Sunday, July 21

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से राज्य के पेंशनरों को मध्यप्रदेश सरकार से आर्थिक गुलामी से मुक्ति दिलाने की मांग

●म प्र और छ ग के बीच सन 2000 से लंबित पेंशनरी आर्थिक दायित्व का बटवारा नही….
*छत्तीसगढ़ राज्य सँयुक्त पेंशनर्स फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने की अध्यक्षता में गत रविवार को पेंशनर्स फेडरेशन से जुड़े पेंशनर् संघो की बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल से राज्य के पेंशनरों को मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार की आर्थिक गुलामी से मुक्ति दिलाने की मांग की है और उन पर पेंशनरो के महँगाई राहत भत्ता को लेकर निर्भरता से तुरन्त छुटकारा पाने के लिए त्वरित कार्यवाही करने की मांग की है।
             जारी विज्ञप्ति में उन्होंने आगे बताया है कि छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के बाद पेंशनरों हित मे लगभग इन 22 वर्षो में किसी सरकार ने इस मामले को लेकर कुछ नहीं किया। अधिकतम समय तक दोनों राज्यो में भाजपा की सरकारें सत्ता पर काबिज रही। इसलिए वे आपसी मिलीभगत में पेंशनरी दायित्वों के विभाजन को अनदेखा करते रहे। परन्तु चार साल पूर्व कांग्रेस सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सरकार से पेंशनरों की बहुत आशाएं थी जो इन बीते वर्षो में पूरी तरह धूमिल हो गया है। यह सत्य है कि सत्ता पर काबिज मुख्यमंत्री इन बातों से अनभिज्ञ होते हैं। उनके आँख,नाक,कान का काम तो ब्यूरोक्रेट्स ही करते हैं जो स्वयं 22 वर्षो से पेंशनरों के मामले में गहरी नींद में होने कारण राज्य पुनर्गठन अधिनियम धारा 49 को विलोपित करने की दिशा में कोई भी कार्यवाही करने की कवायद अब तक नही की है और न ही इस गम्भीर विषय पर तब भी और अब भी मुख्यमंत्री को समस्या की समाधान पर शायद ही अवगत कराया गया हो।  इसी लिये छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के बाद से पेंशनरों की प्रमुख समस्या राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 के तहत पेंशनरी दायित्वों का बंटवारा  नही होने से हर आर्थिक भुगतान के लिये मध्यप्रदेश शासन से सहमति लेना अनिवार्य मजबूरी बना हुआ है और बढ़ती महंगाई को लेकर केन्द्र सरकार के खिलाफ आंदोलनकारी, आलोचक कांग्रेस पार्टी की छत्तीसगढ़ में सरकार है जो पेंशनरो की महंगाई राहत की राशि की किस्त  अबतक दबाए बैठी है जो अब केंद्र में 38℅प्रतिशत हो गया है  और हमें केवल 28℅ पर लटका कर रखे हुए हैं. जबकि
इसे देश के बहुतायत  राज्य भी अपने राज्य में लागू कर पेंशनरो को भुगतान भी कर चुके हैं मगर छत्तीसगढ़ राज्य के लगभग सवा लाख से अधिक पेन्शनर और परिवार पेंशनर इस महंगाई से त्रस्त दोनों राज्य सरकारों के बेरुखी के बीच पिसा जा रहा है।
             जारी विज्ञप्ति में पेन्शनर फेडरेशन के अध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव एवं फेडरेशन के घटक संगठन के क्रमशः  छत्तीसगढ़ प्रगतिशील पेन्शनर कल्याण संघ के प्रांताध्यक्ष आर पी शर्मा, पेंशनर्स एसोशियेशन छत्तीसगढ़ के प्रांताध्यक्ष यशवन्त देवान, छत्तीसगढ़ पेंशनधारी कल्याण संघ के प्रांताध्यक्ष डॉ डी पी मनहर तथा राज्य पेंशनर्स महासंघ छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष जयप्रकाश मिश्रा ने आगे बताया है कि मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ शासन के बीच पेंशनरी दायित्व के बंटवारे से मध्यप्रदेश सरकार को आर्थिक हानि होना है,इसलिए मध्यप्रदेश शासन वर्षो से जानबूझकर टालती आ रही हैं और चूंकि दोनों ही राज्यों में पूर्व में एक ही राजनीतिक दलों की सरकार होने से इस मामलें का जानबूझकर निराकरण नही किया गया परन्तु अब वर्तमान में मध्यप्रदेश में भाजपा की और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार होने के बाद भी बंटवारे का मामला क्यों लंबित है, यह यक्ष प्रश्न बना हुआ हैं जबकि पेंशनरी दायित्वों का बंटवारा नहीं होने से छत्तीसगढ़ शासन को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है,  इस महत्वपूर्ण मामले से राज्य में जिम्मेदार ब्यूरोक्रेट्स द्वारा भूपेश सरकार को अंधेरे में रखे हुए है, इसीलिए राज्य सरकार हो रहे इस आर्थिक नुकसान से भी अनभिज्ञ है।

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