संस्कृति बचाने डीजे की धुन नही परम्परा गत नृत्य वाद्य की जरूरत है

  1. ब्युरो चीफ डॉ रामकृष्ण बैरागी
  • किरंदुल-कोया कुटमा समाज की ओर से दो दिवसीय मेलेे का समापन सोमवार को बड़े गुडरा में की गई। मेले में लगे इस समापन कार्यक्रम पर 20 गांव के आदिवासियों ने गौर नृत्य किया।आयोजन के प्रमुखों ने कहा समाज की परंपराओं को जीवित रखने हेतु डीजे की धुन नही बल्कि सामाजिक परंपराओं वाले नृत्य और गाने की अपील की गई तथा समाज के विकास से लेकर संस्कृति को बचाने नशा मुक्ति और अन्य मामला को लेकर योजना बनाई समाज के अध्यक्ष सुरेश कर्मा ने कहा कि राजनीति से हटकर समाज को एकजुट करने की कोशिश पहले करनी होगी।मेले में गांव गांव से आए नर्तक दल स्कूल छात्र छात्राएं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति दी।              नृत्य के माध्यम से जहां दलों ने आदिवासि युवा बिरसा मुंडा के बारे में लोगों को बताया तो वही सालों से शादी की चली आ रही परंपरा का चित्रण किया।समापन कार्यक्रम में एन एमडीसी सीएसआर उपमहाप्रबंधक धर्मेन्द्र आचार्य और प्रबंधक जितेंद्र कुमार उपस्थित हुए यह कार्यक्रम प्रतिवर्ष सीएसआर के सहयोग से आयोजित की जाती है।इस दो दिवसीय मेले का समापन रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ हुई।

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