बस्तर में वनोपज प्रसंस्करण इकाईयों को दें बढ़ावा : वन विभाग की समीक्षा के दौरान प्रमुख सचिव पिंगुआ ने दिए निर्देश

रायपुर, (IMNB)। प्रमुख सचिव श्री मनोज पिंगुआ द्वारा आज वन विभाग की समीक्षा के दौरान बस्तर में वनोपज प्रसंस्करण इकाईयों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि इससे वनवासियों को रोजगार के साथ-साथ आमदनी में बढ़ोत्तरी के लिए अच्छा अवसर मिलेगा। वन वृत्त कार्यालय जगदलपुर के सभाकक्ष में आयोजित बैठक में अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक भू-प्रबंध श्री सुनील मिश्रा, छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि उत्पादन बोर्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अरुण पाण्डेय, मुख्य वन संरक्षक श्री मोहम्मद शाहिद सहित जगदलपुर, सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर के वन मंडलाधिकारी, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, इंद्रावती टाईगर रिजर्व एवं जगदलपुर वन विद्यालय के संचालक उपस्थित थे।
बैठक में श्री पिंगुआ ने बस्तर में स्थानीय ग्रामीणों की आय में वृद्धि के लिए वनोपज संग्रहण के साथ ही इसके प्रसंस्करण को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि शासन द्वारा वनोपज की खरीदी स्व-सहायता समूहों के माध्यम से न्यूनतम समर्थन मूल्य में किए जाने के कारण व्यापारियों ने अधिक दाम पर वनोपज की खरीदी की, जिसका लाभ निश्चित तौर पर वनवासी संग्राहकों को मिला है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में अधिक से अधिक खाद्य प्रसंस्करण एवं वनोपज प्रसंस्करण इकाईयां स्थापित करना चाहती है। जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिले। वनोपज का संग्राहकों के साथ ही यहां के स्थानीय युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए इसके प्रसंस्करण पर अधिक जोर दिया जाना चाहिए। स्थानीय व्यापारियों के माध्यम से भी यहां वनोपज प्रसंस्करण की अधिक से अधिक इकाईयां खुलें, इसके लिए उन्हें प्रोत्साहित किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पीएम फॉर्मलाइजेशन ऑफ माइक्रो फूड प्रोसेसिंग इंटरप्राइजेज के साथ ही वनांचल उद्योग का उपयोग यहां वनोपज प्रसंस्करण इकाइयों को स्थापित करने में बेहतर तरीके से किया जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने लोक जैव विविधता पंजी, सामुदायिक वन अधिकार पत्र, तेंदूपत्ता संग्रहण एवं भुगतान, लघु वनोपज संग्रहण आदि की भी समीक्षा की।

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