तीन तलाक़ कानून के बाद मुस्लिम महिलाओ का जीवन स्तर सुधरा: नजमा खान मुस्लिम महिलाओं को इस कानून ने हौसला दिया

रायपुर। 2 अगस्त। देश में मुस्लिम विवाह अधिनियम यानी तीन तलाक़ कानून को पूरे तीन साल होने जा रहे हैं। इस मौके पर भारतीय जनता पार्टी की नेता और छत्तीसगढ़ उर्दू अकादमी की पूर्व उपाध्यक्ष श्रीमती नजमा खान ने कहा कि इस कानून के बाद प्रदेश सहित पूरे देश में मुस्लिम महिलाओं के जीवन में एक सकारात्मक परिवर्तन आया है। मुस्लिम महिलाओं को दिए जाने वाले इस तरह के तलाक़ के मामले अब सुनने में भी नहीं आ रहे हैं। श्रीमती नजमा ने कहा कि इस कानून से मुस्लिम महिलाएं समाज और देश की मुख्यधारा से जुड़ेंगी और अपने अधिकार हासिल कर सकेंगी। नजमा खान ने इस कानून को बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को धन्यवाद दिया।

श्रीमती नजमा ने कहा कि एक प्रसिद्ध न्यायाधीश आमिर अली ने 1908 में एक किताब लिखी है इसके अनुसार तलाक ए बिद्दत का पैगंबर मोहम्मद ने भी विरोध किया है। जब इस्लामिक देश अपने यहां अपनी महिलाओं की भलाई के लिए बदलाव की कोशिश कर रहे हैं तो हम तो एक लोकतांत्रिक एवं धर्मनिरपेक्ष देश हैं। इसलिए हमारे देश में यह कानून जरूरी था। उन्होंने कहा कि तीन तलाक से प्रभावित होने वाली करीब 75 प्रतिशत महिलाएं गरीब वर्ग की होती हैं। ऐसे में यह कानून उनको ध्यान में रखकर बनाया गया है। श्रीमती नजमा ने कहा कि हम ”सबका साथ सबका विकास एवं सबका विश्वास में भरोसा करते हैं। उन्होंने बताया कि मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक में यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि कोई मुस्लिम पति अपनी पत्नी को मौखिक, लिखित या इलेक्ट्रानिक रूप से या किसी अन्य विधि से तीन तलाक देता है तो उसकी ऐसी कोई भी ‘उदघोषणा शून्य और अवैध होगी। इसमें यह भी प्रावधान किया गया है कि तीन तलाक से पीड़ित महिला अपने पति से स्वयं और अपनी आश्रित संतानों के लिए निर्वाह भत्ता प्राप्त पाने की हकदार होगी। श्रीमती नजमा ने बताया कि इजिप्ट,पाकिस्तान,बांग्लादेश,इराक,श्रीलंका,सीरियाट्यूनीशिया, मलेशिया,इंडोनेशिया, साइप्रस, जॉर्डन, अल्जीरिया, इरान, ब्रुनेई, मोरक्को, कतर और यूएई में भी ट्रिपल तलाक को बैन किया गया है। श्रीमती नजमा खान के कहा कि भारत में कुल तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं का प्रतिशत 23.3 है। 2011 के आंकड़ों के मुताबिक भारत में तलाकशुदा महिलाओं में 68% हिंदू और 23.3% मुस्लिम हैं। श्रीमती नजमा ने कहा कि मुसलमानों में तलाक का तरीका सिर्फ ट्रिपल तलाक को ही समझ लिया गया है, हालांकि ट्रिपल तलाक से होने वाले तलाक का प्रतिशत बहुत कम है। मुसलमानों में तलाक, तलाक-ए-अहसन, तलाक-ए-हसन, तलाक-ए-मुबारत के प्रचलित तरीके हैं और इनके माध्यम से ही अधिकतर तलाक होते हैं, लेकिन ट्रिपल तलाक की चर्चा सबसे अधिक होती है, जो गैर इस्लामकि होने के साथ साथ असंवैधानिक भी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *