोत्तम शैक्षणिक और स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान की गयी हैं जिनसे न केवल इस क्षेत्र के समाजिक-आर्थिक स्तर में सुधार हुआ है, बल्कि ऐसे स्थानीय समुदायों को मु़ख्यधारा में लाने में भी इन प्रयासों ने बहुत योगदान दिया है जो ऐतिहासिक रूप से हाशिये पर रहे हैं। मुख्य धारा में शामिल होना दैनिक जीवन के विभिन्न पहलुओं से परिलक्षित होता है जैसे बेहतर परिवहन सुविधा और बाहरी दुनिया से जुड़ाव, विशेष रूप से युवा पीढ़ी को अघ्ययन और काम करने के अवसरों की खोज करके बड़े सपने देखना और उन्हें साकार करना। इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि एनएमडीसी द्वारा अपनी विभिन्न परियोजनाओं के आस-पास के क्षेत्रों के विकास के लिए किए गए प्रयास सही दिशा  में आगे बढ़ रहे हैं। एनएमडीसी ने प्रभाव को मापने और हितधारकों की संतुष्टि का आँकलन करने के लिए बाहरी संस्थाओं से प्रभावों मूल्यांकन (इम्‍पैक्‍ट इवैल्यूऐशन )  और सामाजिक ऑडिट(सोशल ऑडिट )अध्ययन भी करवाए हैं।

  1. आप कोविड-19का मुकाबला कैसे रहे हैं और इसके लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं?

एनएमडीसी एक जिम्मेदार कॉरपो‍रेट  संगठन है और हम कोविड की रोकथाम और उसका मुकाबला करने के लिए निम्नलिखित उपाय कर रहे हैं:

  • एनएमडीसी ने कोविड-19 की रोकथाम पर व्यय की करने के लिए अपने नियमित कर्मचारियों सहित सभी अनुबंधित, दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों और प्रशिक्षुओं प्रत्येक को एक-एक हजार रूपए दिए है। एनएमडीसी ने कोविड-19  का मुकाबला करने के लिए पी एम केयर्स फंड में 155 करोड़ रूपये दान किये हैं। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के आह्वान  के बाद, एनएमडीसी के कर्मचारियों ने कोविड-19 का मुकाबला करने के लिए पी एम केयर्स फंड में एक दिन के वेतन (कुल रूपए 1.25 करोड़) का योगदान दिया है।
  • एनएमडीसी ने कर्नाटक के बेल्लारी जिले में कोविड-19 मुकाबला करने के लिए जिला प्रशासन को 60 लाख रूपए का योगदान दिया। इस राशि  को कोविड-19 के लिए नामित जिला अस्पातल के लिए बिस्तर और ऑक्सीजन लाइन की खरीद पर खर्च किया गया है। हम अपने समाज को इस महामारी का और अधिक शक्ति और साहस के साथ मुकाबला करते हुए विकसित करने में मदद करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
  • एनएमडीसी ने कोविड-19 महामारी की रोकथाम तथा बचाव के लिए ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारियों को व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) और अन्य संबद्ध सामग्री की खरीद के लिए हैदराबाद पुलिस आयुक्त, हैदराबाद (शहर) को 50 लाख रूपये का योगदान दिया है।
  • एनएमडीसी नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा की आदिवासी महिलाओं को मास्क, सैनिटाइजर के उत्पादन में नियोजित कर रहा है। एनएमडीसी ने दंतेवाड़ा की आदिवासी महिला समूहों द्वारा बनाए गए एक लाख से अधिक मास्क और हैंड सैनिटाइजर अपने कर्मियों, कोविड योद्धाओं और अन्य जरूरतमंदो को कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए वितरित किए हैं।
  • हमने दक्षिण बस्तर, छत्तीसगढ़ के दूरदराज के क्षेत्रों में हमारे परियोजना अस्पतालों में विडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से रोगियों की देख-भाल करके देख-भाल में लगने वाले समय को कम करने की तकनीक अपनायी है। साथ ही, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश  और कर्नाटक में एनएमडीसी की सभी टाऊनशिप में मुफ्त स्वास्थ्य जांच शिविर भी आयोजित कर रहे हैं।
  • वरिष्ठ  डॉक्टरों, परियोजना प्रमुखों और कार्मिक विभाग प्रमुखों के साथ एक विशेष व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया है। (निदेशक कार्मिक) उनके साथ नियमित रूप से बातचीत करते हैं जिससे  किसी भी मुद्दों को तत्काल हल किया जा सके।
  • इस लॉकडाडन अवधि में दूध आवश्‍यक वस्तुओं में से एक है और हमने बैलाडिला कामधेनु सीएसआर योजना के तहत स्थानीय ग्रामीणों के साथ टाई-अप के माध्यम से अपनी परियोजनाओं की टाऊनशिप और आस-पास के क्षेत्रों में इसकी निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की है।
  • एनएमडीसी भारत सरकार की अन्न दानम योजना के तहत बैलाडिला लौह अयस्क खदानों,  नगरनार (छत्तीसगढ़) में स्टील प्लांट, दोणिमलै लौह अयस्क खदान और संयंत्र (कर्नाटक) और हीरा खनन परियोजना (मध्य प्रदेश में पन्ना) में असहाय और जरूरतमंद ग्रामीणों को खाद्यान्न वितरित कर रहा है। एनएमडीसी द्वारा जरूरतमंद परिवारों को खाद्यान्न और अन्य आवश्‍यक वस्तुओं से युक्त 50,000 से अधिक राहत पैकेज वितरित किए गए।
  • एनएमडीसी ने छत्तीसगढ, मध्यप्रदेश और कर्नाटक में एनएमडीसी की टाऊनशिप में आवासीय क्षेत्रों, सार्वजनिक भवनों, बाजार स्थलों, अस्पतालों, आरओ प्लांट आदि में स्वच्छता अभियान चलाया है। एनएमडीसी की परियोजना टीमें इस विषय पर स्थानीय ग्रामीणों के बीच जागरूकता बढ़ाने की दिशा में भी काम कर रही हैं। इसके अलावा टाऊनशिप और आस-पास के गांवों को कीटाणुरहित करने के लिए अत्याधुनिक मिस्ट फॉगिंग ड्राइव भी प्रारम्भ की है।

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