बाढ़-बारिश से बिहार बेहाल, सड़क से लेकर गांव-घर तक पानी ही पानी

नई दिल्ली। बिहार और नेपाल के तराई क्षेत्रों में हो रही रुक-रुक कर बारिश के कारण इलाके में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। नदियां उफान पर हैं। सड़क जलमग्न हो चुके हैं। लाखों लोगों को विस्थापित होना पड़ रहा है। जल स्तर में हो रहे वृद्धि के कारण बाढ़ का खतरा और भी ज्यादा बढ़ने लगा है। एनडीआरएफ की टीम राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई है। नेपाल से बिहार आने वाली नदियां भी उफान पर हैं। गंडक, कोसी, बागमती, लखनदेई, बूढ़ी गंडक जैसी नदियां सब कुछ अपने आगोश में चपेट लेने को उतारू हैं। नदियों के तेज बहाव से सड़कों का संपर्क टूट गया है। लाखों लोग भारी तबाही झेल रहे हैं। हालांकि ऐसा नहीं है कि यह खतरा अचानक से आया है बल्कि पहले से ही इसकी अंदेशा जताई जा रही थी।
अगर बात चंपारण, तिरहुत और मिथिलांचल के करें तो यहां 5 दर्जन से भी ज्यादा गांव या तो टापू बन गए हैं या उनमें पानी बड़ी तेजी से फैल रहा है। नदियों के उफान के कारण बांध और तटबंध टूटने का भी सिलसिला जारी है। मुजफ्फरपुर में बागमती, लखनदेई और गंडक के उफान के कारण जिले के छह प्रखंड बाढ़ की भयानक चपेट में है। उधर सीतामढ़ी में भी बाढ़ तेजी से फैल रहा है। हालांकि अच्छी बात यह है कि जिले के कुछ हिस्से में पानी में कमी हो रही है। गंडक में लगातार बढ़ रहे जलस्तर के कारण गोपालगंज और सारण में भी बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। गंडक नदी के किनारे बसे 3 दर्जन गांव बाढ़ की चपेट में हैं। आने-जाने के लिए अब नाव का ही सहारा बचा है। इन इलाकों में लगातार कई दिनों से बेतहाशा बारिश हो रही है। ऐसे में बारिश के पानी का भी जमाव देखने को मिल रहा है।
हर साल की तरह इस साल भी कोसी अपनी कहर बरपा रही है। इस कारण कोसी क्षेत्र में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। नदी के तेज बहाव के कारण हाईवे के किनारे कटाव हो रहे है। कोसी में बढ़ रहे जलस्तर के कारण मधुबनी, सहरसा, सुपौल, दरभंगा और पूर्णिया जैसे जिलों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। नेपाल से आ रहे पानी के कारण अररिया का भी हाल बेहाल है। यहां का मदन ईश्वर धाम शिव मंदिर जलमग्न हो गया है। कटिहार में कोसी नदी ने एनएच 31 पर अपना कहर बरपाया है। नेपाल से सटे हुए तराई इलाकों में भारी बारिश होने के कारण फारबिसगंज, जोकीहाट, सिकटी और पलासी में बाढ़ का खतरा बढ़ गया हुआ है। मधुबनी के माधवपुर में बलवा अस्पताल के पास एक नदी का बांध टूट गया है जिसके कारण बाढ़ का खतरा इलाके में बना हुआ है। दरभंगा के कुशेश्वरस्थान पूर्वी प्रखंड के 2 दर्जन से भी ज्यादा गांव पानी से घिर गए है। यहां 50,000 से अधिक आबादी प्रभावित है।
बिहार में इस साल वज्रपात के कारण डेढ़ सौ से ज्यादा लोगों की अब तक मौत हो चुकी है। बाढ़ के संभावित खतरे को लेकर नीतीश कुमार लगातार बैठकें कर रहे हैं। वे बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों का भी दौरा कर चुके हैं। दूसरी ओर केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने भी एनडीआरएफ की टीम के साथ बैठक कर चुके हैं। बाढ़ की संभावित खतरों को लेकर फिलहाल तैयारियां जोरों पर है। हालांकि कटिहार, किशनगंज, अररिया, सुपौल, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, गोपालगंज, पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सारण, मधुबनी तथा पटना जैसे जिलों में बाढ़ का हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। हालांकि, सरकार का कहना है कि बिहार में बाढ़ की स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है। लेकिन इस बाढ़ ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी है। कई इलाकों में खरीफ फसल बर्बाद हो गई है। इस चुनावी साल में सरकार बिहार को बाढ़ से किस तरह उबारती है और किस तरह आम लोगों को मदद दे पाती है, यह देखना होगा।

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