जनसपंर्क के सहायक संचालक डॉक्टर छेदी लाल तिवारी का निधन, जनसपंर्क में चालक के पद से अफसर बनने तक का सफर

छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग के सहायक संचालक डॉ छेदीलाल तिवारी हमारे बीच नहीं रहे, उनका बीती रात रायपुर के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। डॉ तिवारी कोरोना से हारने वालों में से नहीं थे, उनकी मौत का जिम्मेदार सुयश हॉस्पिटल की अव्यवस्था है। करीबी सूत्रों के मुताबिक उनके सिर में चोट लगी है और खून निकल रहा था, जबकि वे एक हफ्ते से अधिक समय से आईसीयू में थे। उनकी इस तरह मौत यह सवाल खड़े करती है कि कोरोना के इलाज के नाम पर आखिर हो क्या रहा है, लूट के अड्डे बन गए हैं अस्पताल। मरीज एक बार भर्ती हो गया फिर परिवार वालों को कुछ भी जानकारी नहीं दी जाती, केवल पैसों की मांग के अलावा। सरकार से अपेक्षा है कि ऐसे मामलों की जांच कर कड़ी कार्रवाई की जाए।

डॉ तिवारी एक जीवट व्यक्ति थे, अनेक चुनौतियों और संघर्षों के सामना करते हुए आगे बढ़े थे। उन्होंने अविभाजित मध्य प्रदेश के जनसम्पर्क विभाग में ऑटो चालक के रूप में नौकरी की शुरुआत की। उस ऑटो से वे डाक बांटा करते थे। लेकिन उन्होंने यह नौकरी करते हुए अपनी आगे की पढ़ाई जारी रखी। राजनीति विज्ञान में मास्टर डिग्री ली। तबतक विभाग ने उन्हें कार चालक बना दिया। इसके बाद छेदीलाल तिवारी ने पीएचडी की। उनके पीएचडी का विषय था ‘मध्य प्रदेश शासन में जनसम्पर्क की भूमिका’। पीएचडी करने के बाद साहब का ड्राइवर डॉक्टर हो गया। इसकी चर्चा खूब हुई, इंडिया टुडे जैसी प्रतिष्ठित पत्रिका ने इसे खबर बनाया। यह खबर सूबे के तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को भी मिली। इसके कुछ समय बाद दिग्विजय सरकार की कैबिनेट ने एक प्रस्ताव पारित कर डॉ छेदीलाल तिवारी को सूचना सहायक बना दिया। और फिर धीरे धीरे डॉ तिवारी अपनी काबिलियत के बल पर आगे बढ़ते रहे।

डॉ तिवारी का पूरा जीवन प्रेरणा देने वाला है।

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