“जोखिम में जान – सरकारी अस्पतालों में बाँट दी गई, रोगाणु मारने की दवा” समाचार पर छत्तीसगढ़ मानव अधिकार आयोग का एक्शन

छत्तीसगढ़ राज्य मानव अधिकार एक्शन में आ गया है। समाचार पत्र में प्रकाशित खबर को आधार बनाते हुए संज्ञान में लिया है। मिली जानकारी के अनुसार

“जोखिम में जान – सरकारी अस्पतालों में बाँट दी गई, रोगाणु मारने की दवा” के शीर्ष आशय से मीडिया में प्रकाशित खबर के आधार पर छत्तीसगढ़ मानव अधिकार आयोग, रायपुर द्वारा स्वत: स्फूर्त संज्ञान लिया गया है|

प्रकाशित समाचार के अनुसार, छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विस कार्पोरेशन द्वारा सरकारी अस्पतालों में, पोवीडीन आयोडीन, एन्टीसेप्टीक सोल्यूशन जाँच में घटिया पाया गया है, डॉ भीमराव स्मृति चिकित्सालय रायपुर में बांटी गयी उक्त दवा की औषधी विभाग ने दिनांक 26.02.2021 को जाँच की तो दवा अमानक पायी गई, उसके उपरांत संबंधित कार्पोरेशन द्वारा दवा वापस मंगायी गई। एन्टीसेप्टीक लोशन, पोवीडीन आयोडीन का उपयोग आपरेशन के दौरान घाव को बैक्टीरियन इन्फेक्शन से बचाने के लिये प्रयोग किया जाता है, अमानक दवा के इस्तमाल से मरीजों मे इन्फेक्शन का खतरा बढ़ गया है।

प्रकाशित समाचार लोक स्वास्थ्य से संबंधित है। अमानक दवा के सरकारी अस्पताल में इस्तमाल से लोगों का स्वास्थ्य खतरे में होने की संभावना से इंकार नही किया जा सकता, इसे ध्यान में रखते हुए प्रकाशित समाचार पर विचारोपरांत आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष गिरिधारी नायक और सदस्य, नीलम चंद सांखला ने विषय पर स्वतः संज्ञान लेकर संचालक, स्वास्थ्य सेवायें, छत्तीसगढ़ शासन से त्वरित प्रतिवेदन आहूत किया है।

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