Sunday, September 20

भाजपा नेता अशोक बजाज की कविता -कोरोना से बच गए तो, जीवन निहाल है

 

कविता – *कोरोना से बच गए तो, जीवन निहाल है*

        रायपुर भाजपा नेता अशोक बजाज अपनी तुकबंदी और फोटोग्राफी के लिए मशहूर हैं उनके द्वारा चर्चित हुआ एक नारा नशा हैै  खराब,,,, झन पीहू शराब ,,,काफी चर्चित रहा शराब को लेकर उनके द्वारा दिया गया नारा शराबबंदी आंदोलन में जन जागरूकता का काम किया इस बीच कोरोना काल मे उनका उनकी कविता आ गई है।.                                                                                                        यह कोरोना काल है, दुनिया में भूचाल है,
घर से बाहर ना निकलें, जी का जंजाल है।

पर किसने किसकी मानी है, घर में रहने की ठानी है,
जब फैल गया कोरोना तो, हर बस्ती में वीरानी है।

चारों ओर हाहाकार है, मरीजों की चीत्कार है,
दवा नहीं बनेगी, तब तक डॉक्टर भी लाचार हैं।

सूना सूना बाज़ार है, ऑनलाइन व्यापार है,
काम-धंधा कब करें, चिंतित हर परिवार है।

टूट रहे अरमान हैं, बिदक रहे मेहमान हैं,
लग जाये यदि रोग तो, मर कर भी अपमान है।

मंदिर में बंद भगवान हैं, भटक रहे जजमान हैं,
त्योहारों के मौसम में, ना राशन ना पकवान है।

फ़ेस मास्क जरूरी है, रखना दो गज की दूरी है,
कितने भी हों काम पड़े, घर पर रहना मजबूरी है।

जिंदगी बेहाल है, बहुत बुरा हाल है,
कोरोना से बच गए तो जीवन निहाल है।

ऊपर वाले से गुहार है, सुखी रहे संसार है,
हाथ जोड़ विनती करे, बजाज बारम्बार है।

*अशोक बजाज रायपुर*

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