मजदूरों और अंधविश्वास के खिलाफ लड़ने वाले स्वामी अग्निवेश का बचपन छतीसगढ़ के सत्ती रियासत में बीता नाना दिवान थे ,वरिष्ठ पत्रकार प्राण चड्डा का स्मरण हमे अग्निवेश के शुरुवाती संघर्ष के दिनों में ले जाता है

मजदूरों और कमजोरों का सच्चे
हमदर्द का स्मृति शेष हो जाना …
मजदूरों और अंधविश्वास के खिलाफ लड़ने वाले आर्य समाज के स्वामी अग्निवेश

छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार प्राण चड्डा

का दिल्ली में आज निधन हो गया। एक सोशल एक्टिवेस्ट के रूप में उनकी पहचान देश में थी, पर बहुत कम लोग जानते होंगे कि वह अविभाजित बिलासपुर जिले की सक्ति रियासत में 21 सितम्बर 1939 को पैदा हुए थे। ऐसा न्हउनका भी मानना था और उनके मार्कशीट पर यही दर्ज था। ऐसा भी वही कहते थे। उनके नाना सक्ति रियासत के दीवान थे। पिता की मृत्यु के बाद नाना के साथ ही उनका परिवार रहा। बिलासपुर के प्रथम महापौर ई अशोक राव जी के करीबी रिश्तेदार थे।
अशोक राव जी को गोंड़पारा के निवास स्थान में वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार पँ श्यामलाल चतुर्वेदी जी ने उनसे परिचय कराया, तब मैं नया नया पत्रकारिता से जुड़ा सन 1978 के करीब। अग्निवेश हरियाणा में बंधक मजदूरों की रहाई के लिए काम करते थे।ये छतीसगढ़ के जांजगीर से लेकर मुंगेली तक के थे जो फरीदाबाद की पत्थर खानों और हरियाणा की ईंट भट्ठों में बंधक बना लिए जाते थे।
छतीसगढ़ में केसतरा में सामूहिक नर संहार हुआ, अग्निवेश जी के साथ मैँ और पत्रकार सूर्यकांत चतुर्वेदी मौके पर पहुंचे, तब वहां आग बुझी नहीं थी। स्वामी अग्निवेश निडर थे। बिलासपुर से ठंड के दिनों पलायन करने वाले मजदूरों से भर ट्रेन जाती। इसे पलायन एक्सप्रेस कहा जाता। सुबह सुबह अग्निवेश के साथ हम लोग भी स्टेशन जाते।
अग्निवेश एक पत्रिका ‘संघर्ष जारी है’ प्रकाशित करते। कैलाश सत्यार्थी भी साथ थे, दफ्तर जंतर मंतर दिल्ली में सामने था। इसमें मेरे आलेख प्रकाशित होते। वो अपने विचारों पर अडिग रहते, जिससे कुछ लोग उनसे जहां जाते वो हाथपाई करते। लेकिन वो झुके नहीं। लंबी बीमार बाद दिल्ली में आज उनका निधन हो गया। उनके ना रहने से दलितों, मजदूरों, कमजोर वर्ग का एक सच्चा हमदर्द कम हो गया।

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