भूमिपूजन में राष्ट्रपति को न बुलाना गैरवाजिब – रिजवी

रायपुर। दिनांक 10/08/2020। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के मीडिया प्रमुख एवं मध्यप्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम के पूर्व अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता इकबाल अहमद रिजवी ने राम मंदिर जन्म भूमि पूजन पर देश के सर्वोच्च राष्ट्रपति पद पर आसीन महामहिम श्रद्धेय रामनाथ कोविन्द की अनुपस्थिति पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए राम मंदिर ट्रस्ट के प्रमुख से पूछा है कि इस महान शख्सियत को क्यों आमंत्रित नहीं किया गया? देश की अनुसूचित जाति एवं जनजाति श्रेणी में आने वाली जातियों के बीच यह चर्चा एवं नाराजगी है कि राष्ट्रपति श्री कोविन्द, कोरी जाति से हैं जो उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति के अंतर्गत आती है। उन्हें भूमि पूजन में आमंत्रित न करना गैरवाजिब है। यह वर्ग विशेष के आमंत्रित सदस्यों एवं मंदिर ट्रस्ट के सदस्यों से देश की जनता एवं खासतौर से दलित वर्ग जानने इच्छुक है।
श्री रिजवी ने कहा है कि राष्ट्रपति की उपस्थिति से भूमि पूजन की नाम पट्टिका में उनका नाम सबसे ऊपर होता जो कट्टरपंथी वर्ग विशेष के महानुभावों को गवारा न था। नाम पट्टिका में नरेन्द्र मोदी एवं विशेष आमंत्रित में संघ प्रमुख श्री मोहन भागवत का ही नाम है जो यह सिद्ध करता है कि भूमि पूजन के कार्यक्रम में संघ समर्थक चार एवं महंतों में से केवल एक महंत नृत्य गोपालदास को ही लिया गया। सभी श्रद्धेय शंकराचार्यों की अनुपस्थिति भी देश में उनके अनुयायियों के बीच चर्चा एवं नाराजगी का विषय बन चुका है जो देश की जागरूक जनता को नागवार गुजरी है। इस बहुप्र्रतीक्षित भूमि पूजन में शबरी अनुसूचित जाति एवं निषाद राज आदिवासी समाज के वंशजों को आमंत्रित नहीं किया गया। यह बात अवश्य ही भगवान मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम को भी नागवार गुजरी होगी। आम चर्चा है कि राम मंदिर भूमि पूजन का कार्यक्रम करवाकर भाजपा एवं संघ द्वारा श्रेय लेने का प्रयास मात्र है। दरअसल में भूमि पूजन का श्रेय पूर्व सी.जे.आई. रंजन गोगई और अब राज्यसभा सांसद के द्वारा दिये गये फैसले को ही जाता है जिन्हें इस कार्यक्रम में आमंत्रित ही नहीं किया।

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