वरिष्ठ पत्रकार चंद्रशेखर शर्मा की बात बेबाक, हमर गुत्तुर गोठ बानी छत्तीसगरही के बखर म एक दिन मनाय जाना वाला दिन “राज भाखा दिवस’ के गाड़ा गाड़ा बधाई … जय हो छत्तीसगढ़ी महतारी के ….अँगूठा छाप मन के कारण हमर राजभाखा बचे हे साहब , पढ़े लिखे बपुरा मन ल तो राम राम बोले मा घलो सरम आथे

चंद्र शेखर शर्मा (पत्रकार )
9425522015

हमर गुत्तुर गोठ बानी छत्तीसगरही के बखर म एक दिन मनाय जाना वाला दिन “राज भाखा दिवस’ के गाड़ा गाड़ा बधाई …
जय हो छत्तीसगढ़ी महतारी के ….अँगूठा छाप मन के कारण हमर राजभाखा बचे हे साहब , पढ़े लिखे बपुरा मन ल तो राम राम बोले मा घलो सरम आथे ।

हमर राज भाखा छत्तीसगरही ल लेकर हमरसरकार अउ संस्थान मन राज भाखा दिवस के दिन भर काबर जागथे मोर समझ मा नइ आवय ? का छत्तीसगरहि भाखा हर गरीबहा मनखे के भाखा हे ? कभू कभू ये मोला सिरतोन के सच घलो लागथे काबर कि हमर गांव गोतर के गरीबहा मनखे मन हर त छत्तीसगरहि में गोठियाथे पर हमर साहब बपुरा मन पइसा वाला मन अंगरेजी अउ हिंदी म गिटिर पिटिर करथे । छत्तीसगरहि भाखा के परचार परसार के बहाना ले कुछ लोगन अपन पेट पाले बर छत्तीसगरहि भाखा के फजीहत करत फिरथे । सरकार के अफसर , अधिकारी मन हिंदी अउ अंगरेजी मा चिठ्ठी पतरी लिखथे पर छत्तीसगरहि ला भुला जाथे । छपास रोगी साहब बपुरा एकाध बार छत्तीसगरहि मा लिखा पढ़ी का करलेथे मीडिया म खबर बन महान बन जाथे अउ फेर वही हिंदी अउ अंग्रेजी में गिटिर पिटिर करे बर लग जाथे । सरकार हमर राज भाखा ल बचाये बर पानी कस पइसा बहावत हे । अफसर अउ सदस्य मन के पेट ल घलो पालत हावय । जय हो मोर राज भाखा छत्तीसगरहि के जोन आज भी अपन अस्तित्व के लड़ाई ल लड़त हावय ।
छत्तीसगढ़ के राजभाखा , “छत्तीसगरही ” हावय त फेर ओमे हमर सरकारी काम-काज काबर नइं होवय ? काबर विधानसभा म हमर मंत्री- विधायक मन छत्तीसगरही में अपन गोठ बात ल सदन में नइ रख पावय ? का हमन ल छत्तीसगरही में बोले गोठियाय म शरम आथे ? का राजभाखा छत्तीसगरही म सरकारी कर्मचारी-अधिकारी मन काम-कारज करही त उंखर तनखा हर कट जाही ? हर सरकार कागज पतरी म तो राज भाखा ल व्यवहार म लान डारिस पर सिरतोन के सच मा व्यवहार मा कब लाही ? छत्तीसगरहि के हालात देख के ठेठ छत्तीसगरहि हाना याद आ गे:-
‘मही मांगे बर जाय, अउ ठेकुआ लुकाय ”
(कोई काम करना भी है लेकिन काम करे में शरम घलो आथे त काम हर कइसे बनहि ,या त शरम ला कर या काम ल कर ।)
अउ आखिर मा :-
कउन परहि इंहा खोल के , अब दिल के किताब ल ,
अब तो मुख(चेहरा)ल ही , अखबार करे ल परहि ।
#जय हो 28 नवंबर 2021 कवर्धा (छत्तीसगढ़)

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