पंजाब-राजस्थान में थमी नहीं कलह, अब बिहार कांग्रेस में भी शुरू हुआ पंगा

नई दिल्ली (IMNB). पंजाब कांग्रेस में कलह अभी थमी भी नहीं कि कांग्रेस की बिहार यूनिट आंतरिक दरार से जूझने लगी है। बिहार में पिछले विधानसभा चुनाव में बेहद खराब प्रदर्शन करने वाली कांग्रेस अब राज्य में अपने लिए नए प्रदेशाध्यक्ष की तलाश कर रही है। बताया गया है कि इसके लिए ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) के बिहार प्रभारी भक्त चरण दास ने विधायक और दलित नेता राजेश कुमार राम का नाम आगे बढ़ाया था। लेकिन उनके नाम को लेकर विवाद हो गया। दरअसल, बिहार के कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने मदन मोहन झा की जगह पर दलित नेता राजेश कुमार राम को नया पीसीसी प्रमुख बनाने के प्रस्ताव का विरोध किया है। उनका कहना है कि नया प्रमुख ऊंची जाति से होना चाहिए।
कांग्रेस विधायकों को पकड़ने की फिराक में जदयु
ऐसे में बिहार में उभरा ये विवाद पंजाब से भी बड़ा हो सकता है। दरअसल, नीतीश कुमार की जदयू पहले ही कांग्रेस के नाराज विधायकों पर करीबी नजर रख रही है। ऐसे में कांग्रेस सावधानी से चल रही है और विरोध करने वाले उन नेताओं के साथ शांति वार्ता की कोशिश कर रही है, जिन्होंने दास के प्रस्ताव के खिलाफ एआईसीसी महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल से भी शिकायत की है। कांग्रेस अपनी सूझबूझ से नाराज नेताओं को मनाने के लिए अलग-अलग योजनाओं पर विचार कर रही है।
राजेश कुमार राम के नाम पर विरोध क्यों?
बता दें कि हालांकि, कांग्रेस विधायक राम के समर्थक, उनकी साख की कसमें खाते हैं लेकिन राम को लेकर प्रस्ताव का विरोध करने वालों को दो आपत्तियां हैं। उन्होंने दावा किया कि दास, एक पूर्व समाजवादी हैं, जो कुछ साल पहले कांग्रेस में शामिल हुए थे और कांग्रेस को बाहरी लोगों की तरह ही जानते हैं। दूसरा यह कि बिहार कांग्रेस के पास उच्च जाति के आधार के कुछ ही हिस्से बचे है, जो इस तरह खत्म हो जाएंगे। उन्होंने तर्क दिया कि चूंकि ओबीसी, दलितों, मुसलमानों के प्रमुख वर्गों ने पहले ही बिहार कांग्रेस को छोड़ दिया था, इसलिए पिछड़े समुदाय से पीसीसी प्रमुख की नियुक्ति करके एक्सपेरिमेंट करना बेकार है।

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