भारत बंद के समर्थन में छत्तीसगढ़ बंद ,चक्का जाम,प्रदर्शन होलिका दहन में तीनों किसान विरोधी कानून जलाया जाऐगा


रायपुर (IMNB NEWS AGENCY)

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति और 500 से अधिक किसान संगठनों के साझे मोर्चे संयुक्त किसान मोर्चा के संजय पराते ने IMNB NEWS AGENCY को बताया कि मोर्चो के  आह्वान पर छत्तीसगढ़ में भी छत्तीसगढ़ किसान आंदोलन और छत्तीसगढ़ किसान सभा सहित इससे जुड़े अन्य घटक संगठनों ने तीनों कृषि विरोधी कानूनों को वापस लेने, सी-2 लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य देने का कानून बनाने, पेट्रोल-डीजल-गैस की कीमतों को आधा करने, मजदूर विरोधी श्रम संहिता को वापस लेने तथा बैंक-बीमा-कोयला-रेलवे जैसे देश के सार्वजनिक प्रतिष्ठानों के निजीकरण की मुहिम पर रोक लगाने की मांग पर भारत बंद का समर्थन करते हुए चक्का जाम किया और धरना देकर प्रदर्शन क़िया। आंदोलन की यह कार्यवाही प्रशासन द्वारा लगाई गई धारा 144 का उल्लंघन करते हुए आयोजित की गई।

  • छत्तीसगढ़ किसान आंदोलन के संयोजक सुदेश टीकम, आलोक शुक्ला, संजय पराते, नंद कश्यप, रमाकांत बंजारे ने IMNB NEWS AGENCY  बताया कि छत्तीसगढ़ किसान सभा के बैनर तले सैकड़ों किसानों ने आज कोरबा जिले के हरदी बाजार में किसान सभा नेता जवाहर कंवर, प्रशांत झा, मोहम्मद हुसैन, वीएम मनोहर, नंदलाल कंवर आदि के नेतृत्व में बिलासपुर-कोरबा मार्ग पर दो घंटे से ज्यादा समय तक चक्का जाम किया, जिसके कारण मुख्य मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गई। किसान सभा के राज्य अध्यक्ष संजय पराते भी यहां शामिल थे। सरगुजा और सूरजपुर में पांच स्थानों पर ऋषि गुप्ता, बालसिंह, कपिल पैकरा, कृष्ण कुमार लकड़ा व बिफन नागेश के नेतृत्व में धरना दिया गया और अडानी-अम्बानी-मोदी के पुतले जलाए गए।

राजनांदगांव में जिला किसान संघ के नेता सुदेश टीकम और सीटू नेता गजेंद्र झा के नेतृत्व में बंद कराने निकले मजदूर-किसानों के जत्थे को पुलिस ने रास्ते में ही रोक लिया। दुर्ग-बेमेतरा जिला किसान संघ के रमाकांत बंजारे के नेतृत्व में धमधा में सैकड़ों किसानों ने रैली निकालकर प्रदर्शन किया।

छत्तीसगढ़ किसान आंदोलन के नेताओं ने IMNB NEWS AGENCY  से कहा है कि हमारे देश के किसान न केवल अपने जीवन-अस्तित्व और खेती-किसानी को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं, बल्कि वे देश की खाद्यान्न सुरक्षा, सार्वजनिक वितरण प्रणाली तथा संप्रभुता की रक्षा के लिए भी लड़ रहे हैं। उनका संघर्ष उस समूची अर्थव्यवस्था के कारपोरेटीकरण के खिलाफ भी हैं, जो नागरिकों के अधिकारों और उनकी आजीविका को तबाह कर देगा।

इसलिए देश का किसान आंदोलन इन काले कानूनों की वापसी के लिए खंदक की लड़ाई लड़ रहा है और अपनी अटूट एकता के बल पर इस आंदोलन को तोड़ने की सरकार की साजिशों को मात दे रहा है। उन्होंने बताया कि इस देशव्यापी आंदोलन को तेज करने के लिए पूरे प्रदेश में विभिन्न स्थानों पर किसान पंचायतें आयोजित करने का सिलसिला भी शुरू हो गया है। IMNB NEWS AGENCY को किसान नेताओं ने बताया कि इस आंदोलन के अगले चरण में 28 मार्च को तीनों किसान विरोधी कानूनों और मजदूर विरोधी श्रम संहिता की होली जलाई जाएगी।

 

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