सरपंच,पंच के पद पर महिलाओं की जीत सामने आए पति,महिला सशक्तिकरण को चुनौती दे रहा है सरपंच पति महिला सरपंच की जगह उसका पति मीडिया के सामने होता है उपस्थित

किशोर कर ब्यूरोचीफ महासमुंद

महिला सशक्तिकरण को चुनौती दे रहा है सरपंच पति

महिला सरपंच की जगह उसका पति मीडिया के सामने होता है उपस्थित

कागजो में सिमटा महिला सशक्तिकरण का नारा

महासमुंद- महिलाओं को समाज के मुख्यधारा से जोड़ने और उचित स्थान दिलाने के उद्देश्य को लेकर पंचायतों में आरक्षण की व्यवस्था लागू करते हुए कई ग्राम पंचायतों में महिलाओं को सरपंच पद पर नियुक्ति का अधिकार दिया गया है जिससे कि महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो सके और समाज में अहम भूमिका निभा सके लेकिन आरक्षित पंचायतों में भी महिलाओं के अधिकारों का पूरा उपयोग पुरुषों के द्वारा किया जाने लगा है जिससे महिला आरक्षण व्यवस्था पर फिर से सवाल खड़ा हो गया है दूसरी और महिला सशक्तिकरण की दिशा में उठाया जा रहे कदम भी अब कागजों तक सिमट कर रह गए हैं ऐसा मामला महासमुंद जिले के सरायपाली ब्लॉक में सामने आया है जहां सुदूरवर्ती ग्राम पंचायत भगत सरायपाली में ग्राम पंचायत में महिला आरक्षण के चलते महिला सरपंच की नियुक्ति हुई है लेकिन महिला सरपंच के तमाम अधिकारों का उपयोग महिला सरपंच के पति द्वारा किया जा रहा है पंचायत की बैठकों से लेकर कई मामलों में निर्णय लेने का काम भी सरपंच पति के द्वारा किया जाता है इतना ही नहीं मीडिया को बयान देने के मामले में भी कई मामले में सरपंच पति ही कैमरे के सामने उपस्थित होता है ऐसे में ग्राम पंचायत में महिला आरक्षण और महिला सरपंच की नियुक्ति पर सवाल खड़ा हो गया है इस तरह की व्यवस्था सामने आने के बाद सरपंच पति द्वारा महिला सशक्तिकरण को चुनौती देता हुआ प्रतीत हो रहा है महिला सरपंच के तमाम अधिकारों का उपयोग सरपंच पति तपन पटेल द्वारा किए जाने के बाद भी न तो प्रशासन इस दिशा में कोई कदम उठा पा रहा है और ना ही पंचायत के सचिव चन्द्र कुमार साहू इस दिशा में कोई व्यवस्था दे पा रहे हैं लिहाजा सरकारी तंत्र की उदासीनता के चलते महिला सशक्तिकरण कागजों तक सिमट कर रह गया है।

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