Thursday, February 9

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कोयले की लूट : इसे कहते हैं क्रोनी कैपिटलिज्म! (आलेख : संजय पराते)
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कोयले की लूट : इसे कहते हैं क्रोनी कैपिटलिज्म! (आलेख : संजय पराते)

  क्रोनी कैपिटलिज्म (परजीवी पूंजीवाद) में कॉरपोरेट किस तरह फल–फूल रहे हैं और प्राकृतिक संसाधनों को लूट रहे हैं, इसका जीता–जागता उदाहरण छत्तीसगढ़ में कोयले की खुदाई है। सरगुजा–कोरबा जिले की सीमा पर हसदेव अरण्य क्षेत्र में परसा केते माइंस स्थित है, जो राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड के जरिए राजस्थान सरकार को आबंटित की गई है। राजस्थान सरकार ने एक एमडीओ के जरिए कोयला खुदाई का कार्य अडानी को सौंप दिया है। अनुबंध का प्रमुख प्रावधान यह है कि राजस्थान सरकार को अपने बिजली संयंत्रों को चलाने के लिए अडानी से 4000 कैलोरी प्रति किलोग्राम से नीचे की गुणवत्ता का कोयला स्वीकार नहीं करेगी और कम गुणवत्ता वाले रिजेक्टेड कोयले को हटाने और निबटाने का काम अडानी करेगी। पूरा गड़बड़ घोटाला इसी अनुबंध में छिपा है, क्योंकि छत्तीसगढ़ और देश के अन्य भागों में सरकारी और निजी बिजली संयंत्रों में इस्तेमाल...