किसान विरोधी कानूनों की वापसी की मांग : 14 दिसम्बर को होंगे पूरे प्रदेश में आंदोलन, जिओ, अडानी-अंबानी के बहिष्कार की अपील — छत्तीसगढ़ किसान आंदोलन

प्रदेश में 21 किसान संगठनों के साझे मोर्चे छत्तीसगढ़ किसान आंदोलन ने आम जनता से जिओ उत्पादों, अम्बानी-अडानी के मॉल्स और पेट्रोल पम्पों का बहिष्कार की अपील की है और किसान विरोधी काले कानूनों की वापसी की मांग करते हुए पूरे प्रदेश में 14 दिसम्बर को जन आंदोलन की घोषणा की है।किसान आंदोलन के घटक संगठन इस दिन चक्का जाम, मोदी-अडानी-अंबानी का पुतला दहन, कृषि कानूनों की प्रतियां जलाने, भाजपा विधायकों और सांसदों के निवास/कार्यालयों पर प्रदर्शन और आमसभा आदि के कार्यक्रम आयोजित करेंगे और इसमें किसानों व ग्रामीणजनों के साथ ही समाज के दूसरे तबकों, मजदूरों व बुद्धिजीवियों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी। माकपा सहित सभी वामपंथी पार्टियों ने भी इस आंदोलन को अपना समर्थन देने की घोषणा कर दी है।

छत्तीसगढ़ किसान आंदोलन के संयोजक सुदेश टीकम व संयोजक मंडल सदस्य संजय पराते, आलोक शुक्ला, आनंद मिश्रा, नंद कुमार कश्यप आदि ने यह जानकारी देते हुए बताया कि अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति और संयुक्त किसान मोर्चा के देशव्यापी आह्वान पर छत्तीसगढ़ में भी किसानों की विरोध कार्यवाहियां आयोजित की जाएगी। 14 दिसम्बर को “दिल्ली चलो” का आह्वान किया गया है और एक ओर जहां उत्तर भारत के किसान लाखों की संख्या में सीमाओं पर इकट्ठा होंगे और 12 दिसम्बर से ही दिल्ली-जयपुर हाईवे जाम कर दिया जाएगा, वहीं दूसरी ओर पूरे देश में बड़ी लामबंदी के साथ किसानों के व्यापक और प्रभावशाली प्रदर्शन भी होंगे।

किसान आंदोलन के नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्यों का विषय होने के बावजूद केंद्र सरकार द्वारा ये कानून धोखे और गलत तरीके से पारित किए गए हैं, इसके बावजूद मोदी सरकार अडानी और अंबानी के दबाव में अपने किसान विरोधी कानूनों को वापस नहीं लेना चाहती, क्योंकि इसमें इन पूंजीपतियों के हित छुपा हुआ है। उन्होंने कहा कि अडानी द्वारा भाजपा शासित हरियाणा के पानीपत जिला के इसराना तहसील के गांव नौल्था व जोनधन कलां, गोहाना के गांव मुंडलाना व कैथल में, सोनीपत जिले के मोड़लाना गांव में सैकड़ों एकड़ जमीन पर निजी मंडियां और भंडारण गृह बनाने की बात अब सार्वजनिक है। ये सभी निर्माण विशेष आर्थिक क्षेत्र बनाकर किये जा रहे हैं, जहां केंद्र और राज्य सरकार के कोई कानून लागू नहीं होंगे। इसी प्रकार, 2019 में अंबानी के रिलायंस समूह का ‘जियो मार्ट’ लांच होने के बाद अब 30 लाख किराना दुकानों को इसके शॉपिंग पोर्टल से जोड़ा जा रहा है। इससे साफ है कि ये कानून कार्पोरेट लूट को वैधता प्रदान करने के लिए ही बनाये गए हैं। इसलिए इन किसान विरोधी कानूनों के खिलाफ संघर्ष के क्रम में किसान संघर्ष समन्वय समिति और छत्तीसगढ़ किसान आंदोलन ने जिओ उत्पादों, अम्बानी-अडानी के मॉल्स और पेट्रोल पम्पों के बहिष्कार की भी अपील आम जनता से की है।

छत्तीसगढ़ किसान आंदोलन के नेताओं ने कहा है कि यदि मोदी सरकार इन किसान विरोधी कानूनों को वापस नहीं लेती, तो किसान संगठन भी अपना आंदोलन वापस नहीं लेंगे और कॉर्पोरेटपरस्त मोदी सरकार के खिलाफ संघर्ष और तेज किया जाएगा।

*(छत्तीसगढ़ किसान आन्दोलन की ओर से सुदेश टीकम, संजय पराते (मो : 094242-31650), आलोक शुक्ला, विजय भाई, रमाकांत बंजारे, नंदकुमार कश्यप, आनंद मिश्रा, जिला किसान संघ (राजनांदगांव), छत्तीसगढ़ किसान सभा, हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति (कोरबा, सरगुजा), किसान संघर्ष समिति (कुरूद), आदिवासी महासभा (बस्तर), दलित-आदिवासी मजदूर संगठन (रायगढ़), दलित-आदिवासी मंच (सोनाखान), भारत जन आन्दोलन, गाँव गणराज्य अभियान (सरगुजा), आदिवासी जन वन अधिकार मंच (कांकेर), पेंड्रावन जलाशय बचाओ किसान संघर्ष समिति (बंगोली, रायपुर), उद्योग प्रभावित किसान संघ (बलौदाबाजार), रिछारिया केम्पेन, आदिवासी एकता महासभा (आदिवासी अधिकार राष्ट्रीय मंच), छत्तीसगढ़ प्रदेश किसान सभा, छत्तीसगढ़ किसान महासभा, परलकोट किसान कल्याण संघ, अखिल भारतीय किसान-खेत मजदूर संगठन, वनाधिकार संघर्ष समिति (धमतरी), आंचलिक किसान संघ (सरिया) आदि संगठनों की ओर से जारी संयुक्त विज्ञप्ति)*

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