Sunday, July 21

सुपोषण की श्रेणी में लाने बच्चों को दें पौष्टिक भोजन – कलेक्टर

– कलेक्टर जिले में चले रहे पोट्ठ लईका अभियान के अंतर्गत ग्राम अर्जुनी, अमलीडीह और करेठी में पालक चौपाल कार्यक्रम में हुए शामिल
– सुपोषित बच्चों की माताओं को श्रीफल देकर किया सम्मानित
– कलेक्टर ने गांव के सभी बच्चों, गर्भवती माताओं, शिशुवती माताओं, किशोरी बालिकाओं और सभी ग्रामवासियों को स्वस्थ और सुपोषित रखने तथा सुपोषण ग्राम निर्माण के लिए दिलाया संकल्प
– आंगनबाड़ी केन्द्रों, स्कूल परिसर एवं घर की बाड़ी में मुनगा, नीबू, आंवला, पपीता, केला एवं फलदार पौधे लगाने कहा
राजनांदगांव 21 जून 2024। कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल जिले में चले रहे पोट्ठ लईका अभियान के अंतर्गत पालक चौपाल कार्यक्रम में ग्राम अर्जुनी, अमलीडीह और करेठी के आंगनबाड़ी केन्द्र पहुंचे। इस अवसर पर सीईओ जिला पंचायत सुश्री सुरूचि सिंह उपस्थित थी। कलेक्टर श्री अग्रवाल ने कहा कि जिले में कुपोषण मुक्ति के लिए पो_ लईका विशेष अभियान प्रारंभ किया गया है। उन्होंने कहा कि कम वजन वाले बच्चों के वजन में वृद्धि कर सुपोषण श्रेणी में लाने के लिए यह अभियान चलाया जा रहा है। बच्चों के वजन में वृद्धि करने और सुपोषण की श्रेणी में लाने के लिए पोट्ठ लईका पहल अंतर्गत पालक चौपाल का प्रत्येक शुक्रवार को आयोजित किया जा रहा है। कलेक्टर श्री अग्रवाल ने पालक चौपाल में कुपोषित बच्चों के पालकों को स्वास्थ्य एवं पोषण के प्रति जागरूक किया। इस अवसर पर उन्होंने सुपोषित बच्चों की माताओं को श्रीफल देकर सम्मानित किया। उन्होंने बच्चों को आंगनबाड़ी केन्द्र नियमित भेजने के लिए कहा। उन्होंने पालक चौपाल में उपस्थित सभी को गांव के सभी बच्चों, गर्भवती माताओं, शिशुवती माताओं, किशोरी बालिकाओं और सभी ग्रामवासियों को स्वस्थ और सुपोषित रखने तथा सुपोषण ग्राम निर्माण के लिए संकल्प दिलाया। उन्होंने आंगनबाड़ी केन्द्रों एवं स्कूल परिसर में मुनगा, नीबू, आंवला, पपीता, केला एवं फलदार पौधे लगाने कहा। जिससे फल स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो जाएगा। उन्होंने इसके अलावा घरों की बाडिय़ों में भी फलदार पौधे लगाने कहा।
कलेक्टर श्री अग्रवाल ने पोट्ठ लईका पहल अंतर्गत पालक चौपाल में बच्चों के पालकों को बहुत ही सरल तरीके से अपने बच्चे को अच्छे खान-पान से बच्चों में वजन बढ़ाने के संबंध में जानकारी दी। इसके साथ ही स्वच्छता रखने के तरीके भी बताए। उन्होंने बच्चों के साथ-साथ शिशुवती माताओं, गर्भवती महिलाओं एवं किशोरी बालिकाओं को भी पौष्टिक भोजन और स्वच्छता रखने के तरीके बताएं। उन्होंने कहा कि कुपोषित बच्चों को सुपोषण की श्रेणी में लाने के लिए उचित खान-पान की जरूरत होती है। बच्चों को प्रोटीन, विटामिन, आयरन से भरपूर खाद्यान्न सामग्री सेवन कराना चाहिए। उन्होंने बच्चों को सुपोषण की श्रेणी में लाने के लिए पालकों को तरीके बताए। उन्होंने पालकों से कहा कि हमारे आस-पास बहुत सारी खाद्य साग्रमी होती है जो बहुत पौष्टिक और प्रोटीन युक्त होता है। जिसका सेवन अवश्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मौसमी फल सभी गांवों में मिलता है उसे खिलाना चाहिए। बच्चों को हरी सब्जी, दाल, भाजी, पपीता, केला जैसी खाद्य वस्तुओं को खिलाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों में खाने के लिए आदत डालना है। उन्होंने बच्चों के साथ गर्भवती महिलाओं एवं शिशुवती माताओं को पौष्टिक आहार सेवन करने की सलाह दी। जिससे उनका स्वास्थ्य अच्छा रहे। उन्होंने कहा कि बच्चों को थोड़ा-थोड़ा भोजन प्रत्येक 2-2 घंटे के अंतराल में देना चाहिए। बच्चों को दलिया, ओट्स खिलाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे घर के आस-पास सभी खाद्य वस्तुए मिल जाती हैं, इसका सेवन अवश्य कराना चाहिए। उन्होंने बच्चों को हरी सब्जी, दाल, सलाद, चावल, फल, पपीता, केला खिलाना है। उन्होंने बच्चों को तिरंगा भोजन देने कहा जिससे उन्हें पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन, ऊर्जा, विटामिन मिल सके।
कलेक्टर श्री अग्रवाल ने आंगनबाड़ी में बनाए गए पोषण रंगोली की प्रशंसा की। उन्होंने शिशुवती माताओं से कहा कि पोषण रंगोली में उपयोग किए गए खाद्य सामग्री सभी सुपोषण भोजन में आता है। इसका सेवन अवश्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी को स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना चाहिए। बच्चों खिलाने और स्वयं के खाने से पहले साबुन से हाथ अच्छे से धोना चाहिए। स्वच्छता का ध्यान रखेंगे तो बीमारी पास नहीं आएंगी। उन्होंने कहा कि घर का कचरा स्वच्छता दीदी को देना है। जिससे कचरा अच्छे से कम्पोस्ट किया जा सके। इससे गांव में गंदगी नहीं होगी और गांव स्वच्छ रहेगा। उन्होंने सुपोषित बच्चों के पालकों को अपने बच्चे के खान-पान में ध्यान रखने के लिए श्रीफल देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि जिस तरह से सुपोषित बच्चों के खान-पान में ध्यान रखा गया है, उसी तरह अन्य कम वजन वाले बच्चों के खान-पान में विशेष ध्यान देने के लिए पालकों को प्रोत्साहित किया।
सीईओ जिला पंचायत सुश्री सुरूचि सिंह ने तिरंगा भोजन के संबंध में उपस्थित शिशुवती माताओं, गर्भवती महिलाओं एवं किशोरी बालिकाओं को जानकारी दी। उन्होंने तिरंगा भोजन को बच्चों के लिए पौष्टिक आहार बताया। उन्होंने कहा कि तिरंगा भोजन में केशरी रंग वाले खाद्य पदार्थों में दाल, सोयाबीन, चना, मीट आता है। इससे प्रोटीन मिलता है, जो शरीर को मजबूत करता है। सफेद रंग वाले खाद्य पदार्थों में चावल, गेंहू, दूध, पनीर, अंडा को शामिल किया गया है, शरीर में ऊर्जा देता है और हरा रंग में हरी सब्जियों का सेवन करना चाहिए। उन्होंने तिरंगा भोजन को संतुलित सुपोषित भोजन बताया। उन्होंने शिशुवती माताओं, गर्भवती महिलाओं एवं किशोरी बालिकाओं को स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने कहा। उन्होंने उन्होंने महिलाओं और किशोरी बालिकाओं को प्रति शुक्रवार को अवश्य आंगनबाड़ी केन्द्र आने के लिए कहा। उन्होंने गांव के खाली स्थानों में पौधरोपण करने कहा। इस दौरान एसडीएम डोंगरगांव श्री मनोज मरकाम, कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास श्रीमती गुरूप्रीत कौर, सीईओ जनपद पंचायत श्री नवीन कुमार सहित अन्य अधिकारी एवं ग्रामीणजन उपस्थित थे।

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