डंकल प्रस्ताव का समर्थन करते समय कांग्रेस को किसानों की चिंता क्यों नहीं हुई – अशोक बजाज


रायपुर । जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष अशोक बजाज ने कृषि संशोधन बिल का विरोध करने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि कांग्रेस नहीं चाहती कि किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो इसीलिए किसानों को भ्रमित कर रही है  उन्होंने कहा कि 1995 में डंकल प्रस्ताव का समर्थन करने वाली कांग्रेस आज किस मुह से कृषि बिल का विरोध कर रही है। श्री बजाज ने कहा कि डंकल प्रस्ताव को प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के कार्यकाल में मंजूर किया गया तथा डॉ मनमोहन सिंह के कार्यकाल में लागू किया गया। उन्होंने कहा कि डंकल प्रस्ताव के कारण भारत की कृषि में बहुराष्ट्रीय कंपनियों का दखल बढ़ गया है, यह सब अंतर्राष्ट्रीय व्यापार समझौते के अंतर्गत हो रहा है, जिसका प्रस्ताव आर्थर डंकल ने तैयार किया था.  इस प्रस्ताव का कांग्रेस ने ना केवल समर्थन किया बल्कि अपने शासनकाल में लागू भी किया। इस समझौते में हस्ताक्षर करने के पूर्व तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने ना ही संसद में पर्याप्त बहस करवाई और ना ही किसान प्रतिनिधियों या किसान संगठनों से कोई चर्चा की। उन्होंने कहा कि डंकल प्रस्ताव में विदेशी कंपनियों को बीजों के पेटेंट का भी अधिकार दिया गया है। बहुराष्ट्रीय कंपनियां बीजों की आपूर्ति में एकाधिकार रखना चाहती हैं तथा भारत के किसानों द्वारा परंपरागत ढंग से तैयार किये गए बीजों के बजाए हाइब्रिड बीजों पर किसानों को निर्भर करना चाहती हैं. पिछली कांग्रेस सरकारों की अदूरदर्शिता निर्णय से आज देश में हाइब्रिड बीजों का चलन बढ़ गया है, सरकार ने इस वर्ष भूरा माहो निरोधक बीज के नाम पर किसानों को प्रदान किया है उसमें अभी से भूरा माहो का प्रकोप हो गया है, इसी प्रकार सरकारी आपूर्ति के एक ही किस्म के धान के बीजों में अर्ली वेरायटी और लेट वेरायटी के बीजों का मिश्रण है, नतीजा यह हुआ कि खेत के आधे धान के पौधों में बालियां आ गई है शेष में एक महीने बाद बालियां आएगी, इस हालत में किसान धान की कटाई कैसे कर सकता है.
श्री बजाज ने कहा कि जब मोदी सरकार किसानों की दशा को सुधारने के लिए ‘एक राष्ट्र एक बाजार’ के प्रावधान को लागू कर रही है तब कांग्रेस किसान हितैषी होने का ढोंग करते हुए विरोध कर रही है। जबकि कृषक उपज व्यापार व वाणिज्य संवर्धन और सुविधा बिल 2020 के प्रभावशील होने से किसान अपनी उपज के दाम खुद ही तय करने के लिए स्वतंत्र होंगें, उन्हें अपनी उपज सरकारी मंडियों में बेचने की बाध्यता खत्म होगी और वे अपनी उपज देश में कहीं भी, किसी को भी बेच पाएंगे। उन्मुक्त बाजार व्यवस्था से किसान अपनी उपज वहीं बेचेगा जहां उन्हें लाभप्रद मूल्य मिलेगा। श्री बजाज ने कहा कि केंद्र सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कृषि उपज की खरीदी की वर्तमान व्यवस्था को यथावत रखते हुए उन्हें केवल मंडियों में ही बेचने की बाध्यता से मुक्त किया गया है।

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