Saturday, September 26

EXCLUSIVE IMNB,महासमुंद 6 माह से दबंग ग्रामीणों के बहिष्कार का दंश झेल रहा है आदिवासी परिवार,आदिवासियों की प्रताड़ना माओवाद के फसल की खाद

*किशोर कर ब्यूरोचीफ महासमुंद

पीडित परिवार ने थाने से लेकर एसपी तक की शिकायत, कहीं पर नहीं हुई सुनवाई

बहिष्कृत परिवार के समक्ष रोजी-रोटी का संकट

महासमुंद – छत्तीसगढ़ में आदिवासी जनजाति के उत्थान और समाज के मुख्यधारा से उन्हें जोड़ने के लिए लगातार शासन स्तर से कई कदम उठाए जा रहे हैं लेकिन सुदूर वनांचल क्षेत्र में स्थित ग्रामीण इलाकों में आदिवासी जनजाति के लोगों का जन जीवन किस तरह व्यतीत होता है इसकी सुध लेने वाला कोई नजर नहीं आ रहा है । दरअसल महासमुन्द जिले के सरायपाली ब्लॉक अन्तर्गत सुदूरवर्ती ग्राम डूमरपाली में एक ऐसा ही मामला सामने आया है जहां आदिवासी जनजाति से तालुकात रहने वाला एक परिवार पिछले 6 महीने से ग्रामीणों के बहिष्कार का दंश झेलने को मजबूर है। गांव से बहिष्कार का दंश झेल रहा यह परिवार स्थानीय पुलिस चौकी बलौदा सहित महासमुंद पुलिस अधीक्षक को गुहार लगा चुका है लेकिन अभी तक इस परिवार को न्याय नहीं मिल पाया है और गांव में आज भी बहिष्कृत जीवन जीने को यह परिवार विवश है।
मामले को लेकर रहा है मिली जानकारी के अनुसार महासमुंद जिले के सरायपाली ब्लाक अंतर्गत आने वाले ग्राम डूमरपाली मैं निवासरत डोलामणि बरिहा का परिवार ग्रामीणों के बहिष्कार के दंश का शिकार होकर रह गया है । जानकारी के अनुसार विगत सरपंच चुनाव के दौरान डोलामणि बरिहा की धर्मपत्नी सुरेखा बरिहा द्वारा सरपंच पद के लिए नामांकन दाखिल किया गया गया था इनके विरुद्ध सरपंच पद के लिए और भी कई प्रत्याशी मैदान में खड़े हुए थे जिसमें कुछ लोग चुनाव हार गए थे सुरेखा बरिहा भी चुनाव में हार गई थी लेकिन सुरेखा बरिहा के नामांकन दाखिल करने की वजह से चुनाव हारने की बात को लेकर गांव के कुछ दबंग परिवार इनके ऊपर एकमत होकर गांव से बहिष्कृत करने की मंशा बना ली । और चुनाव मतदान उपरांत सुरेखा बरिहा के पूरे परिवार को गांव से बहिष्कृत कर दिया गया। गांव से बहिष्कार किए जाने की जानकारी मिलने के बाद इस परिवार द्वारा पुलिस चौकी बलौदा में इस आशय की शिकायत दी गई और न्याय की मांग की गई लेकिन वहां किसी तरह की कोई सुनवाई नहीं होने की वजह से सुरेखा बरिहा ने महासमुंद जिला पुलिस अधीक्षक को भी न्याय दिलाने की गुहार से संबंधित आवेदन प्रस्तुत किया। लेकिन छह महीना उपरांत भी आज तक इस परिवार की कहीं सुध नहीं ली गई है। जिससे यह परिवार पिछले 6 माह से गांव से बहिष्कृत जीवन जीने को विवश है सुरेखा बरिहा ने पुलिस को दिए अपने शिकायत आवेदन में गांव के 10 दबंग लोगों का नाम दर्ज कराया है । जिनके द्वारा उन्हें गांव से बहिष्कार करने की बात का उल्लेख भी किया गया है । गांव से बहिष्कृत होने के बाद अब इस परिवार को न तो गांव में कोई काम पर बुलाता है और ना ही किसी तरह के कोई बातचीत करता है। जिससे यह परिवार पूरी तरह से परेशान है और काम नहीं मिलने से अब परिवार के समक्ष रोजी-रोटी का संकट भी खड़ा हो गया है। हम आपको बता दें कि पीड़ित महिला ग्राम डूमरपाली की मितानिन भी है लेकिन मितानिन से कोई दवा आदि भी लेने से कतरा रहे हैं। गांव से बहिष्कृत जीवन जीने वाला यह परिवार न्याय दिलाने की गुहार लगा रहा है।

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