बात बेबाक – भावना का ज्वारभाटा

चन्द्र शेखर शर्मा (पत्रकार) 9425522015
“भावना का ज्वारभाटा”
कबीरधाम की राजनैतिक आबो हवा की मिठास कहे या जिले के राजनेताओं का दुर्भाग्य कि जिलें की राजनीतिक जमीन बाहरी नेताओ के लिए काफी उर्वरा रही है । जिले की राजनीति में एक कहावत “गांव के जोगी जोगड़ा आन गांव के सिद्ध” चरितार्थ होते दिखती है । 15 बरस सत्ता सुख भोगने के बाद भी भाजपा को कांग्रेस की तरह पैराशूट के जरिये आयातित व नवांकुरित नेता का सहारा लेना चर्चा का विषय बना हुआ है । कांग्रेस के परिवारवाद की घोर विरोधी , अकबर और ममता पर बाहरी का आरोप लगाने वाली भाजपा भावना के नाम पर परिवारवाद और बाहरी का आरोप झेल रही है। भावना की भावना में बहते भाजपा संगठन के खेमे में खासी नाराजगी देखी जा रही है हांलाकि डॉ रमन सिंह के व्यक्तित्व और उनकी व्यवहार कुशलता के चलते लोग खुल कर विरोध नही कर पाते किंतु मौका मिलने पर डंक मारना भी नही छोड़ते ।
राजनीति से दूर दूर तक का वास्ता ना रखने वाली भावना की जिला पंचायत की राजनीति में पदार्पण और आते ही उपाध्यक्ष पद की जोड़ तोड़ की तिकड़म , जिला पंचायत की राजनीति के भाई साहब का भावना के पीछे लगाई जा रही पिछलग्गू दौड़ , पिछड़ा समाज के बहाने राजनीति की दुकानदारी सजाए रखने में महारत हासिल नेता का आत्मसमर्पण क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है कि जब शक्कर की मिठास और 84 का दम ठंडा पड़ गया तो आम कार्यकर्ताओ को कौन पूछता है । बहरहाल भावना के इर्दगिर्द घूमती रणवीरपुर क्षेत्र के साथ साथ पंडरिया विधानसभा की राजनीति और उनके विधायकी के महत्वाकांक्षी सपने ने कर्मठ भाजपाइयों के पेशानी पर बल ला दिए कि आखिर  कब तक दरी उठईया नेता बने फिरेंगे ।
राजनीति से कोसो दूर का वास्ता न रखने वाली गोबरहीन टुरी मेरी बकवास सुन कहती है तहू भकला हस का महाराज अतका नई जानेस जी आजकल पैसा फेंक तमाशा देख राजनीति होगे हे , जनता और कार्यकार्या के भावना के कोई मोल नही हे तभे तो जिला के राजनीति बेमेतरा अउ रइपुर ले घलो सद – भावना  ले चल जाथे ।
और अंत मे :-
खुद को अपनी ही नजरों से गिराना छोड़ दो ,
जब लोग तुम्हें ना समझें तो उन्हें समझाना ही छोड़ दो ।
#जय_हो 21 नवम्बर 2020 कवर्धा (कबीरधाम )

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *