सरकार बदली, गाय-गोठान के नाम पर करोड़ो का बजट, पर “गौमाता” के न अच्छे दिन आए,  न ही आया वक़्त में बदलाव ,भगवानु नायक

 

 

  • सरकार बदली, गाय-गोठान के नाम पर करोड़ो का बजट, पर “गौमाता” के न अच्छे दिन आए,  न ही आया वक़्त में बदलाव।

 

गाँव, गरीब और ग्रामीणों के लिए धरातल में काम करें सरकार – जकाँछ

 

रायपुर, छत्तीसगढ़ , दिनांक 26 जुलाई 2020 । जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रदेश प्रवक्ता व अधिवक्ता भगवानू नायक ने बिलासपुर जिले में तखतपुर विकासखंड के अंतर्गत ग्राम मुड़ेपार के छोटे से गोठान के अंदर 45 गायों की दर्दनाक मौत पर सवाल खड़ा करते हुए कहा इतनी बड़ी संख्या में गायों की मौत प्राकृतिक है या फिर हत्या ? क्या मृत गायों के मृत्यु का कारण जानने के लिए  प्रशासन ने पोस्टमार्टम किया ?  नरवा, गरवा, घुरवा और बाड़ी योजना को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के साथ ही गाय और गोठान पर  केंद्रित बताया जाता है जिसके लिए  करोड़ों का बजट भी है । एक-एक गोठान के निर्माण  के लिए 25-25 लाख रुपया का प्रावधान है। कुछ दिन पहले ही सरकार के द्वारा गौधन योजना लाया गया। उसके बावजूद इतनी बड़ी संख्या में गायों की मौत हो रही  है, हाल में ही बलौदाबाजार जिले में गायों  मौत हुई। लगातार गायों की मृत्यु इस बात का द्योतक है कि गोठान, गोधन और गोबर की योजनाएं सिर्फ कागजों तक ही सीमित है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृण करने के लिए सरकार को गांव, गरीब और ग्रामीणों के लिए धरातल में काम करने की आवश्यकता है।

 

भगवानू नायक ने कहा सरकार बदल गई पर गौमाता का वक्त नहीं बदला इसके पहले भाजपा राज में भी गौमाता के अच्छे दिन नहीं आए और गौशालाओं में गायों की मौत होते रही है और अब गोठानो में हो रही है।  गौरक्षा के नाम पर राजनीति करने वाले भाजपा के अनुवांशिक  संगठनों  की छत्तीसगढ़ में कमी नहीं है जिन्होंने गौमाता को नारों में जिंदा रखा पर गौशालाओं में होने वाले गौमाताओं की मृत्य को रोक नहीं सके। इस प्रकार भाजपा कांग्रेस राज में गौवंश की लगातार मौत के साथ ही गायों की दुर्दशा अत्यंत दुःखद, दुर्भाग्यपूर्ण और दयनीय रही है।

 

 

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