पुलिस हिरासत में आदिवासी युवती पांडे कवासी की मौत पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को अमित जोगी की खुली चिठ्‌ठी पूछा 13 सवाल, जवाब दे भूपेश सरकार

नक्सल प्रभावित बस्तर में एक बार फिर एक आदिवासी युवती की संदिग्ध परिस्थियों में मौत ने सरकार और पुलिस प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। आप और भाजपा के बाद प्रदेश की तीसरी विपक्षी दल के प्रमुख अमित जोगी ने इस मामले में सवाल खड़ा करते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को कटघरे में खड़ा कर दिया है। बहारहाल सु श्री पांडे कवासी का मामला गरमाने लगा है। भाजपा सरकार की तरह सलवा जुड़ूम तो नहीं लेकिन बदले हुए नाम और तौर तरीके से सलवा जूडम टाईप कोई दूसरा अभियान भूपेश सरकार ने भी छेड़ रखा है। जिसकी देर सबेर पोल खुलने वाली है। वहीं सर्व आदिवासी समाज पहले ही सरकार के कामकाज से खुश नजर नहीं आ र ही है। खासतौर से बस्तर में जहां आदिवासी समाज के ऊपर से सकंट के बदल छटने के बजाए गहराते जा रहे हैं। राज्य में सत्ता परिवर्तन के साथ ही आदिवासी समाज की समस्याओं के कम होने के दावे भी किए जाते रहे हैं। लेकिन जिस बस्तर ने कांग्रेस को सरकार दी है उसी बस्तर में आदिवासी नाराज नजर आ रहे हैं।
प्रति,
माननीय मुख्यमंत्री
छत्तीसगढ़ शासन
संदर्भ: पांडे कवासी की पुलिस हिरासत में मौत से सम्बंधित 13 प्रश्नों की जानकारी देने बाबत।
माननीय मुख्यमंत्री महोदय,
A. यह निर्विवादित है कि 23 फ़रवरी को दंतेवाड़ा जिला के कारली-स्थित पुलिस मेस में बस्तर की बेटी सुश्री पांडे कवासी की मृत्यु हो गई, जिसकी सूचना मृतिका के परिजनों को रात 7 बजे दी गई थी। सरकार के अनुसार सुश्री पांडे कवासी ने ‘लोन-वर्राटू’ अभियान के अंतर्गत 19 फ़रवरी को आत्मसमर्पण किया था जबकि मृतिका के परिजनों का कहना है कि वो नक्सली नहीं बल्कि निर्दोष थी।
B. इस सम्बंध में मृतिका के परिजनों के साथ-साथ प्रदेश की जनता आपकी सरकार से इन 11 प्रश्नों का जवाब जानना चाहती है जो अभी तक उन्हें नहीं मिले हैं।
(1) मृतिका के गले पर कोई निशान क्यों नहीं थे?
(2) मृतिका की आँखों क्यों नहीं पलटी थी?
(3) मृतिका की जीब क्यों नहीं बाहर आई थी?
(4) मृतिका के गुप्त-अंगों में सूजन क्यों थी?
(5) जब परिजन कारली में मौजूद थे, तो उनकी मौजूदगी में घटना-स्थल का नक़्शा, ज़ब्ती और मर्ग रिपोर्ट का पंचनामा क्यों नहीं तैयार किया गया?
(6) सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों को ताक में रखकर मृतिका के शव का पोस्ट-मोर्टेम (PM) रात के अंधेरे में को क्यों कराया गया?
(7) रात को PM कराने की विशेष अनुमति किसने और किन कारणों से दी?
(8) सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार पुलिस हिरासत में मौत के तत्काल बाद न्यायिक जाँच दल का गठन क्यों नहीं किया गया?
(9) मृत्यु के 15 दिन बाद भी जाँच दल की रिपोर्ट क्यों नहीं सार्वजनिक की गई?
(10) 8 मार्च को मृतिका के परिजनों को क्यों उनके गुड़से-स्थित घर में नज़रबंद रखा गया?
(11) 8 मार्च को क्यों बस्तर के कोने-कोने से चलकर समेली आ रही माताओं, बहनों और बेटियों को   बलपूर्वक रोका गया?
(12) मृतिका के 19 फ़रवरी के तथाकथित आत्मसमर्पण के बाद उसको उसकी इच्छा के विरुद्ध 23 फ़रवरी तक पुलिस अभिरक्षा में किस वैधानिक आधार पर रखा गया?
(13) तथाकथित आत्मसमर्पण के 5 दिनों बाद भी मृतिका को उसके परिजनों से क्यों नहीं मिलने दिया गया?
C. इन प्रश्नों का उत्तर माँगने के लिए ‘अंतराष्ट्रीय महिला दिवस’ 8 मार्च से बस्तर के कोने-कोने से बड़ी संख्या में माताएँ, बहनें और बेटियाँ दंतेवाड़ा के कोआकोंडा के समेली गाँव में सरकार के रोकने के भरसक प्रयासों से बावजूद एकत्रित हो रही हैं। उनका दृढ़संकल्प है कि जब तक उनको इन 11 प्रश्नों का उत्तर नहीं मिल जाता, वे वहीं डटीं रहेंगी।
D. मुझे उम्मीद थी कि अपनी पार्टी के विधायक दल के माध्यम से इस विधान सभा सत्र के दौरान उनको सार्थक जवाब मिल जाता किंतु 15 दिन पूर्व सत्रावसान होने के कारण ऐसा नहीं हो पाया।
E. अतः मेरा आपसे विनम्र आग्रह है कि न्याय-हित और प्रशासनिक-पारदर्शिता के आधार पर आप इस अत्यंत ही संवेदनशील विषय में अब तक प्राप्त समस्त जानकारी सार्वजनिक करने के निर्देश पारित करने की असीम कृपा करेंगे ताकि प्रदेश के जनमानस में इस घटना से उत्पन्न हो रहे व्यापक रोष को शांत किया जा सके।
सादर,
भवदीय,
(अमित अजीत जोगी)
अध्यक्ष- जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे)

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