Friday, September 25

दन्तेवाड़ा आरती स्पंज आयरन के विरोध पर आयोग ने लिया संज्ञान दौरे पर पहुँचे पोटाई बस्तर

 

संजीव दास/दंतेवाड़ा

किरंदुल।आलनार लौह अयस्क की पहाड़ी को फर्जी ग्राम सभा कर आरती स्पंज आयरन को बेचे जाने के संबंध में बस्तर संभाग के तीन जिले सुकमा, बीजापुर और दंतेवाड़ा के हजारों आदिवासी ग्रामीणों द्वारा विरोध का झण्डा बुलंद किये जाने के मामले का राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग ने संज्ञान में लिया है। आज बस्तर दौरे पर आयोग के सदस्य नितिन पोटाई पहुँचे है।

आयोग के सदस्य नितिन पोटाई ने इस विषय पर कहा कि संविधान में अनुसूचित क्षेत्रों के लिए विशेष कानून बनाये गये हैं। चूंकि सम्पूर्ण बस्तर संभाग में संविधान की पांचवी अनुसूची के अंतर्गत आते हैं एवं पेशा एक्ट लागू है। इसलिए यहां सबसे बड़ी संस्था ग्राम सभा है जहां सारे निर्णय लिये जाते हैं। बिना ग्राम सभा के प्रस्ताव के आदिवासी अंचल के किसी भी खदान को किसी संस्था अथवा कंपनी को लीज में नहीं दिया जा सकता यदि बिना ग्रामसभा के प्रस्ताव के आलनार गांव का तरालमेटा लौह अयस्क पहाड़ आरती स्पंज आयरन निजी कंपनी को बेच दिया गया है, तो मामला गंभीर है।।
अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य नितिन पोटाई ने कहा कि इस पूरे मामले में भू-राजस्व संहिता 1959 छ (क) तथा पुर्नवास अर्जन, पुर्नवासन और पुर्नव्यवस्थापन में उचित प्रतिकार और परदर्शिता अधिनियम 2013 के धारा 41, 42 का पालन हो रहा है कि नहीं, इस विषय में मांग पत्र किसने दिया। शासन द्वारा खदान की लीज कब-कब और किस-किस संस्था को आबंटन किया गया है। प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया गया है कि नहीं, आरती स्पंज आयरन कंपनी को लीज देने में केन्द्र सरकार अथवा राज्य सरकार की क्या भूमिका है। इसके साथ ही श्री पोटाई ने कहा कि ग्राम पंचायत से ग्रामसभा का दिया गया प्रस्ताव की कापी मांगी जायेगी कि कब किसको और कितनी जमीनें ग्रामसभा के प्रस्ताव कर दिया गया है। क्या सरकार ने उक्त जमीने लीज में ली है या खरीदी है। पांचवीं अनुसूचित क्षेत्रों में जमीन देने का क्या प्रावधान है। इन महत्वपूर्ण मुद्दों पर आयोग जिला प्रशासन एवं स्थानीय व्यक्तियों से बातचीत करेगा।
उन्होंने आगे कहा कि बस्तर अंचल खनिज संसाधनों की दृष्टि से काफी समृद्ध है इसलिए देश के बड़े-बड़े औद्योगिक घरानों के द्वारा इसे हासिल करने के लिए गलत तरीके अपनाये जा रहें हैं। जिससे आदिवासी हितों पर गहरा अघात पहुंच रहा है।                                     भारत सरकार द्वारा 08 मई 2014 को जारी किये गये राजपत्र में पांचवीं एवं छठवीं अनुसूची क्षेत्र में भू-अर्जन, पर्नवास एवं व्यवस्थापन करने के लिए जनजातियों की भूमि का अर्जन, पुर्नवास एवं व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम-2013 बनाया है। जिसके तहत स्पष्ट किया गया है

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