राकेश मारिया की किताब पर कांग्रेस का पलटवार, ‘हिंदू आतंकवाद’ वाली बात को 12 साल तक सार्वजनिक क्यों नहीं किया?

नई दिल्ली। मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया की एक पुस्तक को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने राकेश मारिया की एक पुस्तक में आतंकी अजमल कसाब से जुड़े कुछ दावे किए जाने को लेकर बुधवार को सवाल किया कि ‘हिंदू आतंकवाद’ की साजिश वाली बात को मारिया ने 12 वर्षों तक सार्वजनिक क्यों नहीं किया और जांच एवं अदालती प्रक्रिया में यह बात शामिल क्यों नहीं हुई।
कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता मनीष तिवारी ने मारिया द्वारा लिखी गई पुस्तक में दावे के बारे में पूछे जाने पर कहा कि इस देश में एक अच्छी परंपरा स्थापित हुई है कि बहुत लोग किताबें लिखते हैं। 2-3 किताबें मैंने भी लिखी हैं। उन्होंने कहा कि राकेश मारिया साहब, जब 26/11 का घिनौना आंतकवादी हमला हुआ था, उस दौरान मुंबई पुलिस में आला पद पर थे। ऐसे में उन्होंने ये बात पिछले 12 वर्ष में सार्वजनिक क्यों नहीं की? यह जांच प्रक्रिया और अदालती प्रक्रिया का भाग क्यों नहीं बना?
मनीष तिवारी ने कहा कि इन सवालों के जवाब मारिया को देने चाहिए। कांग्रेस नेता ने कहा कि इस हमले की जांच हुई, अदालत की प्रक्रिया चली और उस अदालत की प्रक्रिया में अजमल कसाब को दोषी पाया और संप्रग की सरकार ने कसाब की मौत की सजा को क्रियान्वित किया।
गौरतलब है कि मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त मारिया ने दावा किया है कि लश्कर-ए-तैयबा ने 26/11 के मुंबई आतंकी हमले को ‘हिंदू आतंकवाद’ के रूप में पेश करने तथा पाकिस्तानी आतंकवादी मोहम्मद अजमल कसाब को बेंगलुरु के समीर चौधरी के रूप में मारे जाने की योजना बनाई थी। मारिया ने सोमवार को जारी अपने संस्मरण ‘लेट मी से इट नाउ’ में 26/11 के मुंबई हमले में उनके द्वारा की गई जांच का जिक्र किया। उस हमले की योजना लश्कर ने बनाई थी और उसमें पाकिस्तान का हाथ भी होने का पता चला था।

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