प्रधानमंत्री मोदी के बयान पर CBDT की सफाई, डेढ़ करोड़ लोगों ने ही बताई है 5 लाख से ज्यादा की आय

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को एक कार्यक्रम में कहा था कि तीन करोड़ से ज्यादा भारतीय घूमने के लिए विदेश गए, लेकिन सिर्फ 1.5 करोड़ लोग ही इनकम टैक्स देते हैं। विपक्ष ने इस पर प्रधानमंत्री मोदी को घेरते हुए कहा था कि वह टैक्सपेयर्स की संख्या कम बता रहे हैं। हालांकि, आज केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने जो आंकड़ा जारी करके स्थिति साफ करने की कोशिश की है। सीबीडीटी ने कहा कि वित्त वर्ष 2018-19 (असेसमेंट ईयर 2019-2020) के लिए भरे गए रिटर्न के मुताबिक 1.46 करोड़ लोगों ने ही अपनी सालाना आय 5 लाख से ज्यादा बताई है।
सीबीडीटी ने लगातार छह ट्वीट करके इस मामले में स्थिति साफ करने की कोशिश की है। ट्वीट में कहा गया है, ‘व्यक्तिगत टैक्सपेयर्स के मामले में सोशल मीडिया पर कुछ गलत जानकारियां फैलाई जा रही हैं। चालू वित्त वर्ष के दौरान वर्ष 2018-19 के लिए 5.78 करोड़ लोगों ने अपनी आय का ब्योरा देते हुए रिटर्न फाइल की है। इनमें से 1.03 करोड़ लोगों ने 2.5 लाख रुपये से कम की कमाई बताई है और 3.29 करोड़ लोगों ने 2.5-5 लाख तक की टैक्‍स योग्य आय का ब्योरा दिया है। यानी 5.78 करोड़ रिटर्न भरने वाले लोगों में से 4.32 करोड़ लोगों ने अपनी वार्षिक आय 5 लाख रुपये से कम बताई है।’
गौरतलब है कि फाइनैंस एक्ट 2019 के मुताबिक ऐसा व्यक्तिगत करदाता जिसकी वार्षिक आय 5 लाख रुपये तक है उसे टैक्स नहीं देना पड़ेगा। यानी रिटर्न भरने वाले जिन 4.32 करोड़ लोगों ने अपनी वार्षिक आय 5 लाख रुपये तक बताई है उनके ऊपर वर्तमान वित्त वर्ष 2019-20 में टैक्स की कोई देनदारी नहीं बनेगी। इस तरह से अगर वित्त वर्ष 2018-19 की तरह ही रिटर्न फाइल हुई तो 1.46 करोड़ लोग ही टैक्स भरेंगे।
सीबीडीटी की ओर से जारी आंकड़े के मुताबिक, एक करोड़ लोगों ने अपनी आय 5 से 10 लाख के बीच और केवल 46 लाख करदाताओं ने 10 लाख रुपये से ज्यादा की आय घोषित की है। इसके अलावा 3.16 लाख व्यक्तिगत करदाताओं ने 50 लाख से ज्यादा और केवल 8600 लोगों ने 5 करोड़ रुपये से ज्यादा आय घोषित की है। सबसे चौंकाने वाले आंकड़ा यह है कि आईटीआर फाइल करने वाले व्यक्तिगत करदाताओं में से डॉक्टर, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, वकील और दूसरे प्रोफेसनल्स में से केवल 2200 ने अपनी सालाना आय एक करोड़ रुपये से ज्यादा बताई है।
दरअसल, एक चैनल के कार्यक्रम में मोदी ने कहा था, ‘जब बहुत सारे लोग कर नहीं देते हैं, कर नहीं देने के तरीके खोज लेते हैं तो इसका भार उन लोगों पर पड़ता है जो ईमानदारी से कर चुकाते हैं। इसलिए मैं आज प्रत्येक भारतीय से इस विषय में आत्ममंथन करने का आग्रह करूंगा। क्या उन्हें यह स्थिति स्वीकार है?’ उन्होंने कहा कि पिछले पांच साल में देश में 1.5 करोड़ से ज्यादा कारों की ब्रिकी हुई है। तीन करोड़ से ज्यादा भारतीय कारोबार के काम से या घूमने के लिए विदेश गए हैं, लेकिन स्थिति ये है कि 130 करोड़ से ज्यादा के हमारे देश में सिर्फ 1.5 करोड़ लोग ही आयकर देते हैं।
येचुरी ने ट्वीट कर उठाए सवाल
येचुरी ने ट्वीट कर कहा, ‘मोदी के मुताबिक प्रत्येक भारतीय चोर है, जबकि उनकी पार्टी (भाजपा) ने इलेक्ट्रोरल बॉंड के जरिए गुपचुप तरीके से करोड़ों रुपये जुटा लिए हैं।’
उन्होंने प्रधानमंत्री से पूछा, ‘अगर कोई भी व्यक्ति कर अदा नहीं कर रहा है तो खुद मोदी पिछले छह साल से क्या कर रहे हैं? क्या उन्होंने नोटबंदी करते समय यह दावा नहीं किया था कि इससे कालेधन और करचोरी पर रोक लगेगी?’

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