Wednesday, August 5

पटेश्वर धाम ,कोरोना काल मे संत श्री राम बालक दास के सानिध्य मेंऑनलाइन सतत्संग का 100 दिन पूरा

श्री पाटेश्वर धाम के द्वारा श्री राम बालक दास जी के सानिध्य में चल रहे ऑनलाइन सत्संग को आज 100 दिन पूरे हुए इस अवसर पर सुबह 10:00 से 11:00 बजे एवं दोपहर 1:00 से 2:00 बजे के ऑनलाइन सत्संग परिचर्चा में रामबालक दास जी महा त्यागी को सभी ने शुभकामनाएं दी संत श्री ने भी सभी का आभार प्रदर्शन किया परिचर्चा में भाग लेने वालों का प्रेस नोट बनाने वालों का और साथ ही सभी पत्रकार प्रिंट मीडिया एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के साथियों का आभार प्रदर्शन किया गया जिन के सहयोग से पाटेश्वर धाम के द्वारा संचालित यह अद्भुत ऑनलाइन सत्संग को लाखों लोगों ने सुना ओर पड़ा और अपने जीवन में परिवर्तन का एहसास भी किया आज की परिचर्चा में सभी दिन से ज्यादा लोग जुड़ें सभी में बहुत उत्साह था पाटेश्वर धाम के यूट्यूब चैनल
Rambalakdas
पर प्रसारित होने वाले बाबा जी की पाती कार्यक्रम की भी आज बड़ी चर्चा हुई प्रतिदिन शाम 4:00 बजे प्रसारित होने वाले इस कार्यक्रम में अभी भारत में अद्वितीय निर्माणाधीन पाटेश्वर धाम के मां कौशल्या जन्मभूमि मंदिर की कहानी चल रही है संत श्री राम बालक दास जी बड़े ही सहज ढंग से 1989 से लेकर 2020 तक के मंदिर निर्माण की कहानी को प्रतिदिन बता रहे हैं आज बाबा जी की पाती र्कार्यक्रम में जानकारी दी गई कि किस तरह इस मंदिर निर्माण के संकल्प में रामबालक दास जी ने आजन्म फलाहारी रहने का संकल्प लिया और अन्न का त्याग किया 2002 से लेकर अभी तक वह संकल्प चल रहा है और मां कौशल्या मंदिर निर्माण होते तक उनका संकल्प रहेगा साथ ही श्री राम बालक दास जी ने सभी को इस निर्माण कार्य में जुड़ने का आवाहन भी किया परिचर्चा में जुड़े पाठक परदेशी बैजलपुर ने पंच देवों की पूजा के बारे में जानकारी चाहिए श्री राम बालक दास जी ने बताया कि पंचदेव भी दो श्रेणी के होते हैं पहली श्रेणी में 1 गृहसथ के लिए पंचदेव माता पिता गुरु विप्र गाय और अतिथि को माना गया है दूसरे श्रेणी में पंचदेव छिति जल पावक गगन और समीर इन पांच तत्वों को माना गया अर्थात प्रकृति का संवर्धन एवं माता-पिता गुरुजनों का सम्मान ही पंचदेव पूजन है कलपसिंह जी पंडरिया ने प्रश्न किया कि घर में शंख रखने का क्या महत्व है संत जी ने बताया कि प्रत्येक घर में शंख होना चाहिए पूजा स्थान में शंख का अपना ही महत्व है शंखनाद करने से बहुत सी शारीरिक और मानसिक बाधाओं को नष्ट किया जा सकता है साथ ही रात्रि में शंख में जल भरकर पूर्व दिशा या उत्तर दिशा मुख करके रख दें सुबह उस जल को कपड़े से छानकर पीएं और अपने बच्चों को पिलाएं तो यह वाणी को शुद्ध करता है और बच्चों की स्मरण शक्ति को भी बढ़ाता है परिचर्चा में आज दिल्ली से आंसू मुंगिया उज्जैन से सुरेंद्र सांखला इंदौर से अंजना माई नासिक से धनंजय जी पंजाब से सतीश भाई और मध्य प्रदेश से सुंदर लाल जी महाराष्ट्र से भी बहुत कार्यकर्ता जुड़े और छत्तीसगढ़ के लगभग 15 जिला के कार्यकर्ताओं की उपस्थिति रही ऑनलाइन सत्संग के 100 दिन पूर्ण होने के उपलक्ष्य में पुनः सब का धन्यवाद करते हुए रामबालक दास जी ने शांति पाठ के साथ परिचर्चा का समापन किया
कल ऑनलाइन सत्संग परिचर्चा में अयोध्या आंदोलन 1989 से 9092 के संस्मरण राम बालक दास जी के द्वारा बताए जाएंगे जय श्री राम

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