Wednesday, August 5

नागपंचमी पर विशेष,चन्द्र शेखर शर्मा की कलम सेबात बेबाक ,सांप को जाने दे इनको मत छोड़िए


नागपंचमी की सभी शेष विशेष खद्दरधारी नाग नागिनों व आस्तीन के सांपो को बधाई मंगलकामनाएँ…
जमीन पर रेंगने वाले सरीसृपों में सांपो की प्रजाति में दो मुंहे साँप के अस्तित्व का मिथक है हाँलाकि मैंने आज तक देखा नहीं है किन्तु बताया जाता है दो मुहाँ सांप अपने सामने खतरे को भांप अपनी सुविधानुसार आगे या पीछे चलने में महारथी होता है । संभवतः इसी वजह से इसे दो मुहाँ सांप कहते है । ऐसा ही अद्भुत गुण राजनीतिक अखाड़े में खद्दर धारियों में भी दिखता ही जो सत्ता लोलुपता के चलते अपनी निष्ठा , आत्मा व जमीर तक का सौदा करने से नही चूकते । वैसे जमीन पर रेंगने वाले सरीसृपों की प्रजाति सांपो से भी एक खतरनाक दो पैर , दो हाथ , दो आंख , दो कान , एक नाक और एक दिमाग वाली प्रजाति इस ब्रह्मांड पर पाई जाती है जो जहरीले सांपो से काफी ख़तरनाक जीव है जिसे इन्सान के नाम से जाना व पहचाना जाता है । इन इंसानो में भी दोमुंहों की कई प्रजातियां पाई जाती है जैसे आस्तीन का सांप , मिठलबरा , चापलूस, भक्त , चमचा और नेता । आज के समय में ज्यादातर इंसान दो मुंहे सांप की तरह आचरण व व्यवहार करते नजर आने लगे हैं , हर बात में सिर्फ हां में हां मिलाना , सही और गलत दोनो बात पर समर्थन करना , गलत होते देख कर भी चुप्पी साध जाना , किसी बात पर इंकार या विरोध करने का साहस नही जुटा पाना इसलिए झूठ,फरेब,मक्कारी को देखते समझते हुये भी खामोश रहते हैं , जो लोग सच का सामना कर बोलने का साहस जुटाते हैं वे बागी, बेवकूफ , देशद्रोही और जमाने से विपरीत चलने वाले कहलाते है ऐसे व्यक्ति को हास्यापद नजरों से देख बेवकूफ ik जाता है। कुछ मौक़ा परस्त अपने लाभ हानि ,फ़ायदा नुकसान देख कर व्यवहार और यार बदलते है , ऐसे अनोखे जीव राजनिति की दुनिया में ज्यादा पाये जाते है। तभी तो मध्यप्रदेश , महाराष्ट्र , राजस्थान जैसे राज्यो में राजनीति के अखाड़े में उलटफेर दिख रहे। खैर कोई बात नहीं सबके अपने जीने के तरीके अपने आचरण और व्यवहार , अपनी ढपली अपना राग है । बहरहाल शेष और विशेष नाग नगीनों के साथ साथ खद्दरधारी आस्तीन के सांपो को एक बार फिर नाग पंचमी की बधाई मंगलकामनाएँ ..
और अंत में:-
क्या खोजते हो इस शहर के अँधेरे में,
इंसान नहीं मिलेंगे तुमको इंसानों के डेरे में ।
यंहा साँप का काटा भी मरहम बन जाता है,
जब इंसान , इंसान को डसकर आता है।।
#जय_हो 25 जुलाई 2019 कवर्धा (छत्तीसगढ़)

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