हाईकोर्ट से मिली चिकित्सा छात्र को आयुष विश्वविद्यालय की परीक्षा में शामिल होने की राहत 0 युवा अधिवक्ता अक्षरा अमित ने की प्रार्थी छात्र की पैरवी 

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक चिकित्सा विद्यार्थी को  राहत प्रदान करते हुए आयुष विश्वविद्यालय को आदेश दिया है कि प्रार्थी को एमबीबीएस अंतिम वर्ष की परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए आवेदन करने की इजाजत दे तथा उसे परीक्षा में बैठने दिया जाए  प्रार्थी अविनाश देशलहरा की ओर से अधिवक्ता अक्षरा अमित एवं प्रतिवादी राज्य की ओर से उप महाधिवक्ता मतीन सिद्दीकी, गुरु घासीदास विश्वविद्यालय की ओर से  अधिवक्ता आशीष श्रीवास्तव एवं आयुष विश्वविद्यालय की ओर से अधिवक्ता अजय द्विवेदी ने पैरवी की। 

 प्रकरण इस प्रकार है कि प्रार्थी अविनाश देशलहरा ने वर्ष 2007– 08 में सिम्स में एमबीबीएस पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया। जो कि उस समय गुरु घासीदास विश्वविद्यालय से सम्बद्ध था। वर्ष 2015 में प्रार्थी ने एमबीबीएस अंतिम वर्ष  की परीक्षा अनुत्तीर्ण होने के बाद व्यक्तिगत कारणों से 3 साल के लिए पाठ्यक्रम को छोड़ दिया। परंतु वर्ष 2019 में प्रार्थी द्वारा डीन सिम्स को आवेदन लिखा गया कि वह अपना एमबीबीएस पाठ्यक्रम को पूर्ण करना चाहता है जिसके लिए उसे आयुष यूनिवर्सिटी द्वारा होने वाली वर्ष 2020 की फरवरी माह की परीक्षा में सम्मिलित होने की आज्ञा दें। परंतु डीन सिम्स द्वारा यह पत्र आगे आयुष यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार को यह अवगत कराते हुए भेजा गया कि हमारे यहां का एक छात्र आपके विश्वविद्यालय की परीक्षा में सम्मिलित होना चाहता है। कृपया उसे सम्मिलित होने की आज्ञा दें। जिसके लिए गुरु घासीदास विश्वविद्यालय द्वारा अनापत्ति पत्र आयुष यूनिवर्सिटी के समक्ष प्रस्तुत किया गया। कहा गया कि आयुष विश्वविद्यालय ही इस छात्र की परीक्षा लेगा एवं उसको उपाधि भी प्रदान करेगा तथा इसके लिए गुरु घासीदास विश्वविद्यालय छात्र की उपस्थिति एवं अन्य दस्तावेज आयुष विश्वविद्यालय के समक्ष प्रस्तुत करता है। परंतु आयुष विश्वविद्यालय ने 17 मार्च 2020 को अपने पत्र में यह लिखकर भेजा कि वह छात्र की परीक्षा लेने के लिए एवं सम्मिलित होने की सहमति देता है परंतु छात्र को उपाधि प्रदान नहीं कर सकेगा क्योंकि छात्र दूसरे विश्वविद्यालय का नामांकित छात्र है। आयुष विश्वविद्यालय के द्वारा अक्टूबर माह के पहले सप्ताह से एमबीबीएस अंतिम की परीक्षा शुरू होने वाली है, जिसके फॉर्म सबमिशन की आखिरी तारीख 22 सितंबर लेट फीस के साथ है, जिसके लिए प्रार्थी इच्छुक है। परंतु आयुष विश्वविद्यालय द्वारा उसे फॉर्म भरने से भी मना कर दिया गया। जिसके लिए प्रार्थी की अधिवक्ता अक्षरा अमित ने अंतरिम राहत के लिए याचिका उच्च न्यायालय के समक्ष लगाई। जिसमें 21 सितंबर को उच्च न्यायालय के माननीय न्यायधीश पी. सैम कोशी द्वारा यह आदेश पारित किया गया कि आयुष विश्वविद्यालय प्रार्थी को एमबीबीएस अंतिम वर्ष की परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए फॉर्म भरने की इजाजत दें तथा उसे आने वाली परीक्षा में बैठने दे।

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