कश्मीर के समाधान की ट्रंप की पेशकश पर भारत की दो टूक, कहा- तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की जरूरत नहीं

नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को कम करने में मदद की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नयी पेशकश के जवाब में सरकार के सूत्रों ने बुधवार को कहा कि कश्मीर मुद्दे पर किसी तीसरे पक्ष की किसी भी भूमिका की कोई गुंजाइश नहीं है। भारत का लंबे समय से रुख रहा है कि कश्मीर का मुद्दा भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय मुद्दा है तथा किसी तीसरे पक्ष द्वारा मध्यस्थता या हस्तक्षेप का कोई प्रश्न नहीं उठता। ट्रंप ने मंगलवार को दावोस में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि अमेरिका कश्मीर के मुद्दे से जुड़े घटनाक्रम पर करीब से नजर रख रहा है। उन्होंने इस विवाद को सुलझाने में मदद की पेशकश दोहराई।
पिछले पांच महीने में ट्रंप की ओर से कश्मीर मुद्दे के समाधान के लिए दोनों देशों की मदद की यह चौथी पेशकश है। सरकार के सूत्रों ने कहा कि भारत का स्पष्ट और सतत रुख रहा है कि कश्मीर पर किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति फरवरी में भारत का दौरा कर सकते हैं।
जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा हटाने और उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के भारत के पांच अगस्त के फैसले के बाद से भारत-पाक में संबंध और तनावपूर्ण हो गए हैं। पाकिस्तान इस मुद्दे पर भारत के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने की कोशिश करता रहा है, लेकिन उसे हर जगह से नाकामी हाथ लगी है।
भारत को मिला रूस का साथ
भारत में रूस के राजदूत निकोले कुदाशेव ने शुक्रवार को कहा कि रूस यह जानने को उत्सुक नहीं कि कश्मीर में क्या हो रहा है। जिन्हें इस क्षेत्र के लिए सरकार की नीति और घाटी की स्थिति को लेकर संदेह है, वे कश्मीर का दौरा कर सकते हैं। हमें कश्मीर पर भारत के रुख को लेकर कोई शंका नहीं है। कुदाशेव ने यह बयान उस समय दिया जब उनसे पूछा गया कि जम्मू-कश्मीर का दौरा करने वाले 15 विदेशी राजनयिकों में वह शामिल क्यों नहीं थे।
राजनयिकों ने पिछले सप्ताह जम्मू-कश्मीर का दौरा कर वहां के हालात की जानकारी ली थी। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कश्मीर मुद्दा उठाने के चीन के असफल प्रयास पर रूसी राजदूत ने कहा कि मास्को कभी इस पक्ष में नहीं रहा है कि इसे वैश्विक निकाय में ले जाया जाए क्योंकि यह द्विपक्षीय मसला है। जम्मू-कश्मीर पर भारत का निर्णय इसका आंतरिक मामला है, जो भारत के संवैधानिक दायरे से संबंधित है।

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