बस्तर में चली आंधी कवासी लखमा बने गांधी

सुरज दुल्हानी
जगदलपुर। बस्तर में कवासी लखमा ने कांग्रेस को विजय श्री दिलाकर कवासी लखमा जी का कद बढ़ गया है। अब कवासी लखमा जी बस्तर के गांधी बन गए है। कवासी लखमा जी का दबदबा बना हुआ है। छत्तीसगढ़ के दुर्गम क्षेत्र में सरपंच से मंत्री तक का मुकाम तय करने वाले संघर्षशील जननेता का नाम है कवासी लखमा। संघर्ष के रास्ते पर कवासी लखमा का यह सुहाना सफर एक नजीर है कि उपेक्षित, वंचित, शोषित पीडि़त रहे इलाके का कोई जीवट वाला शख्स किस तरह जानता के विश्वास की धारा में कहां से कहां तक पहुंच सकता है। कवासी लखमा सर्व धर्म सर्व क्षेत्र समभाव के प्रतीक के रूप में पहचाने जाते हैं। बस्तर की मिठास उनकी वाणी से छलकती है और बस्तर का स्वाभिमान उनके चेहरे पर झलकता है। कवासी लखमा का निक नेम दादी है और कोंटा विधानसभा इस नाम से न केवल बस्तर में से बल्कि राजधानी रायपुर में भी प्यारे विधायक हैं। वे ऐसे पुकारे जाते हैं। दादी नाम से पांचवी पुकार सुनने पर कवासी का विधायक के रूप रिस्पांस भी उतना ही जबरदस्त होता है और वो पूरी उन्मुक्तता से लोगों से मिलते हैं। राजनीति और शासन- प्रशासन के संबंध में अपने जुझारूपन से जो विशेषज्ञता हासिल कर ली है, वह काबिले तारीफ है। भूपेश सरकार में वस्तर से एक मात्र विधायक को मंत्रिमंडल में स्थान मिला है और वो नाम कवासी लखमा का है। भूपेश कैबिनेट में छत्तीसगढ़ के सियासत में वो नाम उन्हें उद्योग एवं आबकारी मंत्री की हैसियत दी गई है। उन्हें पांच बार निर्वाचित निर्वाचित हुए हैं। उनका जन्म सन् 1953 में ग्राम-नागारास, जिला-सुकमा में एक सामान्य आदिवासी परिवार में हुआ था। उसी लोकप्रियता के चलते अनेक बार विधायक निर्वाचित हुए। वे पांचवी बार बार विधायक के रूप में निर्वाचित हुए है। लेकिन बचपन से ही सामाजिक तौर पर वे बेहद सक्रिय थे। कवासी लखमा के सार्वजनिक जीवन की शुरूआत सरपंच पद से हुई थी।  सबसे पहले अविभाजित मध्यप्रदेश में वर्ष 1998 में कांग्रेस ने उन्हें कोंटा से टिकट दिया और उनके बाद 2008, 2013 और वर्तमान में वर्ष 2018 में पांचवी बार विधायक के रूप में निर्वाचित हुए  है। विधानसभा में वे एक मुखर वक्ता के रूप में जाने जाते हैं। विधानसभा के याचिका समिति, पुरस्कार से भी प्रत्यायुक्त विधान समिति में सदस्य नवाजा गया था। बनाये किए गए थे। साथ ही राज्य बस यहीं से नागरिक आपूर्ति निगम में संचालक कवासी लखमा के के दायित्व पर भी थे। कवासी राजनीतिक जीवन लखमा वर्ष 2002 में जिला को उड़ान मिलनी सहकारी एवं ग्रामीण विकास बैंक शुरु हुई और वे जगदलपुर में अध्यक्ष नियुक्त किये गए। वर्ष 2004 में छत्तीसगढ़ विधानसभा के सहकारी उपक्रम संबंधी समिति, याचिका समिति के सदस्य और वर्ष 2009 में गैर सरकारी सदस्यों को विधेयकों तथा संकल्प समिति के सदस्य थे। आबकारी मंत्री कवासी लखमा आदिवासियों के कल्याण-उत्थान तथा सामाजिक एवं सांस्कृति क्षेत्र में निरंतर सक्रिय रहे हैं।

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