अधर में लटककर रह गया है सरकारी विकास का दावा

किशोर कर ब्युरो चीफ महासमुंदकोई भी सरकार हो किसी की भी सरकार हो विकास  को लेकर लगातार घोषणाएं और दावे करते हैं और ग्रामीण विकास को ही पैमाना मान कर राज्य के और देश के आधारभूत विकास का मानक तैयार होता है लेकिन ग्रामीण इलाकों में विकास किस तरह से होता है इसका अंदाजा नहीं लगाया जाता और कागजों पर ही तमाम आंकड़े पेश कर दिया जाते हैं लिहाजा ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाला विकास आधा अधूरा ही रह जाता है ऐसा ही मामला महासमुंद जिले में सामने आया है जहां के सुदूरवर्ती ग्राम घुचापाली में पिछले 12- 15 वर्षों से निर्माणाधीन स्कूल भवन का काम अधूरा पड़ा हुआ है । सरकारें बदल गई अधिकारी बदल गए नियम कायदे भी बदल चुके हैं लेकिन स्कूल आज भी जस के तस अधूरा पड़ा हुआ है और किसी ने भी इस शाला भवन की ओर ध्यान देने की जहमत नहीं उठाई । ऐसे में विकास के तमाम दावे इस तरह के अधूरे निर्माण फेल करते नजर आ रहे हैं । घुचापाली गांव में राजीव गांधी शिक्षा मिशन योजना के तहत शाला भवन का निर्माण कराया जा रहा था लेकिन शाला भवन निर्माण की नींव रखने के बाद भवन को अधूरा छोड़ दिया गया भवन किन कारणों से अधूरा छोड़ दिया गया यह कोई भी बताने को तैयार नहीं है। हालांकि ग्रामीणों की मानें तो भवन निर्माण की जो योजना पहले चल रही थी वह अब बदल चुकी है लिहाजा फंड के अभाव में भवन निर्माण का काम अधूरा ही छोड़ दिया गया है मजेदार बात यह है कि शाला भवन के नहीं बन पाने से गांव के छोटे छोटे नौनिहालों को एक कमरे में बैठा कर अध्ययन अध्यापन का कार्य कराया जाता है . गांव के सरपंच प्रतिनिधि संजय कुमार प्रधान से जब इस मामले को लेकर चर्चा की गई तब उनका साफ तौर पर कहना था कि यह कई वर्षो से इसी तरह अधूरा पड़ा हुआ है और कोई भी ध्यान नहीं दे रहा है ठंड नहीं है लिहाजा पंचायत की ओर से भी निर्माण कार्य को पूरा नहीं कराया जा पा रहा है ऐसे में गांव का विकास किस तरह से होगा या प्रश्न खड़ा हो गया है गौरतलब है कि सरकार द्वारा दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में और बना जल क्षेत्रों में स्थित गांवों में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए अनेक तरह की योजनाएं संचालित की जाती हैं जिसमें से एक प्रमुख योजना राजीव गांधी शिक्षा मिशन द्वारा भी चलाया जा रहा था लेकिन ऐसे योजनाएं आधे अधूरे निर्माण से ही अधर में लटक गई हैं लिहाजा स्कूल भवन का निर्माण पूरा नहीं होने से यह गांव आज भी शिक्षा के क्षेत्र में अपना रोना रो रहा है।

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