बलरामपुर

लॉक डाउन,सरगुजा आईजी डांगी ने NEET/IIT-JEE की तैयारी कर रहे छात्रों का बढ़ाया हौसला
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लॉक डाउन,सरगुजा आईजी डांगी ने NEET/IIT-JEE की तैयारी कर रहे छात्रों का बढ़ाया हौसला

 *NEET/IIT-JEE की तैयारी कर रहे मेरे प्यारे युवा साथियों* ,                                                           आप सब यह सोचते होंंगे कि यदि यह कोरोना न होता तो लाकडाउन नहीं होता और आपकी परीक्षा भी समय पर ही हो जाती।ऐसा सोचकर आप मे से बहुत लोग व्यथित हो जाते होगें जो कि स्वाभाविक है। *लेकिन साथियों आप इसको सकारात्मक रूप मे लीजिए* ।क्योंकि कि इससे आपको तैयारी करने का अतिरिक्त समय भी तो मिल गया है।इसका सदुपयोग और अच्छे से कर सकते हो।जिससे आपका चयन पक्का हो जाएगा।अभी एक्जाम की डेट की घोषणा नहीं हुई है ।आप अपनी तैयारी की गति को बिल्कुल भी कम मत कर देना, बल्कि बढ़ा दीजिए। *आपको तनाव मे आने की जरूरत नहीं है* ।परीक्षा की तिथि सबके लिए बढ़ी है केवल आपके लिए नहीं। *बल्कि सकारात्मक सोचो की आपको और समय मिल गया है* । इस समय का सदुपयोग *आप अपने पहले बनाए गए नोट्स से रिवीजन करने मे कीजिए* । *मॉ...
भूख के विरुद्ध, भात के लिये किसान सभा के देशव्यापी आह्वान पर सैकड़ों गांवों में ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन
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भूख के विरुद्ध, भात के लिये किसान सभा के देशव्यापी आह्वान पर सैकड़ों गांवों में ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन

कोरोना महामारी और अनियोजित लॉक डाउन के कारण किसानों, ग्रामीण गरीबों, दिहाड़ी और प्रवासी मजदूरों तथा आदिवासियों के समक्ष उत्पन्न समस्याओं को हल करने के लिए केंद्र सरकार की उदासीनता के खिलाफ अखिल भारतीय किसान सभा के देशव्यापी आह्वान पर आज छत्तीसगढ़ में भी सैकड़ों गांवों में प्रदर्शन किए गए। छत्तीसगढ़ किसान सभा द्वारा इस आंदोलन को *भूख के विरूद्ध, भात के लिए* नाम दिया गया था। इसी प्रकार के विरोध-प्रदर्शनों का आह्वान आदिवासी एकता महासभा, सीटू, जनवादी महिला समिति और जनवादी नौजवान सभा आदि जन संगठनों के द्वारा भी किया गया था, जिसके चलते यह आंदोलन गांवों से बाहर निकलकर शहरों की झुग्गी-बस्तियों और खदानों के गेटों तक पहुंच गया और कई जगहों पर छात्रों और युवाओं ने भी बड़ी संख्या में हिस्सेदारी की। यह जानकारी छत्तीसगढ़ किसान सभा के *राज्य अध्यक्ष संजय पराते और महासचिव ऋषि गुप्ता* ने आज यहां दी। उन्होंने ब...
आदिवासियों क्षेत्रो में सड़ा चावल का वितरण,माकपा ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, कहा — लॉक-डाउन से पैदा जनसमस्याओं का करें निराकरण
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आदिवासियों क्षेत्रो में सड़ा चावल का वितरण,माकपा ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, कहा — लॉक-डाउन से पैदा जनसमस्याओं का करें निराकरण

*मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी* ने आज मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर प्रदेश में बढ़ती कोरोना महामारी के मद्देनजर प्रदेश में स्वास्थ्य उपकरणों की कमी को दूर करने, बिलासपुर आईजी द्वारा गैर-सरकारी संगठनों और व्यक्तियों द्वारा चलाये जा रहे राहत कार्यों पर रोक का आदेश निरस्त करने, राशन दुकानों, मध्यान्ह भोजन व आंगनबाड़ियों के जरिये खाद्य वितरण में हो रही धांधली को रोकने, कृषि कार्यों को मनरेगा के दायरे में लाने और रबी फसल को सोसाइटियों द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने तथा आवश्यकता पड़ने पर सर्वदलीय बैठक बुलाने का सुझाव दिया है.Y *माकपा राज्य सचिव संजय पराते* ने संदिग्ध कोरोना मरीजों के जांच और ईलाज के लिए आवश्यक किटों और वेंटीलेटर्स तथा चिकित्सकों व स्वास्थ्य कर्मियों के लिए पीपीई, मास्क व दस्तानों की कमी की ओर मुख्यमंत्री का ध्यान आकर्षित करते हुए केंद्र से इनकी आपूर्ति सुनिश्चित कराने और ...
शराब दुकान खोलने पर माकपा ने पूछा — भूपेश सरकार की प्राथमिकता क्या है : कोरोना या मोरोना
कवर्धा, कांकेर, कोंडागांव, कोरबा, कोरिया, खास खबर, गरियाबंद, छत्तीसगढ़ प्रदेश, जगदलपुर, जशपुर, जांजगीर – चाम्पा, दंतेवाड़ा, दुर्ग, धमतरी, नारायणपुर, बलरामपुर, बलोदा बाज़ार, बालोद, बिलासपुर, बेमेतरा, महासमुंद, मुंगेली, राजनांदगांव, रायगढ़, रायपुर, सरगुजा-अंबिकापुर

शराब दुकान खोलने पर माकपा ने पूछा — भूपेश सरकार की प्राथमिकता क्या है : कोरोना या मोरोना

  *मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी* ने कोरोना महामारी के मद्देनजर लॉक डाऊन के दौरान शराब दुकानें खोले जाने के राज्य सरकार के फैसले की तीखी निंदा की है और पूछा है कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि उसकी प्राथमिकता क्या है : कोरोना या मोरोना? पार्टी ने कहा है कि आम जनता की जिंदगी की कीमत पर मुनाफा कमाने की सरकार को इजाजत नहीं दी जा सकती। आज यहां जारी एक बयान में माकपा राज्य सचिव मंडल ने कहा है कि लॉक डाऊन के दौरान प्रदेश की 80% आबादी के सामने आजीविका बर्बाद होने के कारण रोजी-रोटी की समस्या आ खड़ी हुई है। अभी तक सरकार ने दो माह के मुफ्त अनाज की घोषणा के अलावा आम जनता को राहत देने के कोई भी कदम नहीं उठाए हैं। मुफ्त राशन वितरण में भी आदिवासी अंचलों में भारी गड़बड़ियां होने की शिकायतें सामने आ रही है। लॉक डाऊन के दौरान सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर तबकों और बेसहारा लोगों के लिए भोजन की व...